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    Bhopal News: मध्यप्रदेश में पुरानी इमारतें तोड़ कर नई बिल्डिंग बनाना होगा आसान, बनाई जाएंगी हाईराइज इमारतें

    मध्यप्रदेश के हाउसिंग बोर्ड ने हाउसिंग रिडेवलपमेंट की एक पालिसी तैयार की है जिसमें अब पुरानी जर्जर बहुमंजिला इमारतों की जगह नई बिल्डिंग्स बनाना आसान हो जाएगा। इस पालिसी की स्वकृति के लिए इसे मंगलवार को कैबिनेट में भी रखा जाएगा।

    By Jagran NewsEdited By: Nidhi VinodiyaUpdated: Tue, 22 Nov 2022 10:33 AM (IST)
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    मध्यप्रदेश हाउसिंग बोर्ड ने हाउसिंग रिडेवलपमेंट, फाइल फोटो

    भोपाल, जागरण डिजिटल डेस्क : मध्यप्रदेश के हाउसिंग बोर्ड ने हाउसिंग रिडेवलपमेंट की एक पालिसी तैयार की है, जिसमें अब पुरानी जर्जर बहुमंजिला इमारतों की जगह नई बिल्डिंग्स बनाना आसान हो जाएगा। इस पालिसी की स्वकृति के लिए इसे मंगलवार को कैबिनेट में भी रखा जाएगा। इस पालिसी के लागू होने से प्रदेश के बड़े शहरों की 30 साल से ज्यादा पुरानी इमारतों को तोड़कर नई हाई टेक बिल्डिंगें आसानी से बनाई जा सकेंगी। इस निति के अंतर्गत डेवलपर को बढ़ा हुआ फ्लोर एरिया रेशियो(एफएआर) मिलेगा। वहीं निर्माण अधिक होने से पुरानी बिल्डिंग के मुकाबले डेवलपर को कम से कम 20 प्रतिशत ज्यादा निर्माण कर फ्लैट के मालिकों को देना होगा।

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    महाराष्ट्र व गुजरात की पॉलिसी के अध्ययन के बाद बनाई यह पालिसी

    मध्यप्रदेश की यह हाउसिंग स्कीम दो योजनाओं के अध्ययन के बाद बनाई गई गई है। एक महाराष्ट्र की रिडेवलपमेंट आफ को-आपरेटिव हाउसिंग सोसायटीज और ग्रेटर मुंबई के डेवलपमेंट कंट्रोल एंड प्रमोशन रेगुलेशन। इस पालिसी के नए निर्माण में फ्लोर एरिया रेशियो 0.5 करना तय किया गया है। जो जमीन के एरिया, एप्रोच और सड़क की चौड़ाई पर देपेंद होगा। वर्त्तमान में ज्यादातर जगहों पर 1.5 से 2 एफएआर पर इमारतें बनी हुई हैं। इससे नागरिकों को नया फ्लैट भी मिलेगा वहीं डेवलपर को भी फायदा होगा।

    राजस्व शुल्क में मिलेगी छूट

    इस निति में यह कहा गया है कि प्लाट का एरिया 2500 वर्ग मीटर होना चाहिए। वहीं सड़क 12 मीटर चौड़ी होनी चाहिए। नए कंस्ट्रक्शन में व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए एफएआर का दस फीसदी किये जाने का प्राविधान है। जो कि अभी यह मात्र 0.5 प्रतिशत है। यही नहीं नगर निगम व राजस्व के चार्जेस और स्टांप ड्यूटी में भी छूट का प्राविधान बनाया गया है।

    अब डेवलपर फ्लैट मालिकों को देंगे किराया

    • - इस नीति के लागू होते ही मध्य प्रदेश में हाउसिंग बोर्ड के साथ-साथ पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन, बीडीए जैसी एजेंसियों के साथ प्राइवेट डेवलपर भी इस इसके तहत काम कर सकेंगे
    • - डेवलपर को नई इमारत बनने तक वहां रहने वाले लोगों के लिए रहने की व्यवस्था भी करनी होगी।
    • - डेवलपर जब तक घर नहीं बनता तब तक लोगों को घर या घर का किराया भी देना होगा।
    • - इस नीति के तहत डेवलपर को तीन साल के अंदर बिल्डिंग कार्य पूरा करना होगा।
    • - बिल्डिंग बनने के तीन साल तक डेवलपर को उसका मेंटेनेंस करना पड़ेगामेंटेनेंस।
    • - रहवासी समितियों की सहमति के बाद ही किसी नए निर्माण को बनाया जा सकेगा।
    • -पब्लिक और प्राइवेट हाउसिंग स्कीम के तहत 51 प्रतिशत आवासियों की सहमति होना अनिवार्य है।

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