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    Barton Creek Caves में मिलते हैं मायन सभ्यता के अवशेष, इतिहास और पर्यटन का मिलता है अनोखा संगम

    Updated: Sun, 07 Jul 2024 06:54 PM (IST)

    अगर आपके भीतर मानव इतिहास और उससे जुड़े पुरातत्वों के बारे में जानने की रूची है तो आपको बार्टन क्रीक गुफाओं (Barton Creek Caves) में घूमने जरूर जाना चाहिए। मध्य अमेरिका में स्थित इन गुफाओं में मायन सभ्यता और संस्कृति की झलक देखने को मिलती है। इन गुफाओं से जुड़ी कई कहानियां हैं जिनके बारे में जानने में आपको काफी मजा आएगा। आइए जानें बार्टन क्रीक गुफाओं के बारे में।

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    Barton Creek Caves का गजब है इतिहास Picture Courtesy: X (formerly Twitter)

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। Barton Creek Caves: कई लोगों की रूची इतिहास और पुरानी चीजों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने की होती है, तो कई लोग नई-नई रोमांचक जगहों पर घूमना चाहते हैं। ऐसे में अगर आपको इतिहास और घूमन-फिरने दोनों का शौक है, तो हम आपको एक ऐसी जगह के बारे में बताने वाले हैं, जिसेक बारे में जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। आइए जानते हैं इस खास जगह के बारे में और क्या चीजें बनाती हैं उसे इतना खास।

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    कहां है बार्टन क्रीक गुफा?

    इस जगह का नाम है बार्टन क्रीक गुफा, जो बेलीज में स्थित है। यह एक प्राकृतिक गुफा है, जिसे इतिहास में दिलचस्पी रखने वाले और पर्यटन में रूची रखने वाले, दोनों ही प्रकार के लोग देखना और जानना पसंद करते हैं। आपको बता दें कि बेलीज मध्य अमेरिका में स्थित एक देश है। यह मध्य अमेरिका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित है। इस गुफा को बार्टन क्रीक गुफा नाम इसलिए मिला, क्योंकि यह कायो जजिले में सैन इग्नोसिया के पास ऊपरी बार्टन क्रीक क्षेत्र में स्थित है। इसलिए इसे बार्टन क्रीक की गुफाओं के नाम से जाना जाता है।

    Picture Courtesy: X (formerly Twitter)

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    मायन सभ्यता के अवशेष

    इस गुफा को इतना खास इसलिए माना जाता है, क्योंकि इन गुफाओं में मायन सभ्यता से जुड़े अवशेष आज भी पाए जाते हैं। इसलिए पुरात्तव और इतिहास में रूची रखने वाले लोगों को यह जगह बेहद खास लगती है।

    इन गुफाओं में मायन सभ्यता के अवशेष पाए जाते हैं, जिसके कारण ये गुफा इतनी खास मानी जाती है। मायन सभ्यता 1500 ईसा पूर्व और 300 ईस्वी के बीच बेलिज क्षेत्र में फैली और लगभग 1200 ई. तक खूब समृद्ध बनी और फली फूली। इन गुफाओं में नरकंकाल भी पाए जाते हैं, जो वहां बसी पुरानी सभ्यता का प्रमाण देती है।

    इन गुफाओं 200 से 600 ईसा पूर्व मिट्टी के बर्तन के टुकड़े और आभूषण भी मिलते हैं, जो तब के समय में यहां बसी सभ्यता के अस्तीत्व का सबूत देती है। इसके कारण इस गुफा को मायन अंडरवर्ल्ड के नाम से भी जाना जाता है।

    इस गुफा में घुसने के लिए 1 मील घुमावदार नदी का रास्ता तय करके आना होता है। इस गुफा में प्रवेश करवाने वाली नदी लगभग 19 गुफाओं को आपस में जोड़ती है। इस गुफा को पहली बार 1970 में पीस कॉर्प्स स्वयंसेवकों ने खोजा था। पुरात्तवों के अलावा, यहां समुद्री पौधे और जीवों की कई प्रजातियां पाई जाती हैं, जिसके कारण इसे एक बेहद महत्वपूर्ण बॉयोलाजिकल कॉरिडोर माना जाता है। इस कॉरिडोर का नाम मेसोअमेरिकन बॉयोलाजिकल कॉरिडोर है।

    क्यों कहा जाता है मायन अंडरवर्ल्ड? 

    इस जगह को मायन अंडरवर्ल्ड भी कहा जाता है, जिसके पीछे एक बेहद दिलचस्प मान्यता भी है। कहा जाता है कि इन गुफाओं के नीचे मायन के मृत्यु के देवता की अदालत है। इसलिए इस जगह को चीबाल्बा भी कहा जाता है, जिसका शाब्दिक अर्थ है डरावना स्थान। इस स्थान पर मानव कंकाल मिलने के पीछे एक वजह यह है कि ऐसा कहा जाता है कि इस जगह पर निएंडरथल मानवों के शव को दफ्न किया जाता था। अभी तक गुफा के भीतर लगभग 28 मनुष्यों के कंकाल पाए गए हैं।

    Picture Courtesy: X (formerly Twitter)

    कैसे करते हैं गुफा में प्रवेश?

    इस गुफा में प्रवेश करने के लिए 1 मील की घुमावदार नदी से गुजरना पड़ता है। इसके लिए वहां आने वाले पर्यटकों को डोंगी किराए पर लेनी पड़ती है और अपने साथ टॉर्च जैसे उपकरण रखने पड़ते हैं, ताकि अंधेरे में मदद मिल सके। ज्यादातर सैलानी यहां मायन की पौराणिक कथाओं और संस्कृति को जानने के लिए आते हैं। इतिहास के इतने पहलु यहां छिपे होने की वजह से इन गुफाओं में निरंतर आर्केलॉजिकल विभाग द्वारा काम जारी रहता है।

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