भोपाल, जेएनएन। मध्य प्रदेश के नक्सली क्षेत्र बालाघाट के लांजी तहसील में एक महिला ने अनूठा अभियान छेड़ दिया है। अभियान का नाम है- नशा हटाओ-बेटा बचाओ। अभियान के तहत छह साल में 50 गांवों की लगभग आठ हजार महिलाएं शामिल हो चुकी हैं। इस अभियान से प्रेरित होकर 600 से अधिक युवाओं ने नशा छोड़ दिया है। महिला का कहना है कि सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है, लेकिन बेटों को नशे से बचाने के लिए भी अभियान शुरू करने की जरूरत है।

नशा हटाओ- बेटा बचाओ अभियान

जिला पंचायत सदस्य ज्योति ईश्वर उमरे ने बताया कि बेटों को लेकर परिवार वाले थोड़े लापरवाह हो रहे हैं। ज्यादातर गांवों में यह देखा जाता है कि घर के लड़कों को शाम और रात के बाद घर से कहीं भी आने-जाने पर कोई रोक टोक नहीं होती है। यही वजह है कि युवा पीढ़ी नशे की आदी होने लगी है।

उन्होंने कहा कि यदि परिवार में बेटा नशा करने लगता है तो रोजगार करने वाला कोई नहीं बचता, जिससे परिवार कि आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगती है, इसीलिए 2016 में बेटा बचाओ अभियान की शुरुआत की। ज्योति ने बताया कि हम ज्यादा से ज्यादा युवाओं की माताओं को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं ।

गांव में रैली के जरिये महिलाओं को जोड़ा जा रहा

ज्योति ने बताया कि इस अभियान के चलते गांवों में रैली भी निकाली जाती है। इस दौरान गांव की महिलाओं को इस अभियान के बारे में बताया जाता है और उसके बाद उन्हें रैली में शामिल करते हैं। ज्योति ने बताया कि अभियान के शुरआती दिनों में महिलाओं को समझाने में दिक्कतें आई लेकिन अब अभियान से हजारों महिलाएं जुड़ गई हैं, जिससे यह अभियान महाराष्ट्र के गोंदिया जिले तक पहुंच गया है।

अभियान का असर युवा पीढ़ी पर दिख रहा है

एक अन्य गांव की महिला संगीता धुवारे ने बताया कि जब पहली बार उनके गांव में बेटा बचाओ की रैली निकाली गई थी तो वे खुद उसमें शामिल हुईं थीं। उनको यह नशा मुक्ति अभियान अच्छा लगा, जिसके बाद उन्होंने अपने बेटे को नशा मुक्ति अभियान के बारे में बताया जिससे उसने नशे को छोड़ दिया। उन्होंने बताया कि हमारे गांव की सौ से ज्यादा महिलाएं इस अभियान में शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि ऐसी कई महिलाएं हैं जिसने बच्चों ने इस अभियान के तहत नशा छोड़ दिया है और इस अभीयान का असर युवा पीढ़ी पर दिख रहा है।

Edited By: Nidhi Vinodiya

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