फेस्टिवल स्पेशल या रेगुलर ट्रेन... त्योहार पर घर जाने के लिए किसमें टिकट कराना है समझदारी? यहां समझें फर्क
फेस्टिव सीजन में सबसे बड़ी सिरदर्दी होती है कंफर्म टिकट हासिल करना। आम ट्रेनों में तो महीनों पहले से ही ...और पढ़ें

यूपी-बिहार जाने वालों के लिए काम की खबर (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। दीवाली की जगमगाहट हो, छठ की छटा हो या दुर्गा पूजा की रौनक... त्योहार आते ही हम सभी के मन में किसी तरह बस घर पहुंचने की बेताबी रहती है। हालांकि, जैसे ही हम टिकट बुक करने बैठते हैं, तो लंबी 'वेटिंग लिस्ट' देखकर सारी उम्मीदें धरी की धरी रह जाती हैं।
महीनों पहले से ही आम ट्रेनों में कंफर्म सीट मिलना किसी लॉटरी जीतने से कम नहीं होता। यात्रियों की इसी भारी भीड़ और मायूसी को दूर करने के लिए, भारतीय रेलवे 'फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनें' पटरियों पर उतारता है। हालांकि, कई लोग इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि हमारी रोजमर्रा की नियमित ट्रेनों और इन फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों में आखिर क्या अंतर है। आइए, डिटेल में इस बारे में समझते हैं।

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किराए में होता है भारी अंतर
सफर का सीधा कनेक्शन हमारी जेब से होता है। अगर आप रेगुलर ट्रेन से जाते हैं, तो आपको रेलवे के आम टैरिफ के हिसाब से ही पैसे चुकाने होते हैं। वहीं, स्पेशल ट्रेनों में सफर करने के लिए आपको थोड़ा एक्स्ट्रा खर्च करना पड़ेगा। चूंकि, रेलवे इन ट्रेनों को त्योहार की भीड़ संभालने के लिए एक खास व्यवस्था के तहत चलाता है, इसलिए इनमें 'स्पेशल फेयर' जुड़ जाता है। इसका मतलब है कि स्पेशल ट्रेन का टिकट आम ट्रेनों से 10 से 30 फीसदी तक महंगा हो सकता है।
कौन-सी ट्रेन पहुंचाएगी समय पर?
रेलवे ट्रैक पर नियमित रूप से चलने वाली ट्रेनों को हमेशा प्राथमिकता दी जाती है। रूट क्लियरेंस में इन्हें तरजीह मिलती है, जिसकी वजह से ये ज्यादातर अपने तय समय पर मंजिल तक पहुंच जाती हैं। दूसरी तरफ, फेस्टिवल स्पेशल ट्रेनों को कई बार आम ट्रेनों को पास देने के लिए बीच रास्ते में रोक दिया जाता है। ऐसे में इन ट्रेनों के लेट लतीफ होने की गुंजाइश थोड़ी ज्यादा रहती है।
किस ट्रेन में है सफर का आराम?
रेगुलर ट्रेनों में सफर करने पर आपको नए जमाने के आधुनिक एलएचबी कोच और पैंट्री कार जैसी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं। हालांकि, त्योहारी स्पेशल ट्रेनों के मामले में रेलवे कई बार पुराने आईसीएफ डिब्बों का भी इस्तेमाल करता है। इसके अलावा, इनमें पैंट्री कार नदारद रहने की काफी संभावना होती है। इसलिए, स्पेशल ट्रेन से जाते वक्त अपना खाना और पानी साथ लेकर चलना ही समझदारी है।
आपके लिए कौन-सा ऑप्शन है बेस्ट?
आपकी जरूरत ही तय करेगी कि आपके लिए कौन-सी ट्रेन सही है:
अगर आप महीनों पहले ही अपना टिकट करा रहे हैं और कम बजट में यात्रा करना चाहते हैं, तो रेगुलर ट्रेन से बेहतर कुछ नहीं है।
लेकिन, अगर आपको अचानक यात्रा करनी पड़ जाए और आम ट्रेनों में कोई सीट खाली न बचे, तो अपना समय बचाने के लिए थोड़े ज्यादा पैसे देकर स्पेशल ट्रेन चुनना सबसे अच्छा फैसला है।
यूपी-बिहार जाने वालों के लिए काम की टिप
दीवाली और छठ पर होने वाली भारी भीड़ के मद्देनजर सरकार ने बिहार और पूर्वांचल के रूट्स पर कई स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला लिया है। अगर आप भी इन रूटों पर सफर करने वाले हैं, तो लगातार आईआरसीटीसी की ऐप या वेबसाइट पर नजर बनाए रखें। रेलवे जैसे ही किसी नई ट्रेन की घोषणा करे, आप फौरन अपनी सीट पक्की कर लें।
