पिता के इलाज के लिए भीख मांग रही बहनों की भावना ने की मदद, उपचार के लिए दिए एक लाख ग्यारह हजार रुपये
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा कि बीते दिनों इंटरनेट मीडिया पर हल्द्वानी क्षेत्र का एक वीडियो वायरल हो रहा था। जिसमें दो लड़कियां पिता के इलाज के लिए भीख मांग रही थीं। स्थानीय लोग से संपर्क कर दोनों बहनों को देहरादून लाया गया।

जागरण संवाददाता, देहरादून : पिता के इलाज को पैसे जुटाने के लिए भीख मांग रही नाबालिग बहनों की मदद को राज्य आंदोलनकारी और समाजसेवी भावना पांडे आगे आईं। उन्होंने उपचार के लिए नकद एक लाख ग्यारह हजार रुपये दिए। साथ ही जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वह भी आर्थिक सहायता के लिए हाथ बढ़ाएं।
शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में राज्य आंदोलनकारी भावना पांडे ने कहा कि बीते दिनों इंटरनेट मीडिया पर हल्द्वानी क्षेत्र का एक वीडियो वायरल हो रहा था। जिसमें दो लड़कियां पिता के इलाज के लिए भीख मांग रही थीं। स्थानीय लोग से संपर्क कर दोनों बहनों को देहरादून लाया गया। पूछने पर पता चला कि वह बागेश्वर की रहने वाली हैं। उनके पिता गंभीर बीमारी से पीडि़त हैं और उनका दिल्ली के एक अस्पताल में उपचार चल रहा है। इस पर उनकी माता को देहरादून बुलाकर आर्थिक सहायता दी गई।
कहा, परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। इसलिए दोनों बहनों की पढ़ाई का खर्चा और शादी की जिम्मेदारी भी ली गई है। इस तरह के मामले अक्सर सामने आते हैं, लेकिन जब उनकी सच्चाई जानने की कोशिश की जाती है, तो उसमें कई बार सत्यता नहीं रहती। कहा, दोनों बहनों का मामला सही था। इसलिए मदद की गई है।
राज्य आंदोलनकारियों की बैठक आज
लंबित मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज आंदोलनकारियों की आज देहरादून में बैठक होगी। इस बैठक में आंदोलनकारी आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की मांग को लेकर राज्य आंदोलनकारियों का शनिवार को 18वें दिन भी धरना जारी रहा। इस दौरान विनोद असवाल, सूर्यकांत बमराड़ा क्रमिक अनशन पर बैठे। मंच के अध्यक्ष क्रांति कुकरेती ने आंदोलनकारियों को गिरफ्तार किए जाने पर नाराजगी जताई है। जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने कहा कि जिला प्रशासन और सरकार में समन्वय न होने से आंदोलनकारियों की मांग गंभीरता से नहीं ली जा रही है। धरने में अम्बुज शर्मा, पून ङ्क्षसह ङ्क्षलगवाल, नवीन नैथानी, द्वारिका बिष्ट, पंकज रावत, धर्मानंद भट्ट आदि मौजूद रहे।
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