नई दिल्ली, लाइफस्टाइल डेस्क। Bakrid Mubarak 2021: इस्लाम समुदाय के लोगों के लिए ईद-उल-अज़हा दूसरा सबसे बड़ा त्योहार होता है। ईद-उल-अज़हा को ईद-उल-ज़ुहा या बकरीद भी कहा जाता है। देश भर में इस साल बकरीद 21 जुलाई को मनाई जाएगी। इस्लामिक कैलेंडर के हिसाब से ईद-उल-अज़हा 12वें महीने की 10 तारीख को मनाई जाती है। यानी रमज़ान के महीने के ख़त्म होने के 70 दिन के बाद बकरीद मनाई जाती है।

आज देशभर में बकरीद का त्योहार मनाया जा रहा है। मस्जिदों में नमाज पढ़ी जा रही है। आज इस मौके पर आप अपने प्रियजनों और शुभचिंतकों को ईद की मुबारकबाद दे सकते हैं। यहां देखें बकरीद के खास मैसेज और शायरी।

तमन्ना आपकी सब पूरी हो जाए,

हो आपका मुकद्दर इतना रोशन की,

आमीन कहने से पहले ही हर दुआ कबूल हो जाए।

आपको और आपके पूरे परिवार को बकरीद मुबारक 2021

सदा हंसते रहो जैसे हंसते हैं फूल,

दुनिया के सारे गम तुम जाओ भूल,

चारों तरफ फैलाओ खुशियों के गीत,

इसी उम्मीद के साथ तुम्हें मुबारक हो बकरीद 2021।

रात का नया चांद मुबारक,

चांद की चांदनी मुबारक,

फलक को सितारे मुबारक,

सितारों को बुलंदी मुबारक,

और आपको ईद मुबारक

सोचा किसी अपने से बात करूं,

अपने किसी खास को याद करूं,

किया जो फैसला बकरा ईद मुबारक कहने का,

दिल ने कहा, क्यों ना सबसे पहले आपसे शुरुआत करूं

बकरा ईद की मुबारकबाद

इस दिन क्या किया जाता है?

इस दिन इस्लाम समुदाय के लोग सुबह जल्दी उठकर नहाते हैं, नए कपड़े पहनते हैं और ईद की ख़ास नमाज़ पढ़ते हैं। इसके बाद अपने रिश्तेदारों, करीबियों और दोस्तों को ईद की मुबारकबाद भी देते हैं। ईद-उल-अज़हा के मौके पर बकरे या भेड़ की कुर्बानी भी दी जाती है। कुर्बानी के बाद बकरे के गोश्त के तीन हिस्से किए जाते हैं। एक हिस्सा गरीबों को जाता है, दूसरा हिस्सा पड़ोसियों और रिश्तेदारों को जाता है और तीसरा हिस्सा अपने पास रखा जाता है। इस दिन दान पुण्य भी किया जाता है।

मुबारक नाम है तेरा,

मुबारक ईद हो तुझको,

जिसे तू देखना चाहे,

उसी की दीद हो तुझको

सभी को ईद मुबारक!

अल्लाह आपको ईद के

मुक्कदस मोके पर तमाम

खुशियां अता फरमाएं

और आपकी इबादत क़ुबूल करें!

ईद मुबारक!

क्यों ईद पर दी जाती कुर्बानी?

दरअसल, इस्लामिक मान्यता के अनुसार हज़रत इब्राहिम अपने पुत्र हज़रत इस्माइल को इसी दिन खुदा के हुक्म पर कुर्बान करने जा रहे थे, तभी अल्लाह ने उनके पुत्र को जीवनदान दे दिया था। इसी की याद में यह त्योहार मनाया जाता है। कुर्बानी पैग़म्बर इब्राहीम के वक्त में शुरू हुई थी, जो आज भी जारी है।

Edited By: Ruhee Parvez