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    बीजापुर में है भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गुंबद, जहां से देख सकते हैं पूरा शहर

    By Priyanka SinghEdited By:
    Updated: Thu, 09 Jan 2020 10:08 AM (IST)

    साफ-सुथरी सड़कों और मुगलकालीन स्थापत्य कला वाले बीजापुर में नवंबर से फरवरी का मौसम खुशगवार रहता है। यहां आएं तो इस शहर की शान और पहचान गोल गुबंद को घूमना न मिस करें।

    बीजापुर में है भारत का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गुंबद, जहां से देख सकते हैं पूरा शहर

    गोल गुंबद भारत की सबसे बड़ी खुली छतरी है, जिसकी छांव में बीजापुर शहर गर्मी के मौसम में भी सुकून की सांस लेता है। गोल गुंबद भारत का सबसे बड़ा और विश्र्व का दूसरा सबसे बड़ा गुंबद है। इस विशाल गुंबद का व्यास 44 मीटर और ऊंचाई 51 मीटर है। इसके निर्माण में तीस वर्ष लगे थे। आश्चर्य की बात यह है कि इतने विशाल गुंबद के सहारे के लिए एक भी खंभा नहीं है।

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    गोल गुबंज की खासियत

    दरअसल, यह एक मकबरे का गुंबद है, जिसके मुख्य हॉल के भीतर चारों ओर सीढिय़ों से घिरा हुआ एक चौकोर चबूतरा बना हुआ है। इस चबूतरे के मध्य में कब्र का पत्थर है, जिसके नीचे बीजापुर के सुल्तान मुहम्मद आदिल शाह की कब्र है। मकबरे के गुंबद की आंतरिक परिधि पर एक गोलाकार गलियारा बना हुआ है। इस गुंबद को अंग्रेजों ने 'व्हिसपरिंग गैलरी' नाम दिया था, क्योंकि इस गलियारे के एक तरफ फुसफुसा कर बोला गया शब्द भी दूसरी तरफ तक स्पष्ट सुनाई देता है। यही नहीं, इस गैलरी में एक आवाज सात बार गूंजती है। उस जमाने में गायक इस गैलरी में बैठ कर गाते थे, ताकि उनकी आवाज और संगीत प्रत्येक कोने तक सुना जा सके। इसे फारसी वास्तुकार दाबुल के याकूत ने 1626 ईस्वी में बनाया था। पूरे बीजापुर शहर का नजारा गोल गुंबद के ऊपर जाकर लिया जा सकता है। इमारत के चारों कोनों से जुड़ी चार मीनारें हैं। दरवाजों पर सागौन की लकड़ी से किया हुआ महीन नक्काशीदार काम है। इस इमारत की सबसे बड़ी बॉलकनी को 'च्हमसा' कहा जाता है। गहरे भूरे बेसाल्ट पत्थर से बना मकबरा दक्षिण भारतीय-मुगल वास्तुकला का अद्भुत नमूना है, जो द्रविड़ वास्तुशैली से घुल-मिल गया है। यह अष्टकोणीय इमारत नफ़ीस नक्काशी फूल-बूटे, आलों-मेहराबों से सजी हुई है।

    इमारत की दीवारों पर पत्तेनुमा और ज्यामितीय आकार उकेरे गए हैं। व्हिसपरिंग गैलरी में भीतर की दीवारों पर डायमंड कट पैटर्न का काम दिखाई देता है। गुंबद की बाहरी दीवार पर हर ओर पत्थर की बड़ी पंखुडिय़ां इस तरह से बनाई गई हैं, जिसे देखकर लगता है जैसे शिल्पी ने कमल का फूल खिला दिया है। पत्थर पर किया ऐसा काम यकीन दिलाता है कि पत्थर में भी फूल खिला करते हैं।

    कैसे पहुंचे

    सोलापुर एयरपोर्ट बीजापुर से 98 किलोमीटर की दूरी पर है। रेल और सड़क मार्ग से यह पूरे देश से जुड़ा हुआ है। शहर में घूमने के लिए ऑटो, रिक्शा, बस, टैक्सी, तांगा हर तरह के यातायात के साधन मिलते हैं।