क्या शादी के हैंपॉजिटिव इफेक्ट्स..

विद्या बालन इन दिनों शादीशुदा जिंदगी का आनंद उठा रही हैं। इसके साथ ही वह एंजॉय कर रही हैं लीक से हटकर गढ़ी गयी भूमिकाएं। अब वह फरहान अख्तर के संग नजर आएंगी साकेत चौधरी निर्देशित फिल्म 'शादी के साइड इफेक्ट्स' में। फिर दिखेंगी हिंदी फिल्मों के इतिहास में पहली

By Edited By: Publish:Thu, 07 Nov 2013 11:30 AM (IST) Updated:Thu, 07 Nov 2013 11:49 AM (IST)
क्या शादी के हैंपॉजिटिव इफेक्ट्स..

मुंबई। विद्या बालन इन दिनों शादीशुदा जिंदगी का आनंद उठा रही हैं। इसके साथ ही वह एंजॉय कर रही हैं लीक से हटकर गढ़ी गयी भूमिकाएं। अब वह फरहान अख्तर के संग नजर आएंगी साकेत चौधरी निर्देशित फिल्म 'शादी के साइड इफेक्ट्स' में। फिर दिखेंगी हिंदी फिल्मों के इतिहास में पहली लेडी जासूस की कहानी पर आधारित फिल्म 'बॉबी जासूस' में।

विद्या कहती हैं, 'शादी के मसले पर आज की पीढ़ी में द्वंद्व की खबरें सुनने को मिलती रहती हैं। वे उसे कॅरियर की राह में बैरियर मानते हैं, जो मेरे ख्याल से उचित नहीं। उलटे शादी बाद आप ज्यादा जिम्मेदार बनते हैं। जिंदगी व्यवस्थित हो जाती है। मानसिक संबल देने वाला इंसान सदा आपके साथ रहता है। आप बेवकूफी और बचकानी हरकतें करने से बाज आते हैं। यह कमाल का अहसास है। शादीशुदा होने के बाद से मेरी सोच, काम के प्रति लगन और अप्रोच में और ज्यादा सुधार आया है। उम्मीद करती हूं कि मुझे जिंदगी भर काम मिलता रहेगा। जब नानी या दादी बनूंगी तो भी एक्टर ही रहूंगी।

मैं शुरू से लीक से हटकर गढ़े गए रोल करती रही हूं। मेरा वह स्टैंड अब भी कायम है। मैं आगे भी वैसे रोल करती रहूंगी। 'घनचक्कर' में पंजाबी शादीशुदा महिला का रोल प्ले किया था। 'शादी के साइड इफेक्ट्स' में भी एक शादीशुदा महिला का किरदार निभा रही हूं। मैं जैसी रियल लाइफ में हूं, उससे बेहद अलग है यह भूमिका। सच कहूं, तो यही बात मुझे इंटरेस्टिंग लगती है। अलग तरह की भूमिका निभाने में जो आनंद आता है, उसकी बात ही अलग होती है। मुझे यकीन है कि 'शादी के साइड इफेक्ट्स' एक गेमचेंजर साबित होगी। फिल्म पत्‍‌नी के गैर-जरूरी वहम, बच्चे के प्रति पति को लापरवाह समझने और असुरक्षा पर कटाक्ष है।

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फिल्म के जरिए हमने कहने की कोशिश की है कि शादी को बैगेज के रूप में न लें। शादी से पहले आप जिस तरह किसी के साथ पेश आते थे, वैसा ही रवैया शादी के बाद भी रखें। वैसा न होने पर ही पति-पत्‍‌नी के रिश्तों में खटास आती है। एक सीमा के बाद किसी के पर्सनल स्पेस में दखलंदाजी न करें। पति के प्रति पूर्वाग्रह न पालें। मर्दो का नजरिया है कि औरत या तो सीता होती है या वेश्या होती है, लेकिन यह नजरिया पूरी तरह गलत है। ठीक उसी तरह पति अपने बच्चे की देखभाल ढंग से नहीं कर सकते, वह भी गलत है।'

विद्या को इस बात की खुशी है कि फिल्मों में महिलाओं का दखल बढ़ा है। वह कहती हैं, 'अब महिलाएं केवल हेयर ड्रेसर या एसिस्टेंट डायरेक्टर भर नहीं हैं। फिल्म निर्माण के हर क्षेत्र में उनका दखल बढ़ा है। इसकी वजह से फिल्मों में महिलाओं के चरित्र, निरूपण और प्रस्तुति में भी फर्क आया है। यकीन करें दस साल पहले 'कहानी' और 'बर्फी' जैसी फिल्मों की उम्मीद नहीं की जा सकती थी।'

'शादी के साइड इफेक्ट्स' में विद्या के संग फरहान अख्तर हैं। दोनों पहली बार एक साथ स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। विद्या कहती हैं, 'हम दोनों में एक चीज कॉमन है। वह है लगातार रिस्क लेते रहना। फरहान फिल्म में पहली बार कॉमेडी करते नजर आएंगे। उनका ह्यूमर कमाल का है। स्क्रीन पर अदाकारी के जरिए वह उसे दिखाएंगे। फिल्म में थोपी हुई कॉमेडी नहीं है। हम सिचुएशन के हिसाब से लोगों को हंसाएंगे।'

(अमित कर्ण)

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