लाइका का नाम तो सुना होगा, पर क्या आप जानते हैं अंतरिक्ष में जाने वाली पहली बिल्ली 'फेलिसेट' की कहानी?
अंतरिक्ष की गहराइयों में इंसानों से पहले जानवरों ने कदम रखे, जिनमें फेलिसेट नाम की एक बिल्ली भी शामिल थी।

अंतरिक्ष में कदम रखने वाली फेलिसेट बिल्ली की कहानी (Picture Courtesy: Instagram)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अंतरिक्ष की गहराइयों में छिपे राज हमेशा से ही इंसानों के लिए जिज्ञासा का विषय रहे हैं, लेकिन इंसानों की अंतरिक्ष यात्रा में जानवरों का भी अहम योगदान रहा है। इंसानों को अंतरिक्ष में भेजना सुरक्षित है या नहीं, इसके लिए सबसे पहले जानवरों को वहां भेजकर परीक्षण किया गया।
आप कुत्ते या बंदर की अंतरिक्ष यात्रा के बारे में सुन चुके होंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं एक बिल्ली ने भी अंतरिक्ष में कदम रखकर इतिहास रचा था? जी हां, इस बिल्ली का नाम था फेलिसेट। आइए जानें फेलिसेट की अंतरिक्ष यात्रा के बारे में।
कौन थी ये बिल्ली?
ये बाक 18 अक्टूबर 1963 की है, जब फ्रांस ने पहली बार किसी बिल्ली को अंतरिक्ष में भेजकर पूरी दुनिया को चौंका दिया। फेलिसेट एक काले-सफेद रंग की बिल्ली थी, जिसे इस मिशन के लिए चुना गया था। हालांकि, अंतरिक्ष यात्रा पर जाने से पहले वैज्ञानिकों की फाइलों में उसकी पहचान सिर्फ C341 कोड से होती थी और मिशन पूरा होने के बाद उसे फेलिसेट नाम दिया गया।
मुश्किल ट्रेनिंग के बाद मिला अंतरिक्ष का टिकट
अगर आप सोच रहे हैं कि अंतरिक्ष में जाने के लिए सिर्फ इंसानों को कड़ी ट्रेनिंग से गुजरना पड़ता है, तो आपको बता दें कि फेलिसेट को भी अंतरिक्ष में जाने से पहले मुश्किल ट्रेनिंग से गुजरना पड़ा था। इस मिशन के लिए वैज्ञानिकों ने सबसे पहले 14 फीमेल बिल्लियों को चुना और उन्हें कड़ी ट्रेनिंग दी।
बिल्लियों को लंबे समय तक बेहद छोटे डिब्बों में बंद रखा जाता था। अंतरिक्ष की तेज रफ्तार और दबाव का अनुभव कराने के लिए उन्हें सेंट्रीफ्यूज में घुमाया जाता था। इस सख्त ट्रेनिंग के बाद सिर्फ 6 बिल्लियां ही अगले राउंड तक पहुंच सकीं, जिनमें से आखिरकार फेलिसेट को अंतरिक्ष यात्रा के लिए चुना गया।
कैसी थी फेलिसेट की अंतरिक्ष यात्रा?
फेलिसेट की दिमागी गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए उड़ान से पहले उसके सिर में एक खास इलेक्ट्रोड लगाए गए थे। जब उसने उड़ान भरी, तो वह पृथ्वी से 157 किलोमीटर की ऊंचाई पर पहुंची और लगभग 5 मिनट तक अंतरिक्ष में रही और ये मिशन सफल हुआ। इस मिशन का मकसद ये जानना था कि अंतरिक्ष यात्रा के दौरान दिमाग की गतिविधियों और शरीर पर क्या असर पड़ता है। इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने की फ्रांस की योजना में फेलिसेट का अहम योगदान रहा।
सफलता के बाद भी नहीं मिली पहचान
फेलिसेट का मिशन कामयाब रहा और फ्रांस के अंतरिक्ष मिशन में ये मील का पत्थर साबित हुआ, लेकिन फिर भी फेलिसेट को अंतरिक्ष में जाने वाले दूसरे जानवरों की तुलना में लंबे समय तक पहचान नहीं मिली, जिसकी वो हकदार थी।
