पहले गोकर्ण जहां अपने धार्मिक स्थलों के लिए जाना जाता था वहीं अब इसकी प्रसिद्धि के मायने बदल रहे हैं। अब इस स्थल की पहचान यहां के समुद्र तट बन रहे हैं। यही कारण है कि यहां आने वाले पर्यटकों में श्रद्धालुओं के बजाय यात्रियों, मौज-मस्ती के शौकीन लोगों की संख्या बढ़ रही है। जब भी यहां के बीच का जिक्र होता है तो गोवा का जिक्र अवश्य होता है। गोवा अपने समुद्र तटों के लिए जाना जाता है लेकिन वहां की भीड़ को जो लोग पसंद नहीं करते वे गोकर्ण की ओर आते हैं या आ सकते हैं।

बहुत ही शांत और खूबसूरत है ये बीच

यहां के तट अपेक्षाकृत शांत और मनमोहक हैं। किसी चट्टान पर बैठकर डूबते सूरज को निहारना इससे बेहतर कहीं नहीं हो सकता। गोकर्ण, कुड्ले, ओम, हाफ मून और पैराडाइव आदि पांच मुख्य बीच हैं जहां लोग आना पसंद करते हैं। यहां के बीच संबंधी ज्यादातर गतिविधियां इन्हीं सबके इर्दगिर्द होती हैं। ये समुद्र तट अपने शांत वातावरण, सुनहरी रेत, बीच सैक और सीफूड के लिए प्रसिद्ध हैं।

बीच ट्रेकिंग का रोमांच

गोकर्ण आने पर सबसे जरूरी और अद्भुत अनुभव बीच ट्रेक में ही संभव होता है। बीच ट्रेकिंग सुनने में अजीब भले ही लगे लेकिन यह बहुत रोचक होता है। यह रोचक क्यों है? हममें से बहुत से लोग ऐसे हैं जिन्हें पहाड़ पसंद हैं और फिर ऐसे भी लोग ढेर सारे हैं जिन्हें समुद्र पसंद हैं। सोचिए यदि दोनों ही तरह प्रकार की भौगोलिक स्थितियां एक साथ मिल जाएं तो! जी हां, गोकर्ण के समुद्र तटों के किनारे-किनारे पश्चिमी घाट की पहाडि़यां एक दूसरे के समानांतर चलती हैं। ट्रेकिंग के शौकीन लोग इस अनुभव को हासिल करने से नहीं चूकते। लगभग दस किलोमीटर लंबा यह ट्रेक ऊंचाई से समुद्र को देखने का अद्भुत अवसर देता है। यह एक आसान सा ट्रेक है लेकिन इसकी खूबसूरती बेजोड़ है। एक बीच से दूसरे बीच तक इन पहाडि़यों के सहारे जाते हुए प्रकृति के विविध रूप सहज ही दिख जाते हैं।

बीच योगा का अनूठा अहसास

गोकर्ण में समुद्र तट पर योगाभ्यासों का अनोखा अनुभव लिया जा सकता है। कुड्ले बीच पर योग द्वारा आंतरिक शांति की तलाश में आए लोगों को देखा जा सकता है। वहां बहुत से प्रशिक्षक भी इस काम के लिए मौजूद रहते हैं। समुद्री लहरों की आवाज के साथ डूबते और उगते सूरज की कोमल रोशनी में किए जाने वाले योगाभ्यास तेज भागते मन की गति को नियंत्रित करने का सबसे बेहतर तरीका है।

कैसे जाएं, कब पहुंचें?

सबसे निकट का हवाई अड्डा गोवा में है, जिससे इसकी दूरी लगभग डेढ़ सौ किलोमीटर है। वहां से सड़क मार्ग द्वारा आया जा सकता है। अंकोला नामक रेलवे स्टेशन सबसे निकटवर्ती स्टेशन है जो देश के लगभग सभी बड़े स्थलों से रेलमार्ग के द्वारा जुड़ा हुआ है। वहां से गोकर्ण की दूरी लगभग बीस किलोमीटर है जिसे सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पूरी की जा सकती है। सड़क मार्ग से भी यहां आना बहुत सरल है। यहां आने के लिए कर्नाटक सरकार द्वारा चालित बसें, टैक्सी आदि आसानी से मिल जाते हैं। यह मौसम आपकी यात्रा को खास बना देता है। अक्टूबर से मार्च यहां आने का अनुकूल समय है।

Posted By: Priyanka Singh

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