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भांगड़ा और गिद्दा से बिल्कुल अलग है झूमर! जानिए पंजाब के इस लोक नृत्य की कहानी

Published: Thu, 10 Sep 2026 03:06 PM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 02:22 PM (IST)

झूमर पंजाब का एक अनूठा लोक नृत्य है, जो भांगड़ा और गिद्दा से काफी अलग है। इसकी शुरुआत अविभाजित पंजाब ...और पढ़ें

कैसे शुरू हुआ पंजाब का लोक नृत्य झूमर? (AI Generated Image)

कैसे शुरू हुआ पंजाब का लोक नृत्य झूमर? (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बात जब भी पंजाब के डांस की आती है, तो दिमाग में सबसे पहले भांगड़ा और गिद्दा का ही नाम आता है। लेकिन कम लोग ही यह जानते हैं कि पंजाब की लोक संस्कृति से जुड़ा एक और ऐसे नृत्य है, जो अपने आप में बेहद खास है। 

जी हां, हम बात कर रहे हैं, पंजाब के झूमर नृत्य की, जो पंजाबी लोकगीतों और ढोल पर किया जाने वाला एक नृत्य है और पंजाब की संस्कृति का अहम हिस्सा भी है। हालांकि, इस नृत्य की शुरुआत कैसे हुई ये और भी दिलचस्प है। आइए जानें कैसे शुरू हुआ पंजाब का झूमर और इसकी खासियत क्या है।  

कैसे हुई झूमर की शुरुआत? 

झूमर धीमी ताल पर किया जाने वाला नृत्य है। झूमर झूमने शब्द से मिला है, जिसका मतबल है मस्ती से लहराना या झूलना। इस नृत्य में धीमी ताल में लोग झूमते हुए डांस करते हैं। इसलिए इसे झूमर कहा जाता है। इस डांस की शुरुआत अविभाजित पंजाब के  सैंडल बार क्षेत्र में हुई थी, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। 

ऐतिहासिक रूप से इस नृत्य की शुरुआत बलूच और मवेशी पालने वाली जनजातियों ने की थी। ये चरवाहे दूर-दराज के जंगलों और मैदानों से मवेशी चराकर लौटते थे, तो शाम के समय एक साथ इकट्ठा होकर ढोल की थाप पर डांस किया करते। इसी से झूमर डांस की शुरुआत हुई। खेतों में अच्छी फसल उगने पर भी झूमर डांस किया जाने लगा। 

क्यों खास है झूमर डांस? 

झूमर हमेशा धीमी ताल पर किया जाता है। डांस की शुरुआत धीमी होती है, धीरे-धीरे चाल हल्की तेज होती है। इस नृत्य में नर्तक गोल घेरे में घूमते हुए डांस करते हैं और गोले के बीच में ढोलकिया होता है, जो ढोल बजाता है। 

इस नृत्य को मुख्य रूप से पुरुष ही करते हैं। वे कुर्ता, धोती, रंगीन कट-स्लीव जैकेट और सिर पर कलगीदार पगड़ी पहनकर ये डांस करते हैं। 

कैसे किया जाता है ये डांस?

झूमर करने का एक पैटर्न होता है। इसमें हाथों, पैरों और सिर को एक समान लय में हिलाते हुए डांस किया जाता है। ढोलिया धीमी आवाज पर ढोल बजाना शुरू करता है, जिसे झूमर ताल कहा जाता है। नर्तक अपने दोनों हाथ उठाते हैं और पैरों को लय में आगे-पीछे करते हुए डांस करते हैं। इस नृत्य में पंजाबी लोकगीत और बोलियां गाई जाती हैं, जो ढोलक की थाप के साथ और भी मजेदार हो जाती हैं। 


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