Overprotective Parents में होते हैं ये खास लक्षण, कहीं आप भी तो नहीं इसमें से एक
अपने बच्चे को लेकर प्रोटेक्टिव तो हर पेरेंट्स होते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं कि जरूरत से ज्यादा लाड़-प्यार उनके भविष्य को बर्बाद कर सकता है? जी हां आज इस आर्टिकल में हम आपको प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग (Plastic Wrap Parenting) के बारे में बताएंगे जिससे कई माता-पिता अपने बच्चों की परवरिश करना पसंद करते हैं लेकिन इससे होने वाले नुकसान से बेखबर रहते हैं।
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में पेरेंट्स के लिए बच्चों की परवरिश एक बड़ा चैलेंज (Child Development Issues) बन चुकी है। जाहिर तौर पर हर बच्चे की जरूरतें और पसंद-नापसंद अलग-अलग होती हैं। यही वजह है कि हर तरह का पेरेंटिंग स्टाइल हर बच्चे पर फिट नहीं बैठता है। जी हां, आपने भी अब तक पेरेंटिंग के कई तरीकों के बारे में सुना होगा, लेकिन क्या आपको मालूम है कि प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग (Plastic Wrap Parenting) क्या होती है? बता दें, कई पेरेंट्स अपने बच्चों की परवरिश के लिए इस तरह की पेरेंटिंग फॉलो करते हैं लेकिन इससे होने वाले नुकसानों (Overprotective Parenting Dangers) को नहीं जानते हैं। अगर आप भी इससे अनजान हैं, तो आइए आपको आसान शब्दों में समझाते हैं इसका A to Z...
क्या होती है प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग?
प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग बच्चों की परवरिश का एक ऐसा स्टाइल है, जिसमें माता-पिता अपने बच्चे को हर संभव खतरे से बचाने के लिए जरूरत से ज्यादा प्रोटेक्टिव माहौल बनाकर रखते हैं। इस तरह की पेरेंटिंग में बच्चों को सुरक्षा की एक ऐसी चादर या बुलबुले में रखने की कोशिश की जाती है, जहां उन्हें किसी भी तरह की परेशानी या नुकसान का सामना नहीं करना पड़े।
इसे प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग क्यों कहते हैं?
पेरेंटिंग का यह स्टाइल प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग इसलिए कहलाता है क्योंकि यह एक बच्चे को प्लास्टिक रैप में लपेटने जैसा है। आप इसे इस उदाहरण से समझिए, जैसे- प्लास्टिक रैप किसी चीज को पूरी तरह से ढक लेता है, ठीक वैसे ही इस तरह के पालन-पोषण में बच्चे को पूरी तरह से कंट्रोल करने की कोशिश की जाती है। अंतर सिर्फ इतना है कि यहां ये सब प्यार और सुरक्षा के नाम पर होता है।
प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग के संकेत
- हर संभव खतरे से बच्चे को बचाने की कोशिश करना।
- बच्चों को खुद फैसले लेने की अनुमति नहीं देना।
- बच्चों को गलतियां करने से रोकने की कोशिश करना।
- बच्चों को किसी भी तरह की आलोचना से बचाना।
- बच्चों को स्वतंत्रता देने से डरना।
यह भी पढ़ें- बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए 90s के दौर की ये Parenting Tips हैं काफी असरदार
क्यों नुकसानदायक है प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग?
कॉन्फिडेंस में कमी
इस तरह की पेरेंटिंग में माता-पिता जरूरत से ज्यादा प्रोटेक्टिव होते हैं, ऐसे में बच्चों में कॉन्फिडेंस की कमी देखने को मिलती है क्योंकि वे कुछ भी नया एक्सपीरिएंस करने से डरते हैं। इसलिए बच्चों को आगे चलकर जिंदगी में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
आजादी को नुकसान
इस तरह के पालन-पोषण में प्यार के नाम पर बच्चों की आजादी छीन ली जाती है और वे स्वतंत्रता से दूर रह जाते हैं। उन्हें अपने फैसले लेने और अपनी गलतियों से सीखने का मौका तक नहीं मिल पाता है।
सोशल स्किल्स में कमी
प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग से हुई परवरिश से बड़े हुए बच्चों को दूसरों के साथ बातचीत करने और रिश्ते बनाने का कम मौका मिलता है। इससे उनकी सोशल स्किल्स का विकास नहीं हो पाता है।
स्ट्रेस की वजह
प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग से बच्चों की परवरिश करते समय माता-पिता हमेशा चिंता या तकलीफ में रहते हैं। वे छोटी-छोटी बातों को लेकर ओवरथिंक करने लगते हैं। ऐसे में, इसका असर बच्चों की मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है और वह भी स्ट्रेस का शिकार हो जाते हैं।
नए एक्सपीरिएंस से डरना
बच्चों की परवरिश के लिए माता-पिता जब प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग का रास्ता अपनाते हैं, तो बच्चों को नए अनुभवों को आजमाने और अपनी क्रिएटिविटी को दिखाने का मौका ही नहीं मिल पाता है।
अनहेल्दी कॉम्पिटिशन
प्लास्टिक रैप पेरेंटिंग में माता-पिता जाने-अनजाने बच्चों को एक ऐसे कॉम्पिटिशन का हिस्सा बना लेते हैं, जो उनके फिजिकल और मेंटल दोनों तरह की सेहत के लिए एक बड़ी मुसीबत बन जाता है। ऐसे पेरेंट्स बच्चों से बहुत ज्यादा उम्मीदें रखते हैं और उन्हें दूसरों से बेहतर बनने के लिए जरूरत से ज्यादा प्रेशर डालते हैं।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।