बजट टाइट है, फिर भी फेस्टिव सीजन में खूब हो रही शॉपिंग! मिडिल क्लास के हाथ लगा ये 'सीक्रेट हैक'
आज से शुरू हो रहे हैं शारदीय नवरात्र। त्योहारों के इस मौसम में सबसे ज्यादा उत्साहित रहता है बाजार और ...और पढ़ें

त्योहारी उमंग में खूब जमेगा रंग (Image Source: AI-Generated)
HighLights
त्योहारी सीजन में ₹1.5 लाख करोड़ से अधिक का व्यापार अनुमानित
ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स में 5 लाख से अधिक गिग वर्कर्स की हायरिंग
डिजिटल भुगतान, BNPL से टियर-2/3 शहरों में बढ़ी खरीदारी
अविनाश चंद्रा, नई दिल्ली। भारत में त्योहारों और उत्सवों का सिलसिला शुरू हो चुका है, वहीं आर्थिकी और कारोबार के लिए भी मेगा-फेस्टिव सीजन की शुरुआत है। जब देश की आर्थिकी फुल स्पीड में दौड़ रही होती है। इस वर्ष भारतीय जिस समय त्योहारी उमंग में सराबोर हो रहे होंगे, उस समय देश की आर्थिक रगों में भी एक अलग प्रकार की तेजी होगी। दरअसल, इस बार का फेस्टिव सीजन पारंपरिक उल्लास के साथ-साथ आर्थिक मोर्चे पर भी नया कीर्तिमान गढ़ने को तैयार है। बाजार के जानकारों और ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इस बार फेस्टिव सीजन सिर्फ खरीददारों के घरों में ही खुशियां नहीं बिखेरेगा, बल्कि उन खुशियों को हमारे घरों तक पहुंचाने वाले गिग वर्कर्स के चेहरों पर भी इसकी झलक दिखेगी। दरअसल, भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत ई-कामर्स कंपनियों को कीमतों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए डिस्काउंट प्राइज और प्रायर प्राइज दोनों प्रदर्शित करने के निर्देश दिए हैं। इससे वास्तविक कीमतों और छूट को लेकर भ्रम की स्थिति दूर हुई है। नए सरकारी नियमों के कारण खरीदार जहां ‘फेयर प्राइज’ के प्रति आश्वस्त होकर बंपर खरीददारी करने का मन बना रहे हैं, वहीं, ई-कामर्स कंपनियां भी इस मौके को गंवाने के मूड में नहीं हैं।
खुशी की चमक होगी दोगुणी
इस त्योहारी सीजन देश में लगभग डेढ़ लाख करोड़ रुपये की खरीद-फरोख्त होने की उम्मीद है। इस दौरान अधिक से अधिक कस्टमर्स तक जल्दी से जल्दी सामान पहुंचाने की होड़ में ई-कामर्स, क्विक कामर्स, रिटेल और लाजिस्टिक्स जैसे सेक्टरों की कंपनियों में बंपर हायरिंग हो रही है। कंपनियों की योजना त्योहारी सीजन चरम पर आने से पहले पांच लाख से अधिक नए डिलीवरी और लाजिस्टिक्स पार्टनर्स को हायर करने की है। इस योजना के तहत अधिक से अधिक गिग पार्टनर्स को जोड़ने के लिए ई-कामर्स कंपनियां एक-दूसरे की तुलना में अधिक वेतन, इंसेंटिव्स, सर्ज बोनस और सीजन समाप्त होने के बाद परमानेंट जाब जैसे आफर दे रही हैं। यह तय है कि बाजार में जब डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक के व्यापार की पटकथा लिखी जा रही होगी, तब खुशियां जिन पहियों पर सरपट दौड़ रही होगी, उसकी कमान ई-कामर्स और क्विक कामर्स के उन अनसंग हीरोज के हाथों में होगी, जिन्हें हम ‘गिग वर्कर्स’ या ‘डिलीवरी पार्टनर्स’ के नाम से जानते हैं। स्पष्ट है कि यह सब कुछ केवल त्योहारी खरीद-फरोख्त नहीं है, बल्कि यह उस बदलते और मजबूत होते भारत की तस्वीर है, जहां आकांक्षाएं, रोजगार और डिजिटल सशक्तीकरण एक ही मंच पर खड़े नजर आते हैं।
छूट न जाए कोई कोना
ग्लोबल टेक्नोलाजी और डिजिटल टैलेंट साल्यूशंस प्रोवाइडर कंपनी एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 की तुलना में इस साल फेस्टिव हायरिंग में 15 से 20 प्रतिशत तक की मजबूत वृद्धि दर्ज की जा रही है। कंपनी के मुताबिक, त्योहारी सीजन के दौरान उपभोक्ता मांग को पूरा करने के लिए कंपनियां अपनी सप्लाई चेन और डिलीवरी नेटवर्क को मजबूत कर रही हैं। सबसे अधिक मांग लास्ट माइल डिलीवरी प्रोफेशनल्स, वेयरहाउसिंग स्टाफ और सप्लाई चेन आपरेशंस से जुड़े गिग वर्कर्स की है। त्योहारी रोजगार के अवसर महानगरों से अधिक टियर-2 और टियर-3 शहरों में देखने को मिल रहे हैं, क्योंकि कंपनियों का फोकस इस वर्ष उन जगहों के कस्टमर्स तक पहुंचना भी है, जहां मांग और आपूर्ति में अब तक काफी गैप रहा है। अब कंपनियों का पूरा जोर दूर दराज के इलाकों में नए डार्क स्टोर्स स्थापित करने और डिलीवरी की व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त करने में लग गया है। आज जनधन खातों, यूपीआइ और स्मार्टफोन की सुलभता ने भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के उपभोक्ताओं को भी आनलाइन शापिंग और ब्रांडेड उत्पादों से जोड़ दिया है, जिसके चलते आज छोटे शहरों का युवा भी महानगरों की तर्ज पर इलेक्ट्रानिक्स, फैशन और होम अप्लायंसेज पर खुलकर खर्च कर रहा है।
डिजिटल भुगतान का बड़ा योगदान
त्योहारी सीजन की सफलता के पीछे भारत की फिनटेक क्रांति और डिजिटल भुगतान प्रणालियों की भी बहुत बड़ी भूमिका है। यूपीआइ और डिजिटल वालेट्स के जरिए भुगतान अब इतना सहज हो गया है कि त्योहारी भीड़-भाड़ के बीच भी बिना किसी रुकावट के करोड़ों का लेनदेन चुटकियों में हो जाता है। इसके अलावा पेमेंट के नए विकल्पों जैसे 'बाय नाउ पे लेटर' और आसान नो-कास्ट ईएमआइ ने मध्यम आयवर्ग के लिए बड़ी खरीदारी करना बेहद आसान बना दिया है। इससे उपभोक्ता बिना अपने मासिक बजट पर अत्यधिक दबाव डाले मनपसंद चीजें खरीद पा रहे हैं, जिससे बाजार में मांग और आपूर्ति दोनों को मजबूत गति मिल रही है।
मिलेगा बोनस और अन्य लाभ
कंपनियां केवल नए वर्कर जोड़ने पर ही जोर नहीं दे रही हैं, बल्कि पुराने और अनुभवी कर्मचारियों को अपने पास रोके रखने के लिए आकर्षक तरीके अपना रही हैं। इसके लिए व्यस्त घंटों में काम करने पर विशेष सर्ज बोनस और टारगेट पूरा करने पर अतिरिक्त वित्तीय लाभ दिए जा रहे हैं।
