भोपाल, संजय मिश्र। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा मध्य प्रदेश में दिसंबर के प्रथम सप्ताह में बुरहानपुर से प्रवेश करेगी। अगले वर्ष मध्य प्रदेश विधानसभा के चुनाव होने हैं, इसलिए कांग्रेस इस यात्रा को भुनाने की कोशिशों में जुटी है। भले ही कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व इसे चुनावी राजनीति से अलग प्रचारित कर रहा है, लेकिन सच यह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ इसे चुनावी यात्रा की शुरुआत मानकर ही तैयारियां कर रहे हैं।

कांग्रेस के विधायक लक्ष्मण सिंह के शब्दबाण

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह यात्रा के राष्ट्रीय संयोजक हैं। यह यात्रा कांग्रेस के पक्ष में कैसा माहौल बनाएगी यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना तो तय है कि राहुल के आने से पहले कांग्रेस नेताओं में छिड़ी जुबानी जंग शुभ संकेत नहीं है। दिग्विजय सिंह के भाई एवं कांग्रेस के विधायक लक्ष्मण सिंह ने तो भारत जोड़ो यात्रा से चुनावी नैया पार होने की संभावना पर एक तरह से सवाल उठा दिया है। उनकी बातों का निहितार्थ है कि ‘ऐसे आयोजन से जनाधार तो बढ़ता है, लेकिन वोट केवल पैदल चलने से नहीं बढ़ते हैं। इसके लिए बूथ स्तर पर प्रबंधन और कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जिसकी फिलहाल कमी है।’

यह समय लोगों को जोड़ने का है, तोड़ने का नहीं

जाहिर है राहुल की यात्रा के पूर्व उनके इस शब्द बाण का निशाना राज्य नेतृत्व पर है जो लंबे समय से उनकी अनदेखी कर रहा है। बात इतनी ही नहीं है। कांग्रेस में कमल नाथ के निर्णयों के खिलाफ खड़ा होना जंग मोल लेने की तरह है। जिन्होंने भी उनके निर्णय पर सवाल उठाया, वे पार्टी में अलग-थलग पड़ गए। यही कारण है कि कमल नाथ चेतावनी देने से भी नहीं चूक रहे कि जिन्होंने कांग्रेस से बाहर जाना है जा सकते हैं। दो दिन पूर्व उन्होंने यहां तक कह दिया कि ‘जिन्हें भाजपा में जाना है जाएं। उनके लिए तो वह अपनी कार उधार में दे देंगे।’ उनके इस बयान पर भाजपा ने तो तंज कसा ही, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के बेटे एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रह चुके अजय सिंह ने भी कह दिया कि यह समय लोगों को जोड़ने का है, तोड़ने का नहीं।

स्पष्ट है कि भारत जोड़ो यात्रा के बावजूद राज्य कांग्रेस में असंतोष के स्वर को थामना आसान नहीं है। बहरहाल, कांग्रेस ने राज्य में राहुल गांधी की यात्रा के लिए जिन क्षेत्रों का चयन किया है, वहां 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा था। खरगोन जिले की सभी सीटें कांग्रेस ने जीती थीं। बड़वानी जिले की केवल एक सीट ही भाजपा जीत पाई थी। भाजपा के गढ़ कहे जाने वाले इंदौर में कांग्रेस ने चार सीटें जीत ली थीं, तो धार की सात में से छह सीटों पर उसने कब्जा किया था। बुरहानपुर की दो सीटों में से एक पर कांग्रेस जीती थी तो एक पर उसके ही बागी प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीते थे।

उज्जैन की बात करें तो यहां की सात में से चार सीटें कांग्रेस की झोली में आई थीं। इस तरह इस क्षेत्र में बढ़त बनाकर कांग्रेस सत्ता की दहलीज तक पहुंचने में कामयाब हुई थी। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कई विधायकों के काग्रेस छोड़ने के बाद हुए उपचुनाव में सांवेर, बदनावर और नेपानगर सीट पर उसके उम्मीदवार हार गए थे। खरगोन जिले की बड़वाह सीट पर कांग्रेस के विधायक सचिन बिरला खंडवा लोकसभा उपचुनाव के समय भाजपा में शामिल हो गए थे। इसलिए 2018 की सफलता को 2023 में दोहराना कांग्रेस के लिए उतना आसान नहीं है, जितना उसके नेता सोच रहे हैं। हाल ही में हुए नगरीय निकायों के चुनाव परिणाम को देखें तो प्रदेश के पांच नगर निगमों में कांग्रेस के उम्मीवार जीते थे।

दिसंबर तक MP पहुंच सकती है भारत जोड़ो यात्रा

सिंधिया के गढ़ ग्वालियर में भी उसके महापौर प्रत्याशी को विजय मिली थी। यही कारण है कि कमल नाथ मानने लगे हैं कि 2023 के विधानसभा चुनाव में एंटी इनकंबेंसी का लाभ उठाकर कांग्रेस सत्ता में आ सकती है। हालांकि राहुल की भारत यात्रा के मार्ग वाले शहरों इंदौर, उज्जैन और बुरहानपुर नगर निगम में उसके उम्मीदवार हार गए थे। उज्जैन और बुरहानपुर में भाजपा की जीत का अंतर कम था, लेकिन जीत तो जीत होती है। बुरहानपुर में असदुद्दीन औवेसी की पार्टी एआइएमआइएम ने कांग्रेस का खेल बिगाड़ दिया था। लगभग यही स्थिति नगर पालिका, नगर परिषद और पंचायतों के चुनावों में रही। माना जा रहा है कि अपने इस गढ़ को संभालने के लिए ही कांग्रेस ने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का रूट राज्य के इस हिस्से में निर्धारित किया है। कांग्रेस की तैयारी के अनुसार अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से प्रदेश में 16 उपयात्राएं प्रारंभ होंगी, जो अलग-अलग स्थानों पर जनसंपर्क करते हुए दिसंबर में भारत जोड़ो यात्रा में सम्मिलित होंगी।

[स्थानीय संपादक, नवदुनिया, भोपाल]

Edited By: Sanjay Pokhriyal

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