SIMI Terrorists Arrested: मध्य प्रदेश के खंडवा में सिमी के दो सदस्य गिरफ्तार, जमानत मिली
SIMI Terrorists Arrested प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया) के दो सदस्यों को गांधी नगर थाना पुलिस ने गुरुवार रात को खंडवा से गिरफ्तार कर किया। शुक्रवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है।
भोपाल, जेएनएन। एक परिवाद के मामले में फरार चल रहे प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया) के दो सदस्यों को गांधी नगर थाना पुलिस ने गुरुवार रात को खंडवा से गिरफ्तार कर किया। शुक्रवार को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया है। गांधी नगर थाना प्रभारी अरण शर्मा ने बताया कि जेल अधीक्षक केंद्रीय जेल भोपाल की ओर से 2014-15 में जेल में बंद रहने के दौरान भूख हड़ताल व कैदियों को भड़काने के मामले को लेकर सिमी के सदस्यों के खिलाफ परिवाद दायर किया गया था। इस मामले में न्यायालय के आदेश पर गांधी नगर थाने में जेल मेनुअल की धारा-52 के तहत केस दर्ज किया गया था। यह मुकदमा जिला अदालत में चल रहा है।
ऐसे हुई गिरफ्तारी
पेशी पर हाजिर नहीं होने के कारण खंडवा निवासी आरोपित 30 वर्षीय रफीक व 31 वर्षीय बबलू उर्फ बबलिया के खिलाफ जिला अदालत ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। सूचना मिलने पर गुरुवार रात खंडवा से दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया। शुक्रवार दोपहर को दोनों आरोपितों को जिला न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट सुरेश बागरिया की अदालत में पेश किया गया। जहां से दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। दोनों आरोपितों को वर्ष-2014 में प्रतिबंधित संगठन सिमी के फरार आरोपितों को संरक्षण देने और अवैध हथियार रखने के मामले में आठ अन्य साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया था। लंबे समय तक जेल में रहने के बाद उन्हें जमानत मिली हुई है।
गौरतलब है कि प्रतिबंधित आतंकी संगठन स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इंडिया यानि सिमी देश ही नहीं बल्कि विदेश में भी कई आतंकी घटनाओं को अंजाम दे चुका है। इसकी स्थापना साल 1977 में अलीगढ़ में हुई थी। इस पर भारत सरकार ने 9/11 हमले के बाद साल 2001 में प्रतिबंधन लगा दिया था। हालांकि, अगस्त 2008 में एक विशेष न्यायाधिकरण में सिमी पर प्रतिबंध हटा लिया फिर ये प्रतिबंध बाद में भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा छह अगस्त 2008 पर बहाल किया गया। सिमी ने 2005 में वाराणसी में हुए धमाकों की जिम्मेदारी लेकर पहली बार अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। इसके बाद उसने नवंबर 2007 में उत्तर प्रदेश में अदालतों के बाहर सिलसिलेवार विस्फोट की घटनाओं को अंजाम दिया था।
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