धौलाधार पर्वत शृंखला के आंचल में बसा धर्मशाला हिमाचल प्रदेश के खूबसूरत शहरों में से एक है। यहां की हसीन वादियां, पहाड़ों से निकलते नदी नाले, चाय के बगीचे और झरने हर किसी को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं। धौलाधार जब बर्फ की सफेद चादर ओढ़ता है, तो उसको नजदीक से देखने का अपना ही एक अलग रोमांच है। धर्मशाला एक ऐसा शहर है, जहां न केवल भारतीय बल्कि तिब्बती, हिमाचली व इजरायली संस्कृति के भी नजदीक से दर्शन होते हैं। धर्मशाला से महज नौ किलोमीटर दूर इस शहर के ठीक ऊपर पहाड़ी पर मैक्लोडगंज है। यह खूबसूरत स्थान धर्मशाला के अधीन ही आता है। मैक्लोडगंज में तिब्बती धर्मगुरु दलाईलामा का निवास स्थान होने के कारण यह स्थान दुनियाभर में ख्याति प्राप्त है। इसी स्थान पर निर्वासित तिब्बत सरकार का मुख्यालय भी है। यहां की तिब्बती रंग में रंगी मार्केट भी अपने आप में आकर्षण का केंद्र है। यहां 1959 में बौद्ध गुरु दलाई लामा अपने हजारों अनुयायियों के साथ तिब्बत से आकर बस गए थे। तिब्बत की राजधानी ल्हासा की तर्ज पर ही इस स्थान को मिनी ल्हासा कहा जाता है।

दलाई लामा टेंपल

मैक्लोडगंज में स्थित दलाईलामा टेंपल आकर्षण का केंद्र है। इसके साथ ही दलाईलामा का पैलेस भी है। बौद्ध धर्म के अनेक भिक्षुओं का यहां जमावड़ा लगा रहता है। दलाईलामा मंदिर में बड़े-बड़े प्रार्थना चक्र लगे हुए हैं। कहा जाता है कि इन्हें घुमाने से वैसा ही पुण्य मिलता है, जैसा मंत्रों को पढऩे से। ऐसे ही चक्र बाजार में भी लगे हुए हैं। मैक्लोडगंज बाजार में कई तरह के रेस्टोंरेंट में खाना खाने का अपना एक अलग ही आनंद है।

भागसूनाग है खास

मैक्लोडगंज से ही महज दो किलोमीटर आगे है भागसूनाग। यह स्थान यहां भागसूनाग मंदिर होने के कारण काफी प्रसिद्ध है। यहां पर देखने के लिए भागसूनाग मंदिर, इसके साथ नहाने के लिए बना सरोवर व कुछ ही दूरी पर पहाड़ी से गिरता वाटर फॉल देखने लायक है।

मिनी इजरायल धर्मकोट

भागसूनाग के साथ ही लगता है धर्मकोट गांव। धर्मकोट को मिनी इजरायल भी कहा जाता है। यह ऐसा गांव है, जहां सबसे अधिक आपको विदेशी और इनमें भी अधिकतर इजरायल के ही लोग मिलेंगे। यहां इजरायली रंग में रंगे रेस्टोरेंट का अपना ही अलग अंदाज है।

धर्मशाला का मुकुट है त्रियुंड

समुद्र तल से 2842 मीटर की ऊंचाई पर स्थित त्रियुंड को धर्मशाला का मुकुट कहा जाता है। यहां से आप धौलाधार को भी नजदीक से देख सकते हैं और मैदानी इलाकों में मौजूद कई शहरों को भी देख सकते हैं। पहाड़ी पर मौजूद यह स्थान ट्रैङ्क्षकग के दीवानों के लिए प्रसिद्ध है। यहां मैक्लोडगंज व भागसूनाग से नौ किलोमीटर का पैदल सफर तय कर पहुंचा जा सकता है। इससे आगे इंद्रहार ग्लेशियर भी आकर्षण का केंद्र है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े मनु हियूरी बताते हैं कि यहां ट्रैङ्क्षकग पर पर्यटक बिना गाइड के पहाड़ों पर न जाएं। किसी पंजीकृत ट्रैङ्क्षकग एजेंसी के माध्यम से ही ट्रैङ्क्षकग पर जाना चाहिए।

यहां की शान है सेंट जॉन चर्च

धर्मशाला-मैक्लोडगंज मुख्य मार्ग में फरसेटंगज के नजदीक स्थित यह स्थान बेहद खूबसूरत है। यहां सेंट जॉन चर्च का निर्माण 1852 में हुआ था। यह घने पेड़ों से घिरा हुआ खूबसूरत और प्राचीन चर्च है। इस स्थान पर पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है। चारों ओर से देवदार के वृक्षों से घिरा यह एक खूबसूरत पिकनिक स्थल है।

नड्डी में करें होम स्टे

नड्डी भी धर्मशाला का एक आकर्षित गांव है। यहां से धौलाधार के विहंगम ²श्य को देखने का अलग ही अंदाज है। नड्डी में कई होम स्टे भी हैं। जहां आप आराम से किसी घर में रहकर वहां के गद्दी मूल के लोगों की संस्कृति को नजदीक से देख सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम

धर्मशाला के प्रवेश द्वार यानी कांगड़ा-धर्मशाला मार्ग पर धर्मशाला आकाशवाणी केंद्र के किनारे से एक सड़क धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम को जाती है। पहाड़ों पर बना यह स्टेडियम भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां आइपीएल सहित कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों का आयोजन हो चुका है।

कैसे पहुंचें धर्मशाला :

धर्मशाला पहुंचने के लिए सड़क व वायु मार्ग है। रेल मार्ग से भी धर्मशाला पहुंचा जा सकता है। धर्मशाला व मैक्लोडगंज के लिए दिल्ली, पठानकोट, चंडीगढ़, गंगानगर व जम्मू से सीधी बस सेवा है। दिल्ली से कई वोल्वों बसें भी यहां रोजाना आती हैं। इसके अलावा धर्मशाला से 15 किलोमीटर दूर पर गगल नामक स्थान पर कांगड़ा एयरपोर्ट है। यहां रोजाना दिल्ली से फ्लाइट आती है। रेल मार्ग के लिए धर्मशाला से ब्राडगेज का सबसे बड़ा रेलवे स्टेशन 86 किलोमीटर दूर पठानकोट में है। पठानकोट से जोगेंद्रनगर के बीच नैरोगेज रेलमार्ग के जरिए भी पर्यटक टॉय ट्रेन का आनंद लेते हुए चामुंडा मार्ग या कांगड़ा रेलवे स्टेशन से धर्मशाला तक पहुंच सकते हैं। धर्मशाला, दिल्ली से 525 किलोमीटर और चंडीगढ़ से 250 किलोमीटर दूर है।

यह मौसम है उपयुक्त

धर्मशाला आने के लिए उत्तम समय अप्रैल से जून और ङ्क्षसतबर से जनवरी तक है। पर्यटन के लिहाज इस दौरान यहां का तापमान अनुकूल रहता है।

कहां ठहरें

धर्मशाला, मैक्लोडगंज, भागसूनाग, नड्डी व धर्मकोट में कई होटल, गेस्ट हाउस मौजूद हैं। यहां आराम से ठहरा जा सकता है लेकिन पर्यटन सीजन में यहां पहले से बुङ्क्षकग करवाकर आना ही बेहतर होता है।

प्रस्तुति : मुनीष दीक्षित

Posted By: Preeti jha

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