वैभव श्रीधर, भोपाल। केंद्र सरकार की भारत के ग्रामीण क्षेत्र को सुविधायुक्त और सरल जीवन के लायक बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई आदर्श सांसद ग्राम योजना की दूसरी कड़ी में आज पढ़िए मध्य प्रदेश की स्टेटस रिपोर्ट। मध्य प्रदेश में शुरुआत में तो योजना ठीक चली, लेकिन कोरोना महामारी के बाद से यह गति नहीं पकड़ पा रही है। अधिकारियों के अनुसार नए राज्यसभा सदस्यों से भी जानकारी मांगी गई है कि वह कौन कौन सा गांव गोद लेना चाहते हैं।

योजना के शुरुआती दौर में मध्य प्रदेश में बेहतर काम हुआ। अधिकांश सांसदों ने ग्राम पंचायतों का चयन किया। ग्राम विकास योजना भी बनी और कार्य भी स्वीकृत हुए लेकिन कोरोना काल में योजना ठप सी हो गई। वर्ष 2019 से 2021 के अंत तक 1,394 प्रोजेक्ट ही स्वीकृत हुए। इनमें भी 287 पूरे हुए। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दो वर्ष से कार्य की गति प्रभावित हुई है।

नए सिरे से कार्ययोजना बनना शुरू

कोरोना संक्रमण के दौर से उबरने के बाद अब मध्य प्रदेश की पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने नए सिरे से कार्ययोजना बनाना शुरू किया है, ताकि सांसद आदर्श ग्राम योजना को गति दी जा सके। इसमें खास तौर पर उन गांवों को दायरे में लाया जाएगा, जहां अन्य योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू नहीं हैं।

बदल गया कार्य संभालने वाला विभाग

पंचायत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सांसद आदर्श ग्राम योजना का काम पहले स्टेट इंस्टीट्यूट आफ रूरल डेवलपमेंट (एसआइआरडी) द्वारा देखा जाता था, लेकिन फरवरी से इस काम की देखरेख ज्वाइंट डेवलपमेंट कमिश्नर (जेडीसी) द्वारा की जा रही है। कई सांसद कोरोना के कारण गांव गोद नहीं ले पाए। 2019-2020 में ज्यादातर समय कोरोना में निकल गया। वर्ष 2021 से सांसदों ने गांवों को गोद लेने की प्रक्रिया शुरू की है। सांसद सनी देओल व सोम प्रकाश द्वारा गांवों को गोद लेने की जानकारी मुहैया करवाई गई है।

यह है स्थिति: दो वर्ष पहले इंदौर के सांसद शंकर लालवानी द्वारा गोद लिए तिल्लौर खुर्द गांव में सड़कों को रौंदते और मौरंग की धूल उड़ाते डंपरों से हलाकान ग्रामीणों ने सोचा था कि आदर्श ग्राम होने के बाद उन्हें इस समस्या से निजात मिलेगी। कुछ बेहतर होगा, लेकिन डंपरों से मुक्ति मिलने के बजाय हाल ही में गांव में शराब की नई दुकान की अनचाही सौगात मिल गई। इंदौर शहर की तरह तिल्लौर खुर्द में भी स्वच्छता के लिए कचरा एकत्र किया जाने लगा है, लेकिन यह स्वच्छता केवल दिखावा भर है। कचरा एकत्र करकेगांव के बाहर एक जगह डाला जा रहा है जो उड़कर खेतों में जा रहा है। गीले और सूखे कचरे को छांटने के लिए सेग्रिगेशन शेड बनाया गया है, लेकिन अब तक वहां कूड़ा छंटाई का काम शुरू नहीं हो पाया है। हां, गांव में पानी की टंकी बन गई है जिससे घरों में नल का पानी आने लगा है।

सांसद लालवानी का कहना है कि योजना के अनुसार ही विकास के कार्य हो रहे हैं। शराब की दुकान के मामले में अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। वहीं, पूर्व सांसद सुमित्र महाजन ने सांवेर क्षेत्र के पोटलोद गांव को जब गोद लिया था तो प्रशासनिक मशीनरी गांव के विकास में जुट गई थी। नए-नए प्रोजेक्ट तैयार किए गए। गांव की मुख्य सड़क बनाने का काम शुरू हुआ, लेकिन महाजन का कार्यकाल खत्म होते ही पोटलोद गांव को अफसर भूल गए। जलसंकट की समस्या अभी भी दूर नहीं हो पाई है। भोपाल में सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने योजना के तहत बंगरसिया गांव को गोद लिया था।

वर्ष 2019 से हालिया समय तक ग्राम पंचायत में 27 लाख 49 हजार के कार्य करवाए जा चुके हैं। 34 लाख 80 हजार के स्वीकृत कार्य अभी प्रारंभ नहीं हुए हैं। पूर्व सांसद आलोक संजर ने तारासेवनियां गांव को गोद लिया था। यहां 57 लाख 47 हजार रुपये के नाली निर्माण से लेकर अन्य कार्य कराए गए लेकिन अब स्थिति फिर बिगड़ने लगी है। राज्यसभा सदस्य कैलाश सोनी का कहना है कि कोरोना काल में सांसद निधि नहीं मिली, इसका असर कामों पर पड़ा है लेकिन अब यह फिर प्रारंभ हो गई है। उन्होंने स्कूल में पानी और बाउंड्रीवाल सहित अन्य कार्य करवाए गए हैं। अब नया गांव गोद लेकर जल संरक्षण के लिए काम किया जाएगा।

Edited By: Sanjay Pokhriyal