नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। गौतम बुद्ध का जन्म इक्ष्वाकु वंश के क्षत्रिय राजा शुद्धोधन के घर  563 ईसा पूर्व में हुआ था। इनकी माता जी का नाम महामाया था। इनके जन्म के महज 7 दिनों बाद इनकी माता जी पंचतत्व में विलीन हो गई थी। इसके बाद बुद्ध का पालन पोषण इनकी मौसी जी महाप्रजापती गौतमी ने किया। गौतम बुद्ध बाल्यावस्था से ही अध्यात्म प्रवृति के व्यक्ति थे। इस वजह से 30 वर्ष की आयु में गौतम बुद्ध सन्यासी बन गए। वर्षों की तपस्या के बाद गौतम बुद्ध को बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई। तभी से लोग उन्हें भगवान् बुद्ध कहकर पुकारने लगे। तत्कालीन समय में बौद्ध धर्म महज भारत और नेपाल तक सीमित था, किन्तु सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म को पूरे विश्व में फ़ैलाने की कोशिश की। आधुनिक समय में न केवल भारत और नेपाल, बल्कि एशिया सहित दुनियाभर में भगवान बुद्ध की पूजा उपासना की जाती है। इसके लिए बड़ी संख्या में लोग भगवान बुद्ध की ज्ञान प्राप्ति स्थल बिहार के बोधगया आकर भगवान बुद्ध के दर्शन कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। अगर आप भी धार्मिक यात्रा का प्लान बना रहे हैं और कोरोना काल में देश में ही भगवान बुद्ध के दर्शन करना चाहते हैं, तो आप इन जगहों पर जा सकते हैं-

बोधगया, बिहार

बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों के लिए सबसे पवित्र स्थल बोधगया है। इस जगह पर ही भगवान बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। अतः यह स्थल बेहद पवित्र है। आज भी बोधि वृक्ष मंदिर प्रांगण में स्थित है। हालांकि, यह चौथी पीढ़ी का वृक्ष है। इतिहासकारों की मानें तो दो बार बोधि वृक्ष को नष्ट करने की कोशिश की गई। वहीं, एक बार प्राकृतिक आपदा की वजह से नष्ट हुआ था। इस मंदिर का निर्माण सम्राट अशोक ने किया था। आप भगवान बुद्ध के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्ति हेतु बोधगया जरूर जाएं।

सारनाथ मंदिर, वाराणसी

इस जगह पर भगवान बुद्ध ने पहली बार उपदेश दिया था। अतः बौद्ध धर्म को मानने वाले लोगों के लिए यह पवित्र स्थल है। इस मंदिर का निर्माण भी सम्राट अशोक ने करवाया था। यहां चौखंडी स्तूप, मूलगंध कुटी विहार, धमेख स्तूप और धर्मराजिका स्तूप भी हैं।

महापरिनिर्वाण मंदिर, कुशीनगर

उत्तर प्रदेश राज्य के कुशीनगर में महापरिनिर्वाण मंदिर है। मंदिर में बुद्ध की 6 फीट लंबी मूर्ति है, जो एक चुनरी से हमेशा ढकी रहती है। मूर्ति का सिर्फ चेहरा दिखाई देता है। यह मंदिर देश-विदेश के दर्शनार्थियों लिए पावन स्थल है, क्योंकि कुशीनगर में ही गौतम बुद्ध पंचतत्व में विलीन हो गए। भगवान बुद्ध के शिष्य स्वामी हरिबला ने लाल बलुआ पत्थर से मंदिर का भव्य निर्माण करवाया है। आप भगवान बुद्ध के दर्शन हेतु महापरिनिर्वाण मंदिर जरूर जाएं।

Edited By: Umanath Singh