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    भारत का वह अनोखा मंदिर जहां हवा में लटका है स्तंभ, क्यों कोई नहीं सुलझा पाया लेपाक्षी मंदिर का रहस्य?

    Updated: Sun, 13 Jul 2025 03:04 PM (IST)

    क्या आप जानते हैं आंध्र प्रदेश में एक ऐसा मंदिर है जिसका एक स्तंभ हवा में लटका हुआ है। आपको बता दें कि यह कोई ऐसा-वैसा स्तंभ नहीं है बल्कि इस पर मंदिर का सारा भार टिका हुआ है (Lepakshi Temple Flying Pillar)। लेकिन फिर भी यह जमीन से थोड़ा ऊपर उठा हुआ है। हम बात कर रहे हैं लेपाक्षी मंदिर की।

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    कोई नहीं सुलझा पाया है लेपाक्षी मंदिर का रहस्य (Picture Courtesy: Instagram)

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत अपने प्राचीन मंदिरों और आर्किटेक्चर के लिए दुनियाभर में मशहूर है। इन्हीं में से एक है आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में स्थित लेपाक्षी मंदिर। यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला के लिए जाना जाता है, लेकिन इसकी सबसे चर्चित विशेषता है "हवा में लटका हुआ खंभा" (Lepakshi Mandir Flying Pillar)।

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    जी हां, इस मंदिर में एक ऐसा स्तंभ है, जो धरती पर स्थित न होकर हवा में लटक रहा है। आइए जानते हैं कि यह मंदिर क्यों इतना खास है और कैसे यह खंभा बिना जमीन से जुड़े हुए खड़ा है (Lepakshi Temple Mystery)।

    लेपाक्षी मंदिर का इतिहास

    (Picture Courtesy: Instagram)

    लेपाक्षी मंदिर का निर्माण 16वीं शताब्दी में विजयनगर साम्राज्य के शासनकाल में हुआ था। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण विरुपन्ना नाम के व्यक्ति ने अपने भाई के साथ मिलकर करवाया था, जो वहां के राजा के यहां काम करते थे। एक मान्यता यह भी है कि इस मंदिर का निर्माण ऋषि अगस्त्य ने करवाया था।

    यह मंदिर भगवान शिव (शिव के रौद्र अवतार वीरभद्र) और भगवान विष्णु को समर्पित है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग है, जिसे वीरभद्र का रूप माना जाता है। इस मंदिर परिसर में कई सुंदर मूर्तियां, नक्काशीदार स्तंभ और भित्तिचित्र हैं, जो विजयनगर कला के बेहतरीन उदाहरण हैं।

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    हवा में लटका हुआ खंभा

    (Picture Courtesy: Instagram)

    मंदिर के मुख्य हॉल में 70 खंभे हैं, जिनमें से एक खंभा जमीन को नहीं छूता। यह खंभा थोड़ा ऊपर उठा हुआ है और इसके नीचे एक कपड़ा या धागा आसानी से गुजर सकता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस खंभे को छूने से व्यक्ति को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

    हवा में तैरते इस खंभे का रहस्य जानने की काफी कोशिश की गई, लेकिन आजतक कोई भी इस रहस्य को सुलझा नहीं पाया है। इस रहस्य का पता लगाने की काफी कोशिश ब्रिटिशर्स ने भी की। एक ब्रिटिश आर्किटेक्चर ने एक थियोरी दी कि इस मंदिर का सारा वजन बाकी 69 खंभों पर है। इसलिए एक खंभा हवा में लटकने से कोई फर्क नहीं पड़ता है।

    लेकिन जब इस थियोरी को टेस्ट किया गया, तो सामने कुछ और ही बात आई। जांच करने पर पता चला कि इस मंदिर का सारा भार इसी खंभे पर है। लेकिन फिर भी यह स्तंभ धरती से जुड़ा नहीं है। इसके बाद ब्रिटिशर्स ने भी इस मंदिर के रहस्य के सामने घुटने टेक दिए थे।

    इस स्तंभ को देखकर तो यहीं अनुमान लगाया जा सकता है कि यह मंदिर विज्ञान और धार्मिक मान्यताओं का अनोखा नमूना है, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह जाता है। इस मंदिर परिसर में एक विशाल नंदी, जो भगवान शिव का वाहन है, की मूर्ति भी है। इस मूर्ती की खासियत यह है कि यह एक ही पत्थर से बनी है और भारत की सबसे बड़ी नंदी प्रतिमाओं में से एक है।

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