फोर्ब्स की सूची में स्थान पाकर देश की तीन महिलाओं सोमा मंडल, नमिता थापर और गजल अलघ ने लहराई है सफलता की पताका
देश की तीन महिलाओं सोमा मंडल नमिता थापर और गजल अलघ ने फोर्ब्स की सूची में अपना नाम लाकर साबित कर दिया है कि महिलाएं किसी से कम नहीं है और वे किसी भी क्षेत्र में अपनी प्रतिभा को साबित कर सकती हैं

प्रियंका दुबे मेहता
फोर्ब्स की सूची में स्थान पाने वाली देश की तीन महिलाओं सोमा मंडल, नमिता थापर और गजल अलघ ने महिला सशक्तीकरण की ऐसी मिसाल पेश की है कि पूरा विश्व भारत की बेटियों की भूरि-भूरि प्रशंसा कर रहा है।
कुशल नेतृत्व वाली सोमा मंडल
स्टील अथारिटी आफ इंडिया (सेल) की पहली महिला चेयरपर्सन सोमा ने जब एक जनवरी, 2021 में बतौर चेयरपर्सन पदभार संभाला तो उन्होंने अपनी पहली बैठक में ही इतना सशक्त संदेश दिया कि लोगों में उन्हें लेकर भरोसा बढ़ गया।
मूलरूप से भुवनेश्वर से ताल्लुक रखने वाली सोमा ने एनआइटी, राउरकेला से 1984 में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग करने के बाद बतौर प्रशिक्षु नालको से अपने करियर की शुरुआत की और अपनी प्रतिभा के बूते सफलता की सीढ़ियां चढ़ती हुई 2014 में नालको के निदेशक (कमर्शियल) के पद तक पहुंच गईं। सोमा ने मार्च 2017 में स्टील अथारिटी आफ इंडिया ज्वाइन किया। अपनी प्रतिभा और रणनीति से उन्होंने स्टील अथारिटी आफ इंडिया को सफलता के एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया। सफलता का ग्राफ सेल्स (बिक्री) के क्षेत्र में ऊंचाइयों को छूने लगा और उनके नेतृत्व में कंपनी आज भी उसी गति से सफलता के नित नए फलक चूम रही है। सोमा ने फोर्ब्स सूची में अपना नाम शामिल होने पर कहा कि यह उनके लिए केवल एक पहचान ही नहीं, बल्कि स्टील अथारिटी आफ इंडिया में उनके और सभी कर्मचारियों के कठिन परिश्रम की प्रशंसा भी है।
दृढ़विश्वासी नमिता थापर
नमिता थापर, एक ऐसा नाम जो स्वयं में ब्रांड है। कभी शार्क टैंक में सलाहकार और गुरु की भूमिका में तो कभी सफल बिजनेसवुमन के तौर पर वह अपना प्रभाव लोगों पर छोड़ती नजर आती हैं। पुणे स्थित एचआइवी एंटीवायरल और कार्डियोवैस्कुलर सहित अन्य कई बीमारियों की दवा बनाने वाली कंपनी एमक्योर फार्मा को सफलता के शीर्ष पर पहुंचाने वाली नमिता वर्तमान में कंपनी की एग्जीक्यूटिव निदेशक हैं। ड्यूक विश्वविद्यालय से एमबीए करने के उन्होंने करियर की शुरुआत की। उन्होंने मेडिकल उपकरण बनाने वाली अमेरिका स्थित कंपनी गाइडेंट के फाइनेंस और मार्केटिंग विभाग में भी छह साल तक काम किया। कुछ समय पश्चात पिता सतीश मेहता की कंपनी एमक्योर फार्मा ज्वाइन की और उनके नेतृत्व में कंपनी सफलता की नई इबारत लिखती चली गई। फोर्ब्स की रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि जब पांच वर्ष पहले नमिता ने इस कंपनी का प्रभार संभाला तो उसका घरेलू राजस्व आसमानी बुलिंदियों पर पहुंच गया।
एक उद्यमी होने के साथ-साथ नमिता इंटरप्रेन्योर कोच भी हैं। शार्क टैंक इंडिया जैसे लोकप्रिय कार्यक्रम में वह नवोदित उद्यमियों को उद्योग और व्यवसाय की बारीकियां सिखाती हैं। नमिता केवल एक सफल बिजनेस इंटरप्रेन्योर ही नहीं एक अच्छी लेखक भी हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘द डाल्फिंस एंड द शार्क’ में उद्यमियों की कहानियां प्रकाशित की हैं। वह यूट्यूब का भी नामी चेहरा हैं। इस मंच पर वह अनकंडीशन योर सेल्फ विद नमिता थापर के नाम से शो होस्ट करती हैं। इसमें वह महिलाओं के स्वास्थ्य पर चर्चा करती हैं। नमिता का मानना है कि महिला स्वास्थ्य के प्रति समाज में जागरूकता बहुत आवश्यक है।
सौंदर्य क्षेत्र की पहचान गजल अलघ
मामा अर्थ, द डर्मा को, एक्वालोजिका और आयुगा कंपनियां कास्मेटिक और त्वचा और सौंदर्य क्षेत्र में जाना माना नाम हैं और इन्हें सफल बनाने के पीछे जो शक्ति रही है, उसका नाम है गजल अलघ। 34 वर्षीया गुरुग्राम निवासी गजल अपने पति वरुण अलघ के साथ मिलकर यह कंपनियां चलाती हैं और रसायन रहित त्वचा के उत्पाद बनाने पर ध्यान देती हैं। एक कला प्रेमी, जुझारू कर्मचारी से लेकर एक कंपनी की कर्ता-धर्ता बनने के साथ-साथ परिवार की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभाने वाली महिला अपने शौक, सपनों और चाहतों की बदौलत आज उस मुकाम पर पहुंच गई है जहां पहुंचना विश्व के हर सफल उद्यमी का सपना होता है। फोर्ब्स की सूची में नाम आया तो गजल के नाम का डंका बज रहा है, लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब उन्हें शौक और जरूरतों के बीच एक को चुनना था, जहां उन्हें परिवार और मन की इच्छाओं में से एक को तरजीह देनी थी और जुदा राह पर चलने की जिद और परिस्थितियों की रस्साकशी में अपने आपको टूटने से बचाए रखना था।
पति ने दिए सपनों को पंख
रास्ते मुश्किल थे और परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण। इस सब में फौलाद की तरह मजबूती के खड़े रहे उनके पति वरुण जिन्होंने उनके बचपन के शौक की परवाज भरने के लिए पंख मुहैया करवाए और परिवार के विरोध के बावजूद उन्हें कला की बारीकियां सीखने के लिए अमेरिका भेजा। न्यूयार्क कला अकादमी में उन्होंने अपने जीवन के कैनवस पर खुशियों के रंग भर डाले।
मध्ययवर्गीय परिवार में जन्मी गजल मूलरूप से चंडीगढ़ से हैं। गजल कहती हैं कि मेरे माता-पिता ने मुझे इंजीनियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया। चित्रकला में करियर की सीमित संभावनाएं देखते हुए मैंने कंप्यूटर साइंस में बीसीए करने के बाद एनआइआइटी और इंफोसिस के साथ इंटर्नशिप की। मेरा चयन सबसे कम उम्र की प्रशिक्षक के रूप में हो गया। शादी के बाद शौक के रंग भरने का समय मिला तो चार से पांच महीने के समय में मैंने 50 कृतियां बना डालीं। पति की प्रेरणा और संबल से मैं इस क्षेत्र में आगे बढ़ी और मुझे न्यूयार्क कला अकादमी से भी सराहना मिला और मैं कला के क्षेत्र में आगे बढ़ती गई। हालांकि चुनौतियां अभी मेरी राह देख रही थीं। कारण, बेटे अगस्त्या के जन्म के बाद पता चला कि उसे त्वचा की एक विशेष प्रकार की एलर्जी हो जाती है। धीरे-धीरे पता चला कि विभिन्न उत्पादों में मिले रसायनों से उसे एलर्जी हो रही है। हैरानी की बात लगी कि कोई ऐसा ब्रांड नहीं है, जो बच्चों के लिए टाक्सिन से रहित उत्पाद बनाता हो। मैं अमेरिका में थी तभी मुझे पता चला कि वहां पर इस तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं। ऐसे में मैं अपने बेटे के लिए के बाहर से चीजें मंगवाने लगी।
राहें नहीं थीं आसान
चुनौतियों की कसौटी अक्सर जीवन निखार देती है। गजल के साथ भी ऐसा ही हुआ उन्हें एक राह नजर आई कि क्यों न वे स्वयं इस तरह के उत्पाद बनाएं। मामा अर्थ के बैनर तले उन्होंने ऐसा करना शुरू किया, लेकिन एक नाम से एक पहचान बनाने तक के लिए गजल को यूं ही सफलता नहीं मिल गई। वह बताती हैं कि मैं लोगों को अपने उत्पादों के बारे में, उनके बच्चों की जरूरतों और रसायनों से दूर रहने के फायदों के बारे में बताने लगी। वह बीते दिन याद करते हुए कहती हैं कि किस तरह से एक हाथ में बेटे को लिए दूसरे हाथ से फोन पकड़कर लोगों को समझाती थी। कंपनी के लिए सरकारी स्वीकृति और अन्य औपचारिकताओं में अपनी नींद, चैन सब त्याग देना पड़ा। गजल कहती हैं कि महिलाओं को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता, बस मन में जज्बा और कुछ कर गुजरने की जिद हो। इसके साथ ही मदद मांगने में कभी संकोच नहीं करनी चाहिए, मदद मांगकर अपने शौक को जिएं और जीवन को नई दिशा दें।
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