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खेसारी-निरहुआ के सॉन्ग्स से अलग हैं ठेठ भोजपुरी गाने! इस देहाती गीत में झलकती है यहां के संगीत की असली मिठास

Published: Thu, 17 Sep 2026 03:16 PM (IST)

बिहार का मशहूर गीत बाबा दिलहे टिकवा में एक पत्नी के मन में पति के लिए प्रेम और समर्पण की भावना को दिखाया गया है।

इस भोजपुरी गीत में छिपा है महिला का प्रेम और समर्पण (AI Generated Image)

इस भोजपुरी गीत में छिपा है महिला का प्रेम और समर्पण (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भोजपुरी संस्कृति सिर्फ खेसारी लाल या निरहुआ के गानों तक सीमित नहीं है। यहां के लोकगीतों में आम जीवन की खूबसूरती, भावनाओं और रिश्तों को बयां करते हैं। इन्हीं लोकगीतों में बाबा दिहले टिकवा गीत भी शामिल है।

ये गीत एक नवविवाहित महिला के दिल की भावना को जाहिर करती है, जो पति के लिए उसके प्रेम और समर्पण को बहुत खूबसूरती से बयां करता है। कहा जाता है कि महिलाएं अपने गहनों से बहुत प्यार करती हैं, लेकिन ये गीत बताता है कि वो गहनों से भी ज्यादा किसी और चीज से भी प्यार करती हैं। आइए जानें क्या कहता है ये गीत। 

क्या है इस गीत की कहानी

इस गीत को एक नवविवाहित महिला का अपनी छोटी ननद से संवाद की तरह दिखाया गया है। शादी में महिला को उसके बाबा यानी पिता ने कई तरह के गहने दिए है, लेकिन उनका मोल उसके पति के सामने कुछ भी नहीं है। वो कहती है कि उसके बाबा ने उसे मांग टीका दिया है, जिसे वो त्याग सकती है, लेकिन वो अपने बलमुआ यानी पति को कैसे छोड़ कर रह सकती है। 

आगे वह कहती है कि उसके बाबा ने उसे नथिया भी दिया है, जिसे वो खुशी-खुशी छोड़ने को तैयार है, लेकिन अपने पति के बिना वह कैसे रहेगी। इसके आगे बताती है कि उसके पिता ने उसे झुमका भी दिया है और वो उसे भी त्याग सकती है, लेकिन अपने पति को नहीं। वो अपने पिता की दी हुई हंसुली भी छोड़ने को तैयार है, लेकिन अपने पति को छोड़कर नहीं रह सकती। पति के बिना रहने के ख्याल से भी उसका जिया डोल रहा है यानी कलेजा कांप रहा है। 

ये गीत बताता है कि महिला अपने सभी गहनों और सुख-सुविधाओं का त्याग करने को राजी है। वो गहने जो उसे उसके मायके से मिले हैं, वो उन्हें खुशी-खुशी त्याग देगी, लेकिन अपने पति के बिना रहने की बात से ही उसका दिल बेचैन हो उठता है। ये एक पत्नी के दिल की भावना और प्रेम को बयां करता है। 

क्यों खास है ये लोकगीत?

किसी भी महिला के लिए उसके मायके से मिले गहने उसे बहुत प्रिय होते हैं। वह उन्हें बहुत संभाल कर रखती है, खासकर जो उसके माता-पिता ने दिए हैं। वो उन्हें उनके प्यार की निशानी मानकर सहेजकर रखती है, लेकिन इस गीत में महिला अपने इन्हीं गहनों को त्यागने की बात कह रही है। 

उसके लिए इन कीमती गहनों का कोई मोल नहीं है, अगर उसका पति उसके साथ नहीं है। ये एक स्त्री के मन में उसके पति के लिए छिपे प्रेम और समर्पण को दिखाता है। 

साथ ही, इस गीत में ननद-भाभी के रिश्ते को भी दिखाया गया है। आमतौर पर जहां ननद-भाभी के झगड़े दिखाए जाते हैं, ये गीत एक अलग तस्वीर पेश करता है। इस गीत में महिला अपनी ननद को अपनी सहेली समझकर अपने दिल की बात कह रही है, जो उनके बीच के प्यार भरे रिश्ते को दिखाता है। 

इस गीत की खासियत उसकी धुन में छिपी है। जितने प्यारे इसके बोल हैं, उतनी ही मीठी इसकी धुन भी है। इस गीत को स्वर कोकिला शारदा सिन्हा और कल्पना पटवारी जैसी गायिकाओं ने भी अपनी आवाज दी है।