गोवा पहले पुर्तगाल का उपनिवेश था। उन्होंने यहां करीब 450 साल तक शासन किया। साल 1961 मं गोवा को भारत ने पुर्तगाल से आजाद कराया। क्योंकि यहां लंबे समय तक पुर्तगालियों ने शासन किया है, लिहाजा यहां के लोगों पर यूरोपीय कल्चर का प्रभाव ज्यादा है। यहां की वास्तुकला में भी पुर्तगाली असर को देखा जा सकता है। यहां बड़ी संख्या में ईसाई धर्म के मानने वाले लोग रहते हैं क्योंकि गोवा समुद्र किनारे बसा है, लिहाजा हरियाली और पानी का मेल इसकी खूबसूरती में चार चांद लगा देते हैं।

यहां छोटे-बड़े तकरीबन 40 समुद्री तट हैं। सावन के मौसम में तो यहां का नज़ारा और भी हसीन होता है। बारिश के दिनों में यहां सैलानियों की भीड़ जुटनी शुरू होती है। नए साल का जश्न मानने तक सैलानी आते रहते हैं क्योंकि ये इलाका समुद्र के किनारे बसा है लिहाजा यहां सी-फूड बड़े पैमाने पर खाने को मिलता है।

गोअन क्लैम कोकोनट सूक

क्लैम यानी सीपी। पारंपरिक टिसरो (क्लैम) सूक डिश मंगोलियन खूबे सूका के समान है। क्लैम सी फूड को देर तक पकाना नहीं होता। इसे प्याज के साथ ही हल्का नर्म किया जाता है, पूरी तरह सुनहरा नहीं किया जाता है। ताज़े कसे नारियल और बारीक कटे धनिये की पत्तियों के साथ इसका स्वाद बेहतरीन लगता है। अब गोवावासियों की थाली में से यह डिश लगभग गायब हो चुकी है लेकिन साइड डिश के रूप में फिश करी या फ्राइड फिश जरूर परोसी जाती है। इसे रोटस या राइस के साथ सर्व किया जाता है। कुछ लोग इसे सैंडविच में स्टफ करके भी सर्व करते हैं। 

बदलता रूप

क्लैम सी फूड का चलन अब कम होता जा रहा है, जिस वजह से थाली में प्रॉन्स, फिश, क्रैब्स ही ज्यादातर दिखते हैं। गोवा के अधिकतर घरों में फिश करी थाली का एक हिस्सा है। यहां हर एक सी फूड को बनाने के ढेरों तरीके भी हैं। 

कहां खोया स्वाद

समुद्र में प्रदूषित चीज़ें डालने और गंदगी की वजह से क्लैम सी-फूड कम होता जा रहा है। इसकी संख्या बेहद कम है, जिस कारण गोअन थाली में नहीं दिखता। 

गोअन कोलैक्सिया लीव्स करी

मानसून में गोवा में टेरेन, तेरे के पत्ते या कोलैक्सिया यानी अरबी बहुतायत में उगती है। टेरेन या तेरे एक प्रकार का अरबी का ही पत्ता है। यह एक टेस्टी भारतीय व्यंजन है। अरबी के पत्तों से पतौड़ बनाकर कढ़ी में डाले जाते हैं और आलू के साथ इसके पत्तों की भाजी बनाई जाती है।

बदलता रुप

वेजिटिरियन ग्रेवी में लोग इस करी को कम खाना पसंद करते हैं। अरबी के पत्तों को अब लोग पतौड़ बना लेते हैं।कहां खोया स्वाद 

कुछ लोगों को अरबी के पत्तों से एलर्जी होती है, उन्हें गले में खराश और खुजली होने लगती है इसलिए इन्हें हमेशा इमली या कोकम जैसी खट्टी चीज़ों के साथ पकाने की सलाह दी जाती है। अगर आपकी स्किन सेंसिटिव है तो पत्तियों को छीलने या काटने समय अपने हाथों पर तेल लगाएं।

गोअन बॉल करी

इस एंग्लो- इंडियन रेसिपी में पुर्तगाली जायका भी है। यह करी अधिक मसालेदार और ज्यादा चटपटी होती है। इसे कोकोनट राइस के साथ परोसा जाता है। यह एक नॉन वेजिटिरियन डिश है, क्योंकि इसमें मीट का बेस होता है।

बदलता रूप

इस रेसिपी की जगह फिश करी, मटन, चिकन, प्रॉन्स या एग करी को अधिक पसंद किया जाता है। मीटबॉल्स को बनाने में ऑयल तो ज्यादा लगता ही है, साथ ही समय भी। लेकिन उसके बाद जो स्वाद आता है उसे खाने के बाद लोग तारीफ करते नहीं थकते। 

कहां खोया स्वाद 

गोवा में सी-फूड की भरमार है इसलिए भी मीटबॉल्स करी की जगह बिंदालू या चिकेन बिंदालू और मालवानी करी ने ले ली है।

टवसली

यह गोवा का एक पारंपरिक कुकुंबर केक है। इशके बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि केके को बेक करने के बजाय स्टीम किया जाता है। यह व्यंजन पारंपरिक रूप से पीले खीरे के साथ पकाया जाता है लेकिन इसे तैयार करने के लिए रोजाना या लंबे गहरे हरे रंग के खीरे का उपयोग किया जा सकता है। स्टीम्ड एगलेस कुकंबर केक को गोवा में कुछ लोग टवसली तो कुछ तोसली भी कहते हैं। यह केक खीरा, रवा, गुड़ और नारियल डालकर तैयार किया जाता है। इसमें आपको खीरे का स्वाद और गुड़ की हल्की मिठास मिलेगी।

बदलता रूप

गोवा में ज्यादातर फॉरनर्स हैं इसलिए उन्हें मिठाईयों की जगह चॉकलेट्स खाना ज्यादा पसंद है। इस तरह टक्सली की जगह चॉकलेट्स ने ली है।

कहां खोया स्वाद

खीरे का प्रयोग अब सैलेड व रायते में ज्यादा किया जाता है। दूसरे यह बेक की जगह स्टीम करके बनाया जाता है, इसका स्वाद अन्य केक की तुलना में लोगों को नहीं भाता। 

Posted By: Priyanka Singh

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