इंदौर, जेएनएन। सक्षम और सशक्त बनने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है शिक्षा। खासतौर पर ऐसे बच्चे जो गरीब परिवारों से भी हैं और शारीरिक रुप से अक्षम । उनके लिए शिक्षा हासिल करना और भी बड़ी चुनौती बन जाता है, ऐसे ही कुछ बच्चों के भविष्य संवारने का काम कर रही हैं ममता बाकलीवाल। वह दृष्टिहीन बच्चों की शिक्षा के लिए योगदान देने का काम कर रही हैं। ममता पिछले कई सालों से दृष्टिहीन बच्चों की शिक्षा के लिए योगदान कर रही हैं। वह उन्‍हें ब्रेल शीट उपलब्ध कराने से लेकर आवश्यकता की सभी चीजें उपलब्ध कराती हैं।

पढ़ाई के अलावा उन्हें खाना और कपड़े उपलब्ध करवाने में भी कंपनी मदद करती है। ममता और उनके पति प्रमथ बाकलीवाल दोनों आईटी फील्ड में हैं। 30 साल पहले जब ममता ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की तो सभी कहते थे नौकरी करना है तो इंजीनियरिंग क्यों कर रही हो। बकौल ममता- मैंने इंजीनियरिंग की, एमबीए किया और तीन लड़कियों के साथ मिलकर औरंगाबाद में ही कंप्यूटर ट्रेनिंग और सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनिंग देने की कंपनी खोली। कुछ समय बाद शादी हो गई तो चेन्न्ई जाना पड़ा।

वहां कुछ करने को नहीं था तो पति ने कंप्यूटर लाकर दिया था, घर बैठकर ही कम्‍प्‍यूटर लैंग्वेज सीखी। कुछ समय बाद इंदौर आ गए और यहां आकर 4 लोगों के साथ 'एम्पॉवर सॉल्यूशंस कंपनी' की शुरुआत की। आज कंपनी में 100 से ज्यादा कर्मचारी हैं। कंपनी सॉफ्टवेयर एक्सपोर्ट का काम करती है और सबसे बड़े क्लाइंट अमेरिका और यूरोप हैं।

ये हैं कुछ खास बिजनेस टिप्‍स
ममता का मानना है कि अपने क्लाइंट्स के साथ भरोसेमंद रिश्ता बनाएं, जितना देने का वादा किया है उससे ज्यादा दें, बिजनेस में हमेशा फाइनेंस का ध्यान रखें। जो भी काम करें उसमें अपना 100 फीसदी दें।

 

By Krishan Kumar