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    भारत के रहस्यमयी स्थानों से रूबरू होने के लिए इन 2 जगहों की जरूर करें सैर

    By Pravin KumarEdited By:
    Updated: Sun, 22 Aug 2021 08:46 PM (IST)

    चांद बावड़ी राजस्थान राज्य के दौसा जिले में स्थित आभानेरी गांव में है। इसका निर्माण 9वीं शताब्दी में तत्कालीन राजा मिहिर भोज ने करवाया था। राजा मिहिर भोज को लोग प्यार से चांद कहकर पुकारते थे। यह कलाकृति आज भी उपस्थित है।

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    चांद बावड़ी राजस्थान राज्य के दौसा जिले में स्थित आभानेरी गांव में है।

    नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। भारत अपनी संस्कृति और सभ्यता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। खासकर आयुर्वेद और योग भारत की सभ्यता और संस्कृति की पहचान है। प्राचीन समय से लेकर आधुनिक समय में भी भारत को शांति का दूत कहा जाता है। हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक भारत की संस्कृति और सभ्यता के दर्शन के लिए दुनियाभर से आते हैं। देश में कई विश्व प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल हैं। हालांकि, कई रहस्यमयी जगह भी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता है। अगर आप भी भारत के रहस्यमयी स्थानों से रूबरू होना चाहते हैं, तो इन जगहों की सैर जरूर करें। आइए, इनके बारे में सबकुछ जानते हैं-

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    चांद बावड़ी, राजस्थान

    चांद बावड़ी राजस्थान राज्य के दौसा जिले में स्थित आभानेरी गांव में है। इसका निर्माण 9वीं शताब्दी में तत्कालीन राजा मिहिर भोज ने करवाया था। राजा मिहिर भोज को लोग प्यार से चांद कहकर पुकारते थे। यह कलाकृति आज भी उपस्थित है। राजा भोज के नाम पर ही इस बावड़ी का नाम रखा गया है। इतिहासकारों की मानें तो चांद बावड़ी दुनिया की सबसे गहरी बावड़ी है। इसकी चौड़ाई 35 मीटर है। इसका निर्माण बेहद ही आला दर्जे से किया गया है। ऊपर तल से लेकर कुंए के धरातल तक 3500 सीढ़ियां हैं। इस बावड़ी के सामने हर्षद माता की प्रतिमा मंदिर में स्थापित है। इस बावड़ी के बारे में ऐसा भी कहा जाता है कि इसका निर्माण भूत प्रेतों ने किया है। हालांकि, बावड़ी की खूबसूरती देखने लायक है। जब कभी राजस्थान जाएं, तो चांद बावड़ी देखने जरूर जाएं।

    जागेश्वर धाम, उत्तराखंड

    उत्तराखंड को देवों की भूमि कहा जाता है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक उत्तराखंड आते हैं। इस राज्य में कई विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल हैं। इनमें एक जागेश्वर धाम है। जागेश्वर धाम उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में स्थित है। अल्मोड़ा से जागेश्वर धाम की दूरी महज 35 किलोमीटर है। सनातन धार्मिक ग्रंथों की मानें तो भगवान शिवजी और सप्तऋषियों ने जागेश्वर धाम में तपस्या की है। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि पहले बुरी मनोकामनाएं भी पूर्ण हो जाती थी। हालांकि, आदि शंकराचार्य ने भगवान शिवजी की कृपा पाकर इस कुप्रथा पर रोक लगा दी। उस समय से जागेश्वर धाम में केवल मंगलकारी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। आप भारत के रहस्यमयी जगहों में से एक जागेश्वर धाम की धार्मिक यात्रा कर सकते हैं।