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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 12, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Hindi Diwas Special: तकनीक ने हिंदी को बना दिया है और भी ज्यादा कूल, कुछ इस तरह है हमारी जिंदगी में शामिल

By Umanath SinghEdited By:
Published: Sat, 12 Sep 2020 02:02 PM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2020 07:29 AM (IST)

आजकल बोलचाल की भाषा में हिंग्लिश का प्रयोग हो रहा है और ऐसे समय में तकनीक ने हिंदी को हमारे जीवन का अहम हिस्सा बना दिया है।

Hindi Diwas Special: तकनीक ने हिंदी को बना दिया है और भी ज्यादा कूल, कुछ इस तरह है हमारी जिंदगी में शामिल
Hindi Diwas Special: तकनीक ने हिंदी को बना दिया है और भी ज्यादा कूल, कुछ इस तरह है हमारी जिंदगी में शामिल

नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। हिंदी देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है, लेकिन क्या नई पीढ़ी इसे अनकूल समझती है? क्या अंग्रेजी बनती जा रही है महत्वकांक्षा और उन्नति की सूचक? क्या हिंदी साहित्य की किताबें शेल्फ पर पड़े-पड़े धूल खा रही हैं? कितने ही लोग ये कहने में गर्व महसूस करते हैं कि हिंदी हमारी मातृभाषा है, पर इसके बावजूद उन्हें ये पढ़नी या लिखनी नहीं आती है? एबीसीडी तो फर्राटे से बोल लेते हैं, लेकिन क ख ग में जुबान अटक जाती है। हिंदी किताब पढ़ने वालों को देहाती या हिंदी मीडियम कहकर बुलाया जाता था, लेकिन तकनीक ने इस सोच को तोड़ने में अच्छी खासी मदद की है।

हिंदी हमारे जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन यहां ये बात भी ध्यान रखने वाली है कि हिंदी अब वैसी नहीं रही जैसी पहले थी। अब हिंदी की भाषा, परिभाषा और रूपरेखा में बदलाव आया है। 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है और इस अवसर पर हम आज इसके नए रूप के बारे में ही बात करेंगे।

अगर आपने ध्यान दिया हो तो यहां हमने फैक्ट, कूल जैसे कई शब्द लिखे हैं। यही तो है आजकल की ग्लैमराइज हिंदी जिसने हमारी जिंदगी में शामिल होकर इसे और आसान बना दिया है। गूगल पर हिंदी भाषा से जुड़ा कोई भी फैक्ट पढ़ा जा सकता है। शायद आपको ये न पता हो, लेकिन हिंदी दुनिया के 30 से अधिक देशों में हिंदी पढ़ी-पढ़ाई जाती है। जी हां, ये सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में विख्यात है। हिंदी की इसी प्रसिद्धी को बढ़ाने के लिए यकीनन तकनीक ने हमारा साथ दिया है।

- स्मार्टफोन की वजह से जीवन में आ गई हिंदी टाइपिंग

पहले जहां फीचर फोन्स का इस्तेमाल हम सभी किया करते थे वहीं अब स्मार्टफोन है और अब हिंदी टाइपिंग बहुत ही आसान हो गई है। ज़रा सोचिए कि कितनी खूबसूरती से आप अपने फोन के जरिए हिंदी के सही वाक्य बना सकते हैं। स्पीक एंड राइट तकनीक की वजह से हिंदी में लिखना और भी ज्यादा आसान हो गया है।

- हिंदी के लेख आसानी से हैं उपलब्ध

हिंदी लेखन में हमारे देश के महान कवियों और लेखकों ने साहित्य को समृद्ध बनाया है। मुंशी प्रेमचंद, भारतेन्दु हरिश्चंद, महावीर प्रसाद द्विवेदी, श्याम सुन्दर दास , रामधारी सिंह दिनकर जैसे लेखकों की रचनाएं अब सिर्फ किताबों में ही नहीं रही हैं। अब ये रचनाएं तकनीक के माध्यम से हमारे घर तक पहुंच गई हैं। ऑनलाइन इन्हें पढ़ना आसान है और यही कारण है कि कुछ हद तक नई पीढ़ी भी इनसे जुड़ पाई है। अब हिंदी सीखने की सीमा सिर्फ विद्यालयों तक ही सीमित नहीं रह गई है बल्कि ये आपके घर तक पहुंच गई है।

- हिंदी की किताबें और कहानियां सुनी जा सकती हैं ऑनलाइन

कहते हैं कि अगर कुछ सुना या देखा जाए तो वो ज्यादा लंबे समय तक याद रहता है। हो सकता है कि आपको हिंदी पढ़ने या फिर इसे लेकर लेख लिखने का मन न हो, लेकिन अब हिंदी कहानियां ऑडिबल जैसे प्लेटफॉर्म पर सुनी जा सकती हैं। कई ऑडियो और वीडियो चैनल इसपर काम कर रहे हैं। इस बारे में हमने कुछ हिंदी लेखकों से बात कर उनकी राय भी जानने की कोशिश की है।

'नीला स्कार्फ' , 'मम्मा की डायरी' और टीवी सीरीज 'आर्या' की सह-लेखिका अनु सिंह चौधरी ने भी हिंदी और तकनीक के समागम को लेकर अपने विचार व्यक्त किए। उनका कहना है कि, 'जो नए प्लेटफॉर्म आए हैं, वो चाहें सोशल मीडिया हो या सुनने के प्लेटफॉर्म जैसे ऑडिबल, जहां अगर आपको लिपी पढ़नी नहीं आती लेकिन कहानियों से प्रेम है तो भी आप हिंदी साहित्य से जुड़ेंगे। हिंदी की कहानियां आप इसलिए सुनेंगे क्योंकि अपनी भाषा को और बेहतर तरीके से जानने की, सुनने की, समझने की एक तरह की उत्सुक्ता है'

लेकिन हिंदी साहित्य को सरल बनाने के साथ एक शंका सामने आती है क्या हिंदी में अंग्रेजी शब्दों का मिश्रण सही है? क्या इसे भाषा के विकास की तरह देखा जाना चाहिए?इस बारे में साहित्यकार कुमार रवि कहते हैं कि, 'हिंदी को विकृत या अशुद्ध नहीं होने देना चाहिए, लेकिन क्लिष्ट हिंदी हो ऐसा भी जरूरी नहीं है।'

कुछ ऐसे ही विचार हैं दिव्य प्रकाश दुबे के जिनकी किताब श्रंखला 'पिया मिलन चौक' एमेजॉन ऑडिबल पर काफी पसंद की जा रही है, 'तकनीक पाठकों और साहित्यकारों को पास ले आई है। मेरा मानना है कि कहानी ऐसी लिखनी चाहिए जैसे किसी को सुना रहे हों। मेरी किताबें वो लोग पढ़ रहे हैं जिन्होंने पहले मेरी कहानियां सुनी हैं। इस माध्यम और तकनीक के मिश्रण से हम साहित्य को और भी ज्यादा लोगों तक ले जा पाएंगे।'

जहां एक ओर लोग इसे भाषा का विकास मान रहे हैं वहीं ये भी बात समझने वाली है कि ये भाषा की सहजता को और भी ज्यादा बढ़ा रहा है। हमारी हिंदी भाषा यकीनन सबसे अनोखी है जिसे अपने जीवन का हिस्सा बनाना बहुत ही आसान है। हिंदी हमारी मातृभाषा है और एक मां की तरह ही इसमें भी कई भाषाओं का समागम हो चुका है। तभी तो आज हमारी हिंदी शब्दावली में न जाने कितने ही शब्द अन्य भाषाओं से मिले हुए हैं। उम्मीद है कि ज्यादा से ज्यादा लोग तकनीक के माध्यम से हिंदी से और भी सरल ढंग से जुड़ेंगे।

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