Pet Care Tips: सिर्फ शौक नहीं जिम्मेदारी है पेट्स पालना, जानें- कैसे रखें श्वान या इन पालतू पशुओं का ख्याल
पालतू में चाहे कुत्ता बिल्ली तोता या अन्य कोई भी पालतू हो कुछ बातें सभी जानवरों पर लागू होता है। इन चीज़ों पर गौर करके आप अपने पालतू को एक स्वस्थ वातावरण दे सकते हैं जिससे वो लंबे समय तक बीमारियों से दूर रह सकते हैं।

इंदौर,जागरण आनलाइन डेस्क। कोई पालतू जानवर घर में लाने की सोच रहे हैं तो कई जरूरी बातों पर ध्यान देना जरूरी है। पालतू में चाहे कुत्ता, बिल्ली, तोता या अन्य कोई भी पालतू हो कुछ बातें सभी पालतू जानवरों पर लागु होता है। जैसे- उनका खानपान, रहने की व्यवस्था, समय-समय पर खास जांच , जरूरी चेकअप्स आदि। इन चीज़ों पर गौर करके आप अपने पालतू को एक स्वस्थ वातावरण दे सकते हैं जिससे वो लंबे समय तक बीमारियों से दूर रह सकते हैं।
पालतू जानवर की सारी डिटेल्स पास होनी चाहिए
घर में जिस तरह का भी पालतू जानवर ला रहे हैं , कुत्ता या जो भी जानवर पाल रहे हैं उसके बारे में सारी डिटेल्स आपके पास होनी चाहिए। जैसे- ब्रीड, फैमिली हिस्ट्री, वैक्सीनेशन, डिवॉर्मिंग शेड्यूल आदि। ये जानकारियां उनका बिहेवियर समझने के अलावा किसी बीमारी के दौरान भी बहुत काम आती हैं। जर्मन शेफर्ड, लेब्राडॉर, पामेरियन, बुल डॉग जिस भी ब्रीड को घर ला रहे हैं सबसे पहले तो उस ब्रीड के बारे में अच्छी तरह से पता कर लें क्योंकि साइज़ के हिसाब से उनके रहने की अरेंजमेंट करनी पड़ती है। उनका खानपान भी ब्रीड पर भी डिपेंड करता है। छोटा सा बच्चा है ये सोचकर कुछ भी खाने को न दें क्योंकि इससे उन्हें एलर्जी और दूसरी समस्याएं हो सकती हैं। बेहतर होगा इस बारे में जानवरों के डॉक्टर से सलाह-मशविरा कर लें।
देखरेख का तरीका
अपने आसपास मौजूद जानवरों के डॉक्टर की सारी डिटेल्स रखें जिससे इमरजेंसी की स्थिति में ज्यादा परेशानी न हो। ब्रीड से जुड़ी चेकअप की सारी जरूरी मशीनें वहां मौजूद हों। कुत्ते को नहलाना, उनके नाखून काटने का काम किसी प्रोफेशनल से करवाना बेहतर रहेगा।
विदेशी नस्ल के श्वानों के रोग
अगर बात विदेशी नस्ल के श्वानों की करें तो पग, शीत्जू, बीगल, चाओ-चाओ, लेब्राडोर, गोल्डन रिट्रीवर, जर्मन शेफर्ड, माल्टीज, बीगल्स, जैक रसेल टेरियर, पग, न्यूफाउंडलैंड, पूडल सहित कई प्रजातियों के श्वान पाले जाते हैं। इनमें से पग शीत्जू, बीगल, चाओ चाओ ऐसी प्रजाति के श्वान हैं जिनमें आंखों के रोग सामान्य हैं। वहीं सेंट बर्नाड, ग्रेड डेन और डाबरमैन आदि में चेरी आई की समस्या सामान्य है।
गंभीर बीमारी की वजह से होती है मौत
जानकारी के अभाव में कई पशु उम्र के पहले ही मर जाते हैं और उनकी मौत सामान्य नहीं बल्कि गंभीर बीमारी की वजह से होती है। श्वान का वजन बढ़ने से वे न केवल मधुमेह के शिकार हो सकते हैं, बल्कि उन्हें गठिया, जोड़ों में दर्द आदि की समस्या भी हो सकती है।एक शोध में यह बात सामने आई कि पालतू श्वानों में से करीब 50 प्रतिशत को मधुमेह होता है, जबकि इस बारे में बहुत कम पशु पालक ही जानते हैं और उसका उचित उपचार करवा पाते हैं। मधुमेह की वजह से श्वानों को नेत्र संबंधित परेशानियां भी हो जाती हैं जो एक गंभीर समस्या है।
पशु रोग विशेषज्ञ के अनुसार
पशु रोग विशेषज्ञ के अनुसार, पालतू पशुओं के आहार में वही तत्व शामिल करें जो पशुओं के लिए हैं। कई लोग श्वान को आइसक्रीम, चाकलेट, शरबत, कोल्डड्रिंक यहां तक कि अल्कोहल भी दे देते हैं। यही नहीं, सभी तरह के फल पशुओं को नहीं देना चाहिए। श्वानों को आम, पपीता ही दिया जा सकता है। खट्टे फल उन्हें बिल्कुल भी न दें। यही नहीं पालतू श्वानों को भी सप्ताह में एक दिन कुछ खाने को नहीं दें क्योंकि भूखा रहना भी बेहतर सेहत के लिए जरूरी है।
ज्यादा भोजन न कराएं
पशु रोग विशेषज्ञ के अनुसार, पालतू श्वानों में मधुमेह होना एक आम समस्या है। इसकी वजह उन्हें गलत और जरूरत से अधिक भोजन देना है। श्वानों को कब और कितना भोजन दिया जाए यह जानना जरूरी है। भोजन की मात्रा उनकी शारीरिक संरचना और गतिविधि पर भी निर्भर करती है। आप अपने पालतू श्वान को जितना भोजन दे रहे हैं, उसके अनुरूप उससे शारीरिक श्रम भी कराएं। उन्हें घुमाना, दौड़ाना आदि भी जरूरी है।
रखें नजर इन बातों पर
मधुमेह की वजह से श्वानों में आंखों की समस्या भी हो जाती है। पालतू पशु बार-बार पलकें झपकाए, आंख लाल हो, सतत आंसू बहें, वह आंखों पर बार-बार पंजा मारे या उसकी चाल बदली हुई नजर आए अर्थात जानी-पहचानी जगह पर भी वह टकरा रहा है तो समझ जाएं कि उसे आंखों की समस्या है। श्वानों को आंखों से संबंधित समस्या मधुमेह और चोट से भी हो सकती है। यह भी देखा गया है कि श्वानों में मोतियाबिंद भी एक आम समस्या है।
मीठा और तीखा न दें
मालूम हो कि श्वानों को तीखा, मीठा व तलागला भोजन बिल्कुल भी नहीं देना चाहिए। कई बार यह भी देखा गया है कि लोग अपने श्वान को हाथ से खाना खिलाते हैं जो कि गलत है। इस तरह आप उनके आहार की वास्तविक मात्रा नहीं जान सकेंगे और उन्हें अधिक भोजन करा देंगे।
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