अंजली राय, भोपाल। आयुर्वेद में चांदी का उपयोग भस्म के रूप में जीवाणुओं को मारने के लिए सदियों से किया जाता रहा है, लेकिन विज्ञानियों ने अब चांदी के नैनो कणों से बैक्टीरिया और फंगस को खत्म करने तरीका निकाला है। भोपाल स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आइसर) के विज्ञानियों ने एक शोध में पाया है कि नैनो कणों में रोगाणु रोधी गुण होते हैं।

अब इस तकनीक से कई तरह की संक्रामक बीमारियों का इलाज किया जा सकेगा।रसायन और जीवविज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं की टीम ने शोध में पाया है कि चांदी के ये नैनोकण चार घंटे के अंदर विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया व फंगस को मारने की क्षमता रखते हैं। शोधकर्ताओं ने चांदी के इन नैनो कण को बनाने में अमीनो एसिड टाइरोसिन का प्रयोग किया है।

जीव विज्ञान विभाग के प्रोफेसर(डा.) चंदन साही, रसायन विभाग के प्रोफेसर (डा.) सप्तर्षि मुखर्जी और शोधार्थी शुभजित चक्रवर्ती, प्रीति सागरिका और सौरभ राय ने मिलकर इस पर शोध किया है। इसका प्रकाशन अमेरिकन केमिकल सोसायटी जर्नल में हो चुका है।

इन बीमारियों के इलाज में मिलेगी मदद

इस शोध के माध्यम से निमोनिया, किडनी और लिवर में संक्रमण, यूटीआइ व अन्य तरह के संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं को मारने वाली दवाएं बनाने में मदद मिलेगी। प्रो. सप्तर्षि मुखर्जी के अनुसार, अब दवा कंपनियों को यह तय करना है कि इन नैनो कणों का उपयोग दवाओं के उत्पादन में कैसे किया जाए।

इस तरह करता है काम

प्रो. मुखर्जी के अनुसार ये नैनों कण कोशिका के अंदर जाने के बाद रिएक्टिव आक्सीजन प्रजाति की मात्रा बढ़ा देते हैं, जो कोशिका के किसी भी तरह के प्रोटीन आदि को खत्म करने में कारगर होती है। इस कारण बैक्टीरिया और फंगस काफी कम समय में ही मर जाते हैं।

बता दें कि अभी तक यह शोध सिल्वर नाइट्रेट और प्रोटीन के साथ किया जा चुका है, लेकिन ऐसा पहली बार है जब प्रोटीन की जगह अमीनो एसिड टायरोसिन का उपयोग किया गया है। यह प्रोटीन की तुलना में ज्यादा कारगर भी है। यह टायरोसिन मांस, डेयरी, नट्स और बींस सहित कई खाद्य पदार्थों में मौजूद होता है। चांदी के ये नैनो कण बाल के आकार से भी एक लाख गुना छोटे होते हैं और कोशिका में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं।

नए भारत के निर्माण में सहायक

शोधकर्ताओं के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने जीवाणु एंटीबायोटिक प्रतिरोध को आज मानव स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ा संकट बताया है। कोरोना के कारण एंटीबायोटिक दवाओं के बड़े पैमाने पर उपयोग के कारण आज भारत रोगाणुरोधी प्रतिरोध की समस्या से भी जूझ रहा है। ऐसे में यह तकनीक नए स्वस्थ भारत के निर्माण में भी सहायक साबित हो सकती है।

चिकित्सकों ने प्राचीन काल से संक्रमण को रोकने और उपचार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न् रूपों में चांदी का उपयोग किया है।यह दवा कंपनियां तय करेंगी कि नैनो पार्टिकल्स का उपयोग दवाओं के रूप में किस तरह किया जाए। -प्रो सप्तर्षि मुखर्जी, प्रोफेसर, रसायन विज्ञान विभाग, आइसर

इस शोध से चिकित्सा जगत में काफी फायदा होने वाला है। चांदी के नैनो कण काफी उपयोगी साबित होंगे।

- डा. चंदन साही, प्रोफेसर, जीवविज्ञान विभाग, आइसर

आयुर्वेद में चांदी भस्म का उपयोग कई गंभीर बीमारियों के इलाज में कारगर तरीके से आठवीं सदी से हो रहा है।चांदी को उच्च तापमान पर गर्म कर उसमें जड़ी-बूटियां मिलाकर भस्म तैयार की जाती है। इसमें संक्रमण रोधी गुण होते हैं।भस्म बनाने में चांदी में कई तरह के रासायनिक बदलाव होते हैं, जिससे इलाज में वह बहुत गुणकारी हो जाती है।

- डा. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कालेज, भोपाल

Edited By: Abhishek Tiwari

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