Bhojshala ASI Survey: भोजशाला में सर्वे की अवधि बढ़ाने के लिए हाईकोर्ट में आवेदन, एएसआइ ने मांगे कई हफ्ते
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की टीम ने वैज्ञानिक सर्वे का समय बढ़ाने को लेकर उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में आवेदन दिया है। इसमें सर्वे की समय सीमा आठ सप्ताह और बढ़ाने की मांग की गई है। दरअसल न्यायालय के आदेश के अनुसार छह सप्ताह में भोजशाला के 50 मीटर के दायरे में वैज्ञानिक सर्वे का काम करना है। आदेश के बाद 22 मार्च से सर्वे का कार्य शुरू हुआ।
जेएनएन, धार। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की टीम ने वैज्ञानिक सर्वे का समय बढ़ाने को लेकर उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में आवेदन दिया है। इसमें सर्वे की समय सीमा आठ सप्ताह और बढ़ाने की मांग की गई है। दरअसल, न्यायालय के आदेश के अनुसार छह सप्ताह में भोजशाला के 50 मीटर के दायरे में वैज्ञानिक सर्वे का काम करना है।
शिलालेख की लिखावट को पेपर रोल पर प्रिंट किया गया
आदेश के बाद 22 मार्च से सर्वे का कार्य शुरू हुआ। इसमें 32 दिन बीत चुके हैं और अब केवल 10 दिन शेष रह गए हैं। उधर, ज्ञानवापी की तर्ज पर एएसआइ सर्वे के 32वें दिन सोमवार को भोजशाला के भीतरी परिसर में स्तंभों पर लिखे श्लोकों व शिलालेख की लिखावट को पेपर रोल पर प्रिंट किया गया। कमाल मौलाना मस्जिद परिसर में भी केमिकल ट्रीटमेंट का काम हुआ।
रविवार को उत्तरी भाग में जहां नए स्थान का चयन किया गया था, वहां सोमवार को खोदाई को आगे बढ़ाया गया। यहां छह फीट खोदाई हो चुकी है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने बताया कि सोमवार को टीम के सदस्यों ने अलग-अलग काम किया। गर्भगृह में भी तेजी से काम हुआ है।
मुस्लिम पक्ष ने कहा ये बात
मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद ने बताया कि अरबी, फारसी व संस्कृत भाषा को टीम ने पेपर स्टांप पर उकेरा है। मस्जिद परिसर में तदबा यानी शिलालेख निकला है, जिसकी क्लीनिंग करने पर यह साढ़े पांच फीट का दिखाई दे रहा है। इसमें अभी और भी क्लीनिंग व सफाई होगी। उन्होंने बताया कि कुछ समय पूर्व तल घर की बात सामने आई थी, इसमें हमारी आपत्ति थी। इस मामले में हमें बड़ी राहत मिली है। तल घर के नाम पर जो सीढि़यां बताई जा रही थीं, उस सीढ़ी को एएसआइ की टीम द्वारा तोड़ दिया गया है।
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