Russia Ukraine News: यूक्रेन से लौटे मेडिकल विद्यार्थियों को पोलैंड, हंगरी व जार्जिया से पढ़ाई पूरी करने का आफर
Russia Ukraine News यूक्रेन से वापस आए भारतीय विद्यार्थियों को पोलैंड हंगरी और जार्जिया के मेडिकल विश्वविद्यालयों द्वारा आमंत्रित किया जा रहा है। ये विश्वविद्यालय शेष वर्षों की फीस पर उनकी पढ़ाई पूरी कराने के लिए तैयार हैं।

भोपाल, दक्षा वैदकर। युद्ध के चलते मेडिकल की पढ़ाई बीच में छोड़कर यूक्रेन से वापस आए भारतीय विद्यार्थियों के लिए उम्मीद के नए दरवाजे खुले हैं। इन्हें यूक्रेन के पड़ोसी देश पोलैंड, हंगरी और जार्जिया के मेडिकल विश्वविद्यालयों द्वारा आमंत्रित किया जा रहा है। ये विश्वविद्यालय शेष वर्षों की फीस पर उनकी पढ़ाई पूरी कराने के लिए तैयार हैं। विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयों ने इस बाबत बाकायदा मेल संदेश भेजे हैं। विद्यार्थियों के अनुसार, उन्हें पोलैंड और हंगरी की सीमा पर भी वहां के विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों द्वारा दाखिले के लिए पर्चे बांटे गए थे। पर्चे में लिखा था कि भारतीय विद्यार्थी अपनी शिक्षा को उस बिंदु से ही शुरू करने में सक्षम होंगे, जहां उन्हें युद्ध के कारण यूक्रेन छोड़ना पड़ा था। हालांकि, युद्ध के दौरान ही यूक्रेन के विश्वविद्यालयों ने भी आनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था शुरू कर दी है और शिक्षक विपरीत परिस्थितियों में बंकर या अपने घरों से पढ़ा रहे हैं। यह बात अलग है कि यह व्यवस्था कब तक सुचारू रहती है, कहना मुश्किल है।
विद्यार्थी असमंजस में
भोपाल की मिताली पाल बताती हैं कि उन्हें पोलैंड की बर्साओ यूनिवर्सिटी से ईमेल आई है। वह अभी एमबीबीएस चौथे सेमेस्टर में हैं और खार्कीव विश्वविद्यालय यूक्रेन में इस साल की तीन लाख 60 हजार रुपये फीस भर चुकी हैं। जून तक उनकी आनलाइन कक्षाएं चलेंगी। इसके बाद हालात ठीक नहीं होने पर कोई निर्णय लेंगी। उधर, इवान फ्रैंको नेशनल यूनिवर्सिटी के छात्र वेदांश खरे का भी यही कहना था कि युद्ध के दौरान कालेज को नुकसान हुआ तभी वे हंगरी, पोलैंड या जार्जिया के विकल्प पर विचार करेंगे। उधर, विनित्सा नेशनल यूनिवर्सिटी, यूक्रेन से पढ़ाई कर रहे भोपाल के हर्षित शर्मा कहते हैं कि कुछ महीने इंतजार करना चाहिए। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) के नए नियम आने दें। हो सकता है कि युद्ध खत्म हो जाए। यूक्रेन में ही आगे की पढ़ाई की जा सके।
विश्वविद्यालय बदलने में एनएमसी के नियम का पेच
नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने पिछले साल नियम बनाया था कि विद्यार्थियों को पूरी पढ़ाई एक ही विश्वविद्यालय से करनी होगी। ऐसे में जब तक कोई नया आदेश जारी नहीं होता, विश्वविद्यालय बदलना मुमकिन नहीं। हालांकि, केंद्र सरकार ने यूक्रेन से लौटे विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए भारत में ही कोई रास्ता निकालने के संकेत दिए थे। एनएमसी भी नए नियमों पर काम कर रहा है।
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