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सवाल लड़की का, जवाब लड़के का… ऐसे होता है प्यार का इजहार, ‘गीतों का राजा’ है छत्तीसगढ़ का ददरिया लोकगीत

Published: Mon, 14 Sep 2026 04:10 PM (IST)

अभी तक आपने बहुत से गीतों को सुना होगा पर छत्तीसगढ़ में एक गीत सभी 'गीतों का राजा' कहलाता है।

छत्तीसगढ़ के ददरिया लोकगीत (Image Source: AI Generated)

छत्तीसगढ़ के ददरिया लोकगीत (Image Source: AI Generated)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय संस्कृति में लोकगीतों की भरमार है, इनकी सबसे खास बात यह कि हर एक गीत में अलग कहानी सुनने को मिलती है। कभी कोई बहु अपने मायके के लिए गीत गाती है तो कभी कोई उत्सव गीतों के माध्यम से अपने महत्व को समझाता दिखता है। छत्तीसगढ़ में भी ऐसे अनेकों लोकगीत हैं, पर आज हम यहां गीतों का राजा कहे जाने वाले ‘ददरिया’ की बात करेंगे। 

छत्तीसगढ़ के ददरिया लोकगीत 

ददरिया छत्तीसगढ़ का एक प्रेम लोकगीत है, जिसमें सिर्फ गाए जाने वाले बोल शामिल न होकर प्रेमियों के सवाल-जवाब भी होते हैं। एक यही खूबी इन्हें दूसरे गीतों से एकदम अलग और रोचक बनाती है। बताते चलें कि इनमें शृंगार रस की प्रधानता है।

वहीं, ददरिया शब्द का मतलब समझें तो यह संस्कृत के द्विद्वारी से लिया गया है, जिसमें द्वि का मतलब दो और द्वारी का मतलब दरवाजा या द्वार है। इस तरह ददरिया लोकगीत का मतलब है एक ऐसा गीत जिसे दोनों तरफ से यानी जोड़े में गाया जाए। 

प्रेमियों के सवालों के जवाब हैं ददरिया 

जैसा कि हमने बताया कि इसे सवाल-जवाब की शैली में गाया जाता है, जिसमें कभी महिला अपने सवालों का जवाब अपने प्रेमी से चाहती है तो कभी पुरुष अपनी प्रेमिका से जवाब मांगना चाहता है। इन्हें चेन शृंखला में गाने की परंपरा है, जिसकी हर पंक्ति के अंतिम शब्द को पकड़कर अगली पंक्ति की शुरुआत होती है। 

साल्हो शैली में गाते हैं ये गीत 

जब इन गीतों को जोड़ियों में गाते हैं, तो ताल और सवाल-जवाब के आदान-प्रदान से ददरिया की एक शैली का जन्म होता है, जिसे ‘साल्हो’ कहा जाता है। वहीं, सबसे रोचक बात यह कि इसमें लय के लिए बड़े-बड़े वाद्य यंत्रों की जगह ताली और चुटकियों की मदद ली जाती है। 

सबसे पहले दो समूह बंट जाते हैं, इसमें एक समूह केवल सवाल करता है और दूसरा समूह सिर्फ उसके जवाब देता है। कभी-कभी आशु कवियों की तरह इन पंक्तियों की रचना तुरंत कर दी जाती है। वहीं, कई बार गाते हुए तानों की ऐसी बाढ़ आ जाती है कि कुछ पूछो मत। इसे उदाहरण से समझें: 

“नदिया के तीर तीर हरियर बांस वो, बिना चिन्हे पहिचाने वो नोनी तैं काबर हांसे का वो मया देदे”, इसमें लड़का अपनी प्रेमिका से सवाल करता है कि नदी के किनारे हरियाली है, पर लड़की बिना जान-पहचान के तुम मुझे देखकर क्यों मुस्का रही हो, क्या तुम्हें मुझसे प्रेम है? 

“सावन म सुरुज लुकाके झांके ग तोर झुलपाहा चूंदी जहुरिया मोर मन भाथे का ग मया लेले”, इसके बाद लड़की इसका जवाब देती है कि जैसे सावन के महीने में लुका-छुपी खेलता मनमोहक लगता है, वैसे ही तुम्हारे माथे के बाल बेहद सुंदर लग रहे हैं, जो मुझे बेहद पसंद आ गए हैं।  

धान की रोपाई और महुआ बीनना है सबसे खास समय 

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में अक्सर लोग धान की रोपाई और महुआ बीनते समय ददरिया गाते दिखते हैं। इसके अलावा, कहीं पगडंडियों की राह चलते हुए और रोजमर्रा के काम करते हुए भी महिलाओं और पुरुषों द्वारा इसे गाए जाने की परंपरा है। इसे छत्तीसगढ़ में खेत में काम करने वाले श्रमिकों का गीत भी कहते हैं। तभी तो इसकी शैली भी इतनी आसान होती है कि उसके लिए कोई म्यूजिक क्लास लेने की जरूरत नहीं।