MP News: तय समय पर पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र पहुंचे जहरीले कचरे से भरे कंटेनर, रास्ते भर तैनात रहे पुलिस अधिकारी
यूनियन कार्बाइड कारखाने का 337 टन जहरीला कचरा गुरुवार तड़के ही तय समय पर पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र पहुंच गया। कंटेनर पीथमपुर की इंडस्ट्रियल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी (रामकी ) के मुख्य गेट से सुबह 4 बजकर 16 मिनट पर प्रवेश होना शुरू हुए और चार बजकर तक 21 मिनट पर सभी 12 कंटेंनर परिसर में पहुंच गए। इसके लिए 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरीडोर बनाया गया जिसमें जगह-जगह पुलिस तैनात रही।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। यूनियन कार्बाइड कारखाने का 337 टन जहरीला कचरा गुरुवार तड़के ही तय समय पर पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र पहुंच गया। कंटेनर पीथमपुर की इंडस्ट्रियल वेस्ट मैनेजमेंट कंपनी (रामकी ) के मुख्य गेट से सुबह 4 बजकर 16 मिनट पर प्रवेश होना शुरू हुए और चार बजकर तक 21 मिनट पर सभी 12 कंटेंनर परिसर में पहुंच गए। इसके लिए 250 किलोमीटर का ग्रीन कॉरीडोर बनाया गया, जिसमें जगह-जगह पुलिस तैनात रही।
कंटेनरों के साथ एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड भी थी
कंटेनरों के साथ एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि टीमों के वाहन भी रवाना हुए थे, इस तरह करीब 18 वाहन शामिल थे। इस कचरे को कंटेनरों में लोडिंग के काम में डेढ़ सौ मजदूरों ने पंद्रह शिफ्ट में काम करके कचरे को कंटेनरों में अपलोड कराया।
मजदूरों की पीपीई किट, शूज, पानी की डिस्पोजल दिए गए
मजदूरों की पीपीई किट, शूज, पानी की डिस्पोजल, बोलतें और अन्य सामान को भी अलग से जंबो बैग में लोड कर दिया गया है। यहां से रवाना हुआ कारकेट सीधा पीथमपुर में रुका। अब कचरे को वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोज किया जाएगा। मंगलवार को ही कचरा पैकिंग का काम पूरा कर लिया गया था, जिसके बाद जेसीबी की मदद से कंटेनरों में जंबो बैग्स को लोड किया गया।
मंगलवार को 31 दिसंबर होने की वजह से कचरे को नहीं ले जाया जा सका। जिसके बाद बुधवार रात नौ बजे कंटेनरों को रवाना किया गया।
एक कंटेनर में एवरेज 30 टन कचरा भरा गया है
एक कंटेनर में एवरेज 30 टन कचरा भरा गया। यह कचरा फेक्ट्री के अंदर रखा था, जिसे खास जंबो बैग में पैक किया गया है। ये एचडीपीई नान रिएक्टिव लाइनर के बने हैं। इनमें मटेरियल में कई रिएक्शन नहीं हो सकता।
परिसर की मिट्टी को भी इकट्ठा किया गया
यूका परिसर में बिखरे हुए कचरे को इकट्ठा करने के साथ उस समय परिसर की मिट्टी को भी इकट्ठा किया गया। यूका में बनने वाले कीटनाशक के लिए एक रिएक्टर था। रिएक्टर में बचे केमिकल को भी एकत्रित किया गया है। यूका जिस कीटनाशक का उत्पादन करता था। उसका नाम सीवन था। यह बचा हुआ कीटनाशक भी कचरे में मौजूद है। जिस एमआईसी गैस के प्लांट से रिसाव हुआ था, वह नेफ्थॉल से बनाई जाती थी।
परिसर में बड़ी मात्रा में यह नेफ्थाल भी था। कीटनाशक बनाने की प्रक्रिया रुकने के कारण प्रोसेस के बीच में बचा हुआ केमिकल भी कचरे के साथ ले जाया गया है। पीथमपुर के लिए यह रास्ता पकड़ाहर कंटेनर का एक यूनिक नंबर बनाया गया है।
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