नार्वे, यूरोप महाद्वीप का एक देश है। अपने एटलस में इसकी स्थिति देखो। इसके उत्तरी छोर पर हेमरफेस्ट नामक शहर है। यहॉं पर इन दिनों मध्यरात्रि के सूर्य के दर्शन करने के लिए कई शौकीन पर्यटक आते हैं। इसीलिए नार्वे को “मध्यरात्रि के सूर्य का देश’ कहते हैं।

पृथ्वी अपने तल से 66 डिग्री का कोण बनाते हुए घूमती है या यों कहें कि पृथ्वी का अक्ष सीधा न होकर 23 डिग्री तक झुका हुआ है। अक्ष के झुकाव के कारण ही दिन व रात छोटे-बड़े होते हैं। 21 जून व 22 दिसंबर ऐसी दो तिथियॉं हैं, जिनमें सूर्य का प्रकाश वृत्त पृथ्वी की धुरी के झुकाव के कारण पृथ्वी के सभी स्थानों को समान भागों में नहीं बांटता है। दिन और रात की अवधि में अंतर आता है। उत्तरी गोलार्द्ध में मध्य-रात्रि अर्थात रात को 12 बजे भी सूर्य दिखाई देने की घटना का संबंध 21 जून वाली स्थिति से है। इस समय 66 डिग्री उ.अक्षांश से 90 डिग्री उ. अक्षांश तक का संपूर्ण भू-भाग प्रकाश वृत्त के भीतर रहता है।

इसका अर्थ यह हुआ कि यहॉं चौबीसों घंटे दिन रहता है, रात होती ही नहीं, इसीलिए वहॉं आप आधी रात को भी सूर्य को देख सकते हैं। न तो सूर्योदय होगा और न सूर्यास्त होगा। बस यही है अर्द्धरात्रि के सूर्य-दर्शन की घटना का रहस्य। नार्वे, यूरोप महाद्वीप का एक देश है। अपने एटलस में इसकी स्थिति देखो। इसके उत्तरी छोर पर हेमरफेस्ट नामक शहर है। यहॉं पर इन दिनों मध्यरात्रि के सूर्य के दर्शन करने के लिए कई शौकीन पर्यटक आते हैं। इसीलिए नार्वे को “मध्यरात्रि के सूर्य का देश’ कहते हैं। यहां चौबीसों घंटे सूर्य क्षितिज पर दिखाई देता है। प्रकृति के इस अद्भुत करिश्मे को देखने का जीवन में यदि आपको कभी अवसर मिले तो हेमरफेस्ट ज़रूर जाइए।

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Posted By: Preeti jha