नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। भारतीय इतिहास को तीन वर्गों में बांटा गया है- प्राचीन भारत, मध्यकालीन भारत और आधुनिक भारत। इतिहास के पन्नों को पलटने पर भारत की संस्कृति, सभ्यता और साम्राज्य का पता चलता है। आज भी देश में कई ऐसे स्थल हैं, जो अपनी विरासत के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध हैं। हर साल काफी संख्या में पर्यटक इन स्थलों की सैर करने और भारतीय इतिहास से रूबरू होने आते हैं। अगर आप भी भारतीय इतिहास को नजदीक से जानना और महसूस करना चाहते हैं, तो इन शहरों की सैर जरूर करें। आइए जानते हैं-

कलिंग, धौली

इतिहासकारों की मानें तो कलिंग युद्ध सम्राट अशोक के जीवनकाल की अंतिम लड़ाई थी। इस युद्ध में सम्राट अशोक की विजय हुई। हालांकि, इस युद्ध के बाद सम्राट अशोक ने शस्त्र न उठाने की कसम खाई। साथ ही बौद्ध धर्म भी अपना लिया। हर साल धौली शांति स्तूप में कलिंग महोत्सव मनाया जाता है। इस महोत्सव का मकसद शांति स्थापित करना है। ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर से महज 8 किलोमीटर दूरी पर धौली स्थित है। भारतीय इतिहास से रूबरू होने के लिए एक बार कलिंग जरूर जाएं।

पानीपत

इतिहास गवाह है कि पानीपत में कितनी लड़ाइयां हुई हैं। पानीपत की पहली लड़ाई बाबर और इब्राहिम लोदी के बीच हुई। इस युद्ध में बाबर की जीत हुई। उस समय बाबर ने मुगल वंश की स्थापना की। पानीपत की दूसरी लड़ाई सम्राट अकबर और विक्रमादित्य हेम चंद्र के बीच हुई। इस युद्ध में भी मुगल वंश की विजय हुई। वहीं, पानीपत की तीसरी और अंतिम लड़ाई अफगान और मराठा सम्राज्य के बीच हुई। इस युद्ध में अफगानों की जीत हुई। भारतीय इतिहास में पानीपत की लड़ाई को कलिंग के समतुल्य भयानक और दर्दनाक बताया गया है। इस युद्ध में दोनों तरफ से हजारों की संख्या में सैनिक काल के गाल में समा गए। वर्तमान समय में पानीपत में काबुली शाह मकबरा और म्यूजियम स्थित है। इतिहास को नजदीक से जानने के लिए पानीपत जरूर जाएं।

प्लासी

इतिहास के पन्नों को पलटने पर प्लासी युद्ध के बारे में पता चलता है। साल 1757 में बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला और ब्रिटिश सम्राज्य के बीच यह युद्ध हुई थी। इस युद्ध में बंगाल के नवाब की हार हुई। प्लासी युद्ध के बारे में विस्तार से जानने के लिए प्लासी जरूर जाएं। इसके अलावा, आप हल्दी घाटी भी जा सकते हैं। यह युद्ध राजपूत राजा महाराणा प्रताप और सम्राट अकबर के बीच हुई थी। इस युद्ध में अकबर की जीत हुई थी। इस युद्ध के बारे में अधिक जानकारी के लिए हल्दी घाटी जरूर जाएं।

Edited By: Pravin Kumar