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पायल बनवाने के लिए पत्नी दे रही पति को तरह-तरह के लालच, हरियाणा के इस ठेठ लोकगीत में बयां हुआ है रोमांस का देसी अंदाज

Published: Sat, 03 Oct 2026 04:54 PM (IST)

हरियाणा के लोकगीत बलम जी गढ़वा दे मेरी पाजेब में गांव के जीवन और देसी रोमांस को बहुत खूबसूरती से पेश किया गया है।

पति-पत्नी के रोमांस को जाहिर करता है ये हरियाणवी लोकगीत (AI Generated Image)

पति-पत्नी के रोमांस को जाहिर करता है ये हरियाणवी लोकगीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हरियाणा की संस्कृति अपने ठेठ अंदाज के लिए जानी जाती है। यहां के लोकगीतों में भी यहीं अंदाज नजर आता है। ऐसा ही एक हरियाणवी लोकगीत है बलम जी गढ़वा दे मेरी पाजेब…। ये लोकगीत पति-पत्नी के बीच के प्रेम और मनुहार को बहुत ही खूबसूरत तरीके से बयां करता है। 

इसमें एक पत्नी अपने पति से बहुत लाड़ के साथ अपने पैरों की पायल बनवाने की फरमाइश कर रही है, लेकिन जिस तरीके से ये फरमाइश की गई है, वो काफी मजेदार है। आइए जानें हरियाणा के इस मशहूर लोकगीत के बारे में। 

पति को रिझाने की कोशिश

इस लोकगीत में एक महिला का उसके शृंगार के लिए प्रेम और पति से मनुहार को बयां किया गया है। गीत की शुरुआत में पत्नी कहती है बलम जी गढ़वा दे मेरी पाजेब, छमाछमा बाजेगी मेरी पाजेब, यानी पति से अपने पैरों के लिए खूब बजने वाली पायल बनवाने के लिए कह रही है।

इसके आगे वो कहती है बलम जी ये जोडूं दो हाथ, बाजणी पायल दे गढ़वा, पहर मैं तो नाचूंगी, मेरी पाजेब। इसे आगे पत्नी कहती है कि लो मैंने हाथ भी जोड़ लिए हैं अब मेरे लिए पायल बनवा दो, छमाछम बाजेगी मेरी पायल। पति को रिझाने के लिए पत्नी अपने पायल की मधुर छनकार का भी जिक्र करती है। प्रेमी को रिझाने के लिए प्रेमिका की पायल की छनकार भी काफी होती है। इसी बात को यहां पत्नी ने गीत में बयां किया है। 

पत्नी की नाचने की चाह

इस गीत में आगे पत्नी कहती है बलम जी मोहे चढ़ा है चाव, लगे हैं खाली-खाली पांव, पहर मैं तो नाचूंगी मेरी पाजेब। यानी पत्नी कह रही है कि मुझे मेरे खाली पांव देखकर एक नया चाव यानी इच्छा जगी है कि तुम मेरे लिए खूब बजने वाली पायल बनवा दो, जिसे पहनकर मैं नाचूंगी। अपने पति को मनाने के लिए पत्नी यहां पर नृत्य करने की बात भी कर रही है, ताकि उसे नाचता देखने की चाह में ही उसका पति उसके लिए पायल बनवा दे। 

पनघट से पानी भरने का दृश्य

हरियाणा के गांव के जीवन को दिखाते हुए आगे पत्नी कहती है कि पहर के पानी को मैं जाऊं, बलम जी मैं तो मटकती आऊं। गांव में पानी भरने के लिए महिलाओं को कुंए या नदी के किनारे जाना पड़ता था। उसी को बताते हुए पत्नी पति से कह रही है कि पायल दिलवा दोगे, तो उसे पहनकर पानी भरने जाऊंगी और मटक-मटक कर खुशी के साथ पानी भरकर लौटूंगी।

पति की बढ़ेगी शान

पत्नी को अंत में लगता है कि इन बातों से तो ये मान नहीं रहा। अब कोई और तरीका अपनाना पड़ेगा, तो अपनी पायल को वो अपने पति की शान से जोड़कर कहती है, बढ़ेगी मेरे बलम की शान, बाजणी पायल दे गढ़वा, गैल मैं तो नाचूंगी मेरी पाजेब। यानी मेरी छमाछम छनकने वाली पायल से मेरे पति की शान बढ़ेगी, जब मैं उसके साथ चलूंगी और उसके साथ नाचूंगी भी।