इंदौर। नईदुनिया प्रतिनिधि

जिस तरह भगवान लोगों को नया जीवन देते हैं, ठीक उसी तरह चिकित्सक लोगों का जीवन बचाता है। आज के इस दौर में कई ऐसे लोग भी इस पेशे में आए हैं जिनके लिए सेवा के बजाए मुनाफा प्राथमिकता है। लेकिन, कई ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने इस पेशे को गरिमा प्रदान की है। पोलियो के 50 हजार मरीजों का परीक्षण, 5 हजार पोलियो की निशुल्क सर्जरी, 108 निशुल्क घुटना प्रत्यारोपण, 10 हजार बच्चों को कैलिपर्स वितरण, 400 अस्थिबाधित दिव्यांग बच्चों की निशुल्क सर्जरी कर अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद नेमा ने कई जिंदगियों को संवारा है। चिकित्सा के पेशे को सेवा कार्य की तरह करना और शहर के स्वास्थ्य में ऐसा योगदान सराहनीय है।

डॉ. नेमा बताते हैं कि मेरी इच्छा है कि कम से कम मैं रोजाना एक प्रत्यारोपण सर्जरी पूरी तरह से निशुल्क करूं। यदि हमारे पास इतनी क्षमता है कि हम दूसरों के लिए कुछ कर सकते हैं तो इससे पीछे कदम नहीं हटाना चाहिए। जब मैं इस पेशे में आया तो देखा कि कितने ऐसे लोग हैं जो खुद का इलाज कराने में तक सक्षम नहीं हैं। मैं अस्थि रोग विशेषज्ञ हूं तो सोचता हूं कि सही सर्जरी से एक बार व्यक्ति चलना शुरू कर दे, इसके बाद जिंदगी तो खुद-ब-खुद चलने लगेगी।

डॉ. नेमा के यूनिक हॉस्पिटल में 25 बेड हमेशा गरीब तबके के मरीजों के लिए आरक्षित रहते हैं। यहां गरीब मरीज याचना के साथ नहीं, बल्कि अधिकार के साथ फ्री इलाज कराते हैं। इसके अलावा इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ सभी मरीजों को यहां निशुल्क इलाज मिलता है। जरूरत पड़ने पर सर्जरी तक मुफ्त की जाती है।

पोलियो उन्मूलन में दिया विशेष योगदान
डॉ. नेमा ने प्रदेश को पोलियो मुक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। 25 सालों तक अलग-अलग गांव में जाकर डॉ. नेमा ने करीब 250 शिविर लगाए और इसमें 50 हजार मरीजों का इलाज किया। शिविर के दौरान उन्होंने 5 हजार सफल सर्जरी भी की। घुटना प्रत्यारोपण का इलाज महंगा था और इसे कॉस्ट इफेक्टिव बनाने के लिए डॉ. नेमा ने नई स्वदेसी तकनीकों के जरिए करने की पहल की। इंडिजन्स नी इंप्लांट के जरिए करीब 2 हजार सर्जरी काफी कम खर्च में कर चुके हैं। पेशे से इतर डॉ. प्रमोद नेमा ने 25 ऑर्थोपेडिक हॉस्पिटल इस तरह से डिजाइन किए हैं कि उनमें वेंटिलेशन और लाइट नेचुरल सोर्स से मिले और ऊर्जा की बचत हो।

By Krishan Kumar