सैलानियों के लिए ये एक अनछुआ हिल स्टेशन है जिसके हर एक कोने में खूबसूरती और अनोखे नजारे छुपे हुए हैं। घूमने वाली जगहों के अलावा आसपास मनमोहक खेतों के बीच प्रकृति के कुछ अलग ही रंग देखने को मिलते हैं। कोहरों से छनती धूप और पंछियों की मधुर आवाज के बीच बस खो जाने का मन करता है, ऐसा है चिकमंगलूर। यहां छुट्टियां बिताने के लिए दो से चार दिन का समय काफी नहीं, तो जानेंगे यहां के मशहूर पर्यटन स्थलों के बारे में, जो करेंगे ट्रिप प्लानिंग में आपकी मदद।

चिकमंगलूर में आसपास घूमने वाली खूबसूरत जगहें 

हेब्बे जलप्रपात

केम्मन्नागुंडी से करीब 8 किलोमीटर ट्रेकिंग करने के बाद सफेद बहती हुई धारा की गूंज तकरीबन 3 किलोमीटर पहले ही सुनाई देने लगती है। बारिश के मौसम के तुरंत बाद कॉफी बगान में छुपे हुए हेब्बे जलप्रपात की सुंदरता अपनी चरमसीमा पर होती है। 168 मीटर की ऊंचाई से गिरता यह जलप्रपात दो भागो में विभाजित है जो कन्नड़ भाषा में 'डोड्डा (बड़ा ) हेब्बे' और 'चिक्का (छोटा) हेब्बे' के नाम से जाने जाते हैं। केम्मन्नागुंडी से हेब्बे तक का यह ट्रेकिंग रूट रोमांच से भरा है।

कलथीगिरी जलप्रपात

122 मीटर की ऊंचाई से वीरभद्र मंदिर पर गिरता कलथिगिरी या चिकमंगलूर का सुंदरतम जलप्रपात है। तरिकेरे नामक तालुक से आप किसी भी वाहन से कलथिगिरी जलप्रपात पहुंच सकते हैं। केम्मान्नागुंडी से भी कलथिगिरी केवल 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

मनिक्यधारा

बाबा बुदनगिरी से केवल 7 किलोमीटर की पैदल यात्रा आपको मनिक्यधारा नामक जलप्रपात तक ले जाएगी। हजारों पेड़-पौधों से गुजरकर लाल मिटटी बटोरते हुए कईं झरने मिलकर मनिक्यधरा के रूप में बहते हैं और यही कारण है की इस जलप्रपात का पानी स्थानीय के लिए ही नहीं पर्यटकों के लिए अलग महत्व रखता है। हैरत होती है कि गर्मियों की कड़ी धूप में भी इस जलप्रपात का पानी एकदम ठंडा रहता है। भारतभर के मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थस्थान है। यहां स्नान करने वाले लोग मान्यताओं का अनुकरण करते हुए अपना कोई भी एक कपड़ा पीछे छोड़ जाते हैं।

श्रृंगेरी मठ

आठवीं सदी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार शारदापीठ में से एक चिकमंगलूर के श्रृंगेरी तालुक में स्थित है। तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित विद्या की देवी को समर्पित श्रृंगेरी मठ यहां के शांत वातावरण में भक्तिभाव के सुर घोलता है। मठ के नजदीक स्थित विद्याशंकर मंदिर, मल्लिकअर्जुन मंदिर और सिरिमाने जलप्रपात इस स्थान को इतिहास, पौराणिकता और वास्तुकला का एक अनोखा संगम बनाते हैं। बीसवीं सदी से पहले यह मंदिर लकड़ी से बना एक साधारण शिल्प था जिसमें आग लगने के बाद इसका दक्षिण भारतीय शैली में जीणोद्धार किया था।

अमृतापुरा

तरिकेरे ताल्लुक में स्थित अमृतापुरा होयसल शैली में बने अमृतेश्र्वर महादेव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय कथाओं के अनुसार अमृतापुरा के इस मंदिर के आंगन में होयसल राजाओं ने अपनी संपत्ति छिपाई थी और मंदिर के जीणोद्धार के समय कई सोने चांदी के सिक्के प्राप्त हुए थे। इस मंदिर की दीवारों पर बनी महाभारत की कहानियां आपको पांडवों और कौरवों के काल में ले जाएगी। इस भव्य मंदिर की छत भी शानदार कलाकृति से सजा है।

Posted By: Priyanka Singh

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