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    भागदौड़-भरी जिंदगी में आपका सहारा बनेगा जापान का Yutori Lifestyle, मानसिक थकान को रखेगा कोसों दूर

    Updated: Mon, 19 May 2025 12:47 PM (IST)

    आज की भागदौड़-भरी जिंदगी में कई लोग बर्नआउट यानी मानसिक थकावट का शिकार हो जाते हैं। काम का बोझ हो पढ़ाई की टेंशन या फिर घर की जिम्मेदारियां इन सभी चीजों ने मिलकर हमारे दिल और दिमाग दोनों पर बोझ बढ़ा दिया है। ऐसे में यहां हम आपको जिंदगी जीने का एक खास तरीका (Yutori Lifestyle) बताने जा रहे हैं जो जापान के जरिए पूरी दुनिया में फैल रहा है।

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    स्ट्रेसफुल लाइफ में बर्नआउट से बचाएगा जापान का Yutori लाइफस्टाइल (Image Source: Freepik)

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, काम की जिम्मेदारियां और टेंशन हमें हर पल घेरे रहती हैं। रोजाना यही साइकिल रिपीट होता है और दिल और दिमाग पर बोझ बढ़ता चला जाता है। ऐसे में, जापान का एक खास लाइफस्टाइल हर किसी के लिए बेहद राहत-भरा साबित हो सकता है, जिसमें स्ट्रेस से बचने और मन को शांति देने के तमाम तरीकों पर ध्यान दिया जाता है। आइए, इस आर्टिकल में विस्तार से आपको Yutori Lifestyle का मतलब समझाते हैं और बताते हैं कि आप कैसे इसके जरिए आप अपनी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बना सकते हैं।

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    क्या है यूटोरी का मतलब?

    'यूटोरी' का मतलब है 'छूट' या 'मुक्ति'। जिंदगी जीने का यह कॉन्सेप्ट कहता है कि लाइफ को थोड़ा आसान और आरामदायक बनाना आज हर किसी के लिए बेहद जरूरी है ताकि हम स्ट्रेस, थकान और बर्नआउट से बच सकें। यूटोरी के जरिए आप काम और पढ़ाई या ऑफिस और पर्सनल लाइफ में बैलेंस बनाने का तरीका सीख सकते हैं, जिससे खुद को इमोशनली स्ट्रॉन्ग बना सकें।

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    दिलचस्प है यूटोरी का इतिहास

    1990 के दशक में जापान में बर्नआउट की समस्या काफी बढ़ गई थी। लोग ज्यादातर समय काम में बिजी रहते थे, स्कूलों में पढ़ाई का प्रेशर भी ज्यादा था और सोशल लाइफ लगभग न के बराबर रह गई थी। ऐसे में, समाज ने महसूस किया कि इस रफ्तार को धीमा करना जरूरी है। इसी दौरान 'यूटोरी क्योइकु' (Yutori Education) की शुरुआत हुई, जिसका मकसद पढ़ाई के दबाव को कम करना और बच्चों को ज्यादा आराम देने के साथ-साथ उनकी क्रिएटिविटी और सोचने-समझने की क्षमता को बढ़ावा देना था।

    कैसे काम करता है यूटोरी कॉन्सेप्ट?

    • काम और पढ़ाई में आराम: जापान ने काम के घंटों को कम किया और स्कूलों में पढ़ाई के समय में भी कटौती की ताकि स्टूडेंट्स और एम्प्लॉई बर्नआउट से बच सकें।
    • स्ट्रेस कम करने वाले नियम: ऑफिस में ज्यादा लंबे घंटे काम न करने के लिए नियम बनाए गए, जिससे कर्मचारी अपने परिवार और खुद के लिए समय निकाल सकें।
    • मन की स्थिति पर ध्यान: मेडिटेशन जैसी एक्टिविटीज के जरिए मेंटल हेल्थ को बूस्ट करने पर जोर दिया गया ताकि लोग स्ट्रेस को समझें और उसे मैनेज करने में उन्हें ज्यादा मुश्किल का सामना न करना पड़े।
    • बैलेंस लाइफस्टाइल: यूटोरी का मतलब है कि जिंदगी में सिर्फ काम नहीं, बल्कि खेल, परिवार और खुद के लिए भी वक्त निकालना जरूरी है।

    जिंदगी को बेहतर बनाता है 'यूटोरी'

    भारत और दुनिया के बाकी हिस्सों में भी लोग तेजी से स्ट्रेस और बर्नआउट का शिकार हो रहे हैं। ऐसे में, यूटोरी हमें सिखाता है कि जिंदगी में आराम और खुशी भी उतनी ही जरूरी है जितना काम करना।

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