International Tea Day: आज है अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस, जानें क्या है इस दिन का इतिहास और महत्व
International Tea Day हर साल अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस को सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। चलिए जानते हैं क्या है इस दिन का इतिहास और महत्व। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। International Tea Day: 21 मई का दिन चाय लवर्स का पसंदीदा दिन है क्योंकि ये दिन चाय को समर्पित है। हर साल इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस के रूप में सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व का जश्न मनाने के लिए मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य चाय के इतिहास, उत्पादन, खपत और स्वास्थ्य लाभों सहित चाय के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरुकता बढ़ाना है। इसके अलावा यह दिन वैश्विक चाय के महत्व को प्रतिबिंबित करता है। तो चलिए जानते हैं कि इस दिन का इतिहास और महत्व क्या है।
International Tea Day 2023: तारीख
पहला अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस 2005 में भारत की राजधानी नई दिल्ली में मनाया गया था और बाद में अन्य चाय उगाने वाले देशों - श्रीलंका, नेपाल, वियतनाम, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, केन्या, मलावी, मलेशिया, युगांडा और तंजानिया जैसे देशों में भी मनाया जाने लगा। दस साल बाद, भारत सरकार ने 2015 में चाय पर एफएओ अंतर-सरकारी समूह के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस के पालन का विस्तार करने का प्रस्ताव रखा, जो विश्व स्तर पर चाय के अर्थव्यवस्था का समर्थन करने के लिए अनेकों प्रयासों का नेतृत्व करता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 मई को अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस के रूप में नामित करने का निर्णय लिया।
International Tea Day 2023: इतिहास
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस बात के सबूत हैं कि 5,000 साल पहले चीन में चाय का सेवन किया जाता था। कहानी यह है कि चीनी सम्राट शेन नुंग ने पहली बार इसका स्वाद चखा था। जब वह और उसके सैनिक एक पेड़ के नीचे आराम करने रुके, तो हवा में उड़ने वाली चाय की कुछ पत्तियां वहां उबलते पानी के एक बर्तन में गिर गईं, जिसके बाद उसमें घुल गईं और आज चाय दुनिया में सबसे अधिक खपत किया जाने वाला पेय बन चुका।
चाय को पहली बार 2737 ईसा पूर्व में चीन में खोजा गया था। आज यह एशियाई संस्कृति में एक प्रमुख पेय पदार्थ के रू में उभर चुका है। हालांकि, औषधीय इलाज में बदलने से पहले धार्मिक अनुष्ठानों के रूप में चाय एक प्रतीकात्मक हिस्सा था। चीन के चाय प्रोडक्शन करने के एकाधिकार को चैलेंज करने के लिए अंग्रेजों ने पहली बार 1824 में भारत में चाय की फसल उगाने की शुरुआत की और तब से यह दार्जिलिंग, नीलगिरी और असम में बड़े पैमाने पर उगाया जाने लगा। आज भारत में कथित तौर पर 900,000 टन चाय का उत्पादन होता है।
International Tea Day 2023: महत्व
चाय का एक लंबा इतिहास है और यह विभिन्न देशों की संस्कृतियों में गहराई से समाई हुई है। इन देशों में चाय न केवल एक लोकप्रिय पेय है बल्कि कई समाजों में सामाजिक रीति-रिवाजों, समारोहों और आतिथ्य में भी अहम भूमिका निभाती है। चाय उद्योग दुनिया भर के लाखों लोगों के लिए आजीविका का एक प्रमुख स्रोत है खासतौर से चाय उगाए जाने वाले क्षेत्रों में। अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस चाय क्षेत्र के आर्थिक मूल्य को पहचानने के लिए है और इसका उद्देश्य स्थायी चाय उत्पादन और निष्पक्ष व्यापार प्रथाओं को बढ़ावा देना है।
अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस, चाय के व्यापार को स्थिरता, उत्पादन और खपत को बढ़ावा देने पर जोर देता है। साथ ही उन प्रथाओं को प्रोत्साहित करता है, जो पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देते हैं। इसके अलावा इस काम में जुटे श्रमिकों के लिए उचित मजदूरी सुनिश्चित करना हैं और चाय उगाने वाले क्षेत्रों में सामाजिक विकास को बढ़ावा देना भी इसका मुख्य उद्देश्य है। चाय, विशेष रूप से हरी और हर्बल चाय कई स्वास्थ्य लाभों से जुड़ी हुई है क्योंकि यह एंटीऑक्सिडेंट और फाइटोकेमिकल्स से भरपूर होती है, जो संपूर्ण स्वास्थ्य और कल्याण पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस चाय के सेवन के संभावित स्वास्थ्य लाभों के बारे में जागरूकता को फैलाने के लिए भी मनाया जाता है।
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