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    Monastery: शांति और सुकून पाने के लिए लद्दाख के आसपास इन बौद्ध मठों की जरूर करें सैर

    By Pravin KumarEdited By:
    Updated: Thu, 11 Aug 2022 01:00 PM (IST)

    Monastery हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में यह सबसे बड़ा मठ है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 4166 मीटर है। इस मठ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 1 हजार साल पुराना है। इसके बावजूद यह मठ आज भी बेहद खूबसूरत है।

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    Monastery: शांति और सुकून पाने के लिए लद्दाख के आसपास इन बौद्ध मठों की जरूर करें सैर

    दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Monastery: त्योहारों का सीजन चल रहा है। इस सीजन में लोग वेकेशन पर जाना पसंद करते हैं। इस मौके पर लोग पिकनिक स्पॉट, हिल स्टेशन और धार्मिक स्थलों पर जाते हैं। अगर आप भी आने वाले दिनों में घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं, लेकिन आप शांति और सुकून वाली जगहों पर जाना चाहते हैं, तो लद्दाख के आसपास इन बौद्ध मठों की धार्मिक यात्रा कर सकते हैं। आइए, इनके बारे में सबकुछ जानते हैं-

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    की मठ

    हिमाचल प्रदेश के लाहौल स्पीति में यह सबसे बड़ा मठ है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 4,166 मीटर है। इस मठ की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह 1 हजार साल पुराना है। इसके बावजूद यह मठ आज भी बेहद खूबसूरत है। की मठ का निर्माण 11 वीं सदी में किया गया था। वर्तमान समय में भी मठ में प्राचीन पेंटिंग और बौद्ध स्क्रॉल उपलब्ध हैं। इस मठ में हर साल 300 लामे को धर्मिक ज्ञान देकर प्रशक्षित किया जाता है। अगर आप शांति और सुकून की तलाश में हैं, तो की मठ की धार्मिक यात्रा कर सकते हैं।

    ताबो मठ

    इस मठ की भी गिनती भारत के प्राचीन मठों में होती है। यह मठ स्पीति नदी के किनारे स्थित है। इस मठ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। इस मठ की स्थापना साल 996 में लोचावा रिंगचेन जंगपो ने की थी। इस तरह यह मठ भी एक हजार साल पुराना है। ताबो मठ में कुल 9 देवालय हैं। इनमें 3 देवालयों में मूर्तियां स्थापित हैं। इनमें चुकलाखंड देवालय में बुद्ध के संपूर्ण जीवन को चित्र के माध्यम से बताने की कोशिश की गई है।

    लामायुरू मठ

    यह मठ कश्मीर के लेह से महज 127 किलोमीटर की दूरी पर लामायुरू गांव में है। इस गांव के नाम पर मठ का नाम रखा गया है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई 3,510 मीटर है। लामायुरू गांव को प्राकृतिक खूबसूरती के लिए मूनलैंड भी कहा जाता है। इस मठ की स्थापना 11वीं सदी में हुई है। यह लद्दाख में स्थित सबसे पुराना मठ है।