सड़कों पर सफाई, नालियों को वैसे ही छोड़ा

लॉकडाउन में लोगों को हर 20 मिनट में दोनों हाथ अच्छी तरह धोने की हिदायत दी जा रही है वहीं नगरपालिका क्षेत्र में सफाई का एक उदाहरण ऐसा जहां नालियां

By JagranEdited By: Publish:Fri, 03 Apr 2020 03:43 PM (IST) Updated:Fri, 03 Apr 2020 03:43 PM (IST)
सड़कों पर सफाई, नालियों को वैसे ही छोड़ा
सड़कों पर सफाई, नालियों को वैसे ही छोड़ा

जागरण संवाददाता, सोनभद्र : लॉकडाउन में लोगों को हर 20 मिनट में दोनों हाथ अच्छी तरह धोने की हिदायत दी जा रही है वहीं नगरपालिका क्षेत्र में सफाई का एक उदाहरण ऐसा जहां नालियां आमजन को ठहरने नहीं दे रही हैं। सड़कों को सैनिटाइज तो किया गया लेकिन नालियों को वैसे ही छोड़ दिया गया बजबजाने के लिए।

यह वार्ड है एक। इसमें दलित आबादी ज्यादा है। इससे जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर सफाई तो दिखी लेकिन संकरी गलियों में गंदगी का अंबार है। नालियों की दशा तो भयावह है। लॉकडाउन में नालियों से कचरा नहीं निकला है। नालियों बजबजा रही हैं। इस वार्ड में गरीबों की तादाद भी अधिक है और घनी आबादी है। इसके अलावा गरीबों वाले इस वार्ड में लॉकडाउन के बाद कोई अधिकारी यहां के रहवासियों का हाल जानने नहीं पहुंचा है। यहां सैनिटाइजर का छिड़काव तो दूर मच्छररोधी दवाओं का भी छिड़काव नहीं हुआ है। जनप्रतिनिधियों की बात ही दूर है। रहवासियों ने गरीबों की सूची बनाकर खाद्य पदार्थ मुहैया कराने, नालियों की सफाई करने की मांग प्रमुखता से की है। बोले रहवासी .. सफाई में लापरवाही बरती जा रही है। नाली जाम है, यह सफाई न होने का साक्ष्य है। मच्छररोधी दवाओं का भी छिड़काव नहीं हुआ है।

- राजेश नाली बजबजा रही है। लॉकडाउन के चलते वे घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। नालियों से उठने वाली बदबू से वे परेशान व हलकान हैं।

- सावित्री देवी जिलाधिकारी को सफाई न होने पर एक फ्री काल सेंटर की स्थापना करनी चाहिए, जिससे स्थानीय अधिकारियों की लापरवाही की जानकारी डीएम तक पहुंच सके।

- लखवंती नपा का वार्ड एक दलित बस्ती अहम है। यहां गरीब रहते हैं, शायद यही वजह है कि लोग इस बस्ती की तरफ ध्यान नहीं दे रहे। लॉकडाउन के बाद तमाम परिवारों में चूल्हा तक नहीं जल रहा।

- चंदा राब‌र्ट्सगंज नगर के मुख्य मार्गों पर जनता क‌र्फ्यू के दौरान सैनिटाइजर का छिड़काव किया गया था लेकिन बस्ती में अभी तक मच्छररोधी दवाओं का छिड़काव ही नहीं हुआ। सब कुछ दिखावा है।

- राजाराम बस्ती में कितने लोगों को खाद्य पदार्थ मिल रहा, इसकी जानकारी लेने वाला कोई नहीं है। कई परिवार इस विपरित परिस्थिति में परेशान व हलकान हैं।

- राकेश भारती

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