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    भारतीय उत्पादों को श्रेष्ठ साबित करने के लिए शोध को आधार बनाएगा स्वदेशी जागरण मंच, इन विषयों पर रहेगा जोर

    Updated: Tue, 05 Aug 2025 11:45 PM (IST)

    अमेरिकी टैरिफ को लेकर तनाव और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वदेशी उत्पाद ही घर लाने के आह्वान के बीच स्वदेशी जागरण मंच ने तय किया है कि वह भारतीय उत्पादों को श्रेष्ठ साबित करने के लिए शोध को आधार बनाएगा। शोध से स्वदेशी उत्पादों की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग में लाभ होगा। शोध के लिए कुल आठ विषय चुने गए हैं जिनमें पहला घटती जन्म दर (डेमोग्राफी डेक्लाइन) है।

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    भारतीय उत्पादों को श्रेष्ठ साबित करने के लिए शोध को आधार बनाएगा स्वदेशी जागरण मंच (सांकेतिक तस्वीर)

     जेएनएन, भोपाल। अमेरिकी टैरिफ को लेकर तनाव और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वदेशी उत्पाद ही घर लाने के आह्वान के बीच स्वदेशी जागरण मंच ने तय किया है कि वह भारतीय उत्पादों को श्रेष्ठ साबित करने के लिए शोध को आधार बनाएगा।

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    शोध के लिए आठ विषय चुने, सर्वाधिक जोर घटती जन्मदर पर

    शोध से स्वदेशी उत्पादों की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रांडिंग में लाभ होगा। शोध के लिए कुल आठ विषय चुने गए हैं, जिनमें पहला घटती जन्म दर (डेमोग्राफी डेक्लाइन) है। इस पर सबसे अधिक जोर होने की वजह यह है कि जन्म दर (टीएफआर) 2.1 से कम होने पर जनसंख्या के वर्तमान स्तर को बनाए रखना संभव नहीं होता।

    रिपोर्ट के अनुसार देश की औसत दर 1.9 पर आ गई है

    संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की रिपोर्ट के अनुसार देश की औसत दर 1.9 पर आ गई है। ऐसे में आगे चलकर युवाओं की संख्या कम हो जाएगी, जिससे देश की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। स्वदेशी जागरण मंच शोध कर पता करेगा कि टीएफआर क्यों घट रही है। इसके लिए आर्थिक, शैक्षणिक, सामाजिक, बायोलाजिकल, आवास संबंधी व अन्य में से कौन से कारण जिम्मेदार हैं।

    दिल्ली में अगले दो माह में प्रारंभ हो जाएगा शोध संस्थान

    मंच की क्षेत्रीय बैठक में भाग लेने भोपाल आए मंच के राष्ट्रीय संगठक कश्मीरी लाल ने दैनिक जागरण के सहयोगी प्रकाशन 'नईदुनिया' से बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली में राष्ट्रीय शोध संस्थान का भवन तैयार हो रहा है, जहां अगले दो माह में कार्य प्रारंभ हो जाएगा।

    वहां 70 विशेषज्ञों की टीम शोध करेगी। डेमोग्राफी डेक्लाइन के अतिरिक्त कृषि, अर्थव्यवस्था, रोजगार, पर्यावरण, अंतरराष्ट्रीय संबंध, स्वदेशी उत्पाद, ह्यूमन वैल्यूज (नैतिकता के साथ व्यवसाय) जैसे विषयों पर भी शोध होगा।

     31 राज्यों की जन्मदर दो या इससे कम

    31 राज्यों की टीएफआर दो से कम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-5) वर्ष 2019 -21 के अनुसार देश के 31 राज्यों की जन्मदर दो या इससे कम है। मध्य प्रदेश और राजस्थान की दो है।

    घटती जन्मदर पर भागवत जता चुके हैं चिंता

    बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, मणिपुर और मेघालय में यह दर दो से अधिक है। टीएफआर का मतलब है एक महिला औसतन कितने बच्चे जन्म देती है। आरएसएस के सर संघचालक डा. मोहन भागवत भी घटती जन्मदर पर कई बार चिंता जाहिर कर चुके हैं।