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    चलें तिरुवनंतपुरम जहां इतिहास और विज्ञान घुले मिले हैं

    By Molly SethEdited By:
    Updated: Mon, 06 Nov 2017 04:15 PM (IST)

    तिरुवनंतपुरम या त्रिवेंद्रम शहर दक्षिणी राज्‍य केरल की राजधानी है। आइये कल यहां होने वाले टी20 मैच से पहले आपको यहां की सैर करा दें।

    चलें तिरुवनंतपुरम जहां इतिहास और विज्ञान घुले मिले हैं

    तिरुवनंतपुरम वेधशाला

    यह वेधशाला तिरुवनंतपुरम के संग्रहालय परिसर में स्थित है। यहां के महाराजा स्वाति तिरुल ने 1837 में इसका निर्माण करवाया था। यह भारत की सबसे पुरानी वेधशालाओं में से एक है। यहां आप अंतरिक्ष से जुड़ी सारी जानकारी प्राप्‍त कर सकते है। इसके साथ ही यहां एक पहाड़ी के सामने खूबसूरत बगीचा भी है जहां गुलाब के फूलों का बेहतरीन संग्रह है। फिल्‍हाल बगीचे की देखभाल केरल विश्वविद्यालय का भौतिकी विभाग करता है।

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    चिड़ियाघर

    पीएमजी स्‍टेशन के पास यहां का चिड़ियाघर भारत का दूसरा सबसे पुराना चिड़ियाघर है। 55 एकड़ में फैला यह वाइल्‍ड लाइफ पार्क यहां के बोटेनिकल गार्डन का ही हिस्सा है। इसका निर्माण 1857 ई. में त्रावणकोर के महाराजा द्वारा बनाए गए संग्रहालय के एक भाग के रूप में हुआ था। यहां देशी-विदेशी वनस्पति और पशु पक्षियों का संग्रह है। इसे कुछ इस अंदाज में बनाया गया है कि यहां पहुंचने पर लगता है जैसे कि शहर के बीचों बीच एक जंगल बसा हो। इसके रैप्टाइल हाउस में सांपों की अनेक प्रजातियां रखी गई हैं। इस चिड़ियाघर में नीलगिरी लंगूर, भारतीय गैंडा, एशियाई शेर और रॉयल बंगाल टाइगर भी देखे जा सकते हैं। इसके खुलने का समय सुबह 10 से शाम 5 बजे तक होता है सोमवार को चिड़ियाघर बंद रहता है।

    वाइजिनजाम

    तिरुवनंतपुरम से17 किलोमीटर दूर वाइजिनजाम मछुआरों का एक गांव है जो आयुर्वेदिक चिकित्सा और अपने बीच रिजॉर्ट के लिए प्रसिद्ध है। वाइजिनजाम में एक और आकर्षण चट्टान को काट कर बनाई गई गुफा है, जो विनंधरा दक्षिणमूर्ति का एक मंदिर है। इस मंदिर में 18वीं शताब्दी में चट्टानों को काटकर बनाई गई प्रतिमाएं रखी गई हैं। मंदिर के बाहर भगवान शिव और देवी पार्वती की अर्धनिर्मित प्रतिमा स्थापित है। वाइजिनजाम में मैरीन एक्वेरियम भी है जहां रंगबिरंगी और आकर्षक मछलियां जैसे क्लाउन फिश, स्क्विरिल फिश, लायन फिश, बटरफ्लाइ फिश, ट्रिगर फिश रखी गई हैं। इसके अलावा आप यहां सर्जिअन फिश और शार्क जैसी शिकारी मछलियां भी देख सकते हैं। ये स्‍थान सुबह 9 बजे से रात 8 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला रहता है।

    नेपियर संग्रहालय

    लकड़ी से बनी यह आकर्षक इमारत त्रिवेंद्रम शहर के उत्तर में म्यूजियम रोड पर स्थित है। यह भारत के सबसे पुराने संग्रहालयों में से एक है। इसका निर्माण 1855 में हुआ था। इस संग्रहालय का नाम उस समय के मद्रास शहर के गवर्नर लॉर्ड चार्ल्‍स नेपियर के नाम पर रखा गया है। यहां शिल्प शास्त्र के जानकारों की मानें तो यहां रखी गई कांसे से बनी शिव, विष्णु, पार्वती और लक्ष्मी की प्रतिमाएं 8वीं  और 18वीं शताब्दी के दौरान निर्मित की गई हैं।

    कनककुन्नु महल

    नेपिअर संग्रहालय से करीब 800 मी उत्तर पूर्व में बना यह महल केरल सरकार के संरक्षण में है। एक छोटी-सी पहाड़ी पर बने इस महल का निर्माण श्री मूलम तिरुनल राजा के शासन काल में हुआ था। इस महल की आंतरिक सजावट खूबसूरत दीपदानों और शाही फर्नीचर से की गई है। यहां के निशागंधी ओपन एयर ऑडिटोरियम और सूर्यकांति ऑडिटोरियम में अनेक सांस्कृतिक सम्मेलनों और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। पर्यटन विभाग निशागंधी ओपन एयर ऑडिटोरियम में हर साल अखिल भारतीय नृत्य उत्सव का आयोजन करता है,जिसमें देश के मशहूर कलाकार भारतीय शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं।