आखिर क्यों कहा जाता है 'दिल्ली अभी दूर है'? तुगलक वंश के एक सुल्तान से जुड़ी है इस कहावत की कहानी
यह लेख 'दिल्ली अभी दूर है' कहावत 14वीं शताब्दी के तुगलक वंश से जुड़ी है।

कैसे शुरू हुई 'दिल्ली अभी दूर है' कहावत? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आपने कई बार लोगों को दिल्ली अभी दूर है कहावत कहते हुए सुना होगा। इस कहावत का सीधा मतलब होता है कि अभी मंजिल या लक्ष्य दूर है। उसे हासिल करने में समय लगेगा, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ये कहावत आई कहां से है?
दरअसल माना जाता है कि इस कहावत के पीछे की कहानी एक सुल्तान से जुड़ी है, जो धीरे-धीरे लोगों के बोलचाल का हिस्सा बन गई। आइए जानें क्या है दिल्ली अभी दूर है के पीछे की कहावत।
क्या है इस कहावत के पीछे की कहानी?
इस कहावत के पीछे की कहानी 14वीं शताब्दी से जुड़ी है। उस समय दिल्ली सल्तनत में तुगलक वंश का शासन था। इस कहानी के तीन मुख्य किरदार हैं, सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक, उनके दरबारी कवि अमीर खुसरो और सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया।
माना जाता है कि सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक और सूफी संत हजरत निजामुद्दीन औलिया के बीच के रिश्ते ज्यादा अच्छे नहीं थे। सुल्तान को लगता था कि संत की लोकप्रियता काफी ज्यादा है और उनके दरबार में जुटने वाली भीड़ सुल्तान के खिलाफ साजिश रच सकते हैं।
दूसरी ओर, अमीर खुसरो गयासुद्दीन तुगलक के दरबार से सबसे प्रिय कवि थे, लेकिन वे हजरत निजामुद्दीन औलिया के शिष्य भी थे। एक बार सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक बंगाल के एक अभियान से वापस दिल्ली लौट रहे थे। रास्ते में ही उन्होंने अमीर खुसरो के जरिए हजरत निजामुद्दीन को एक संदेश भिजवाया। सुल्तान ने चेतावनी दी थी कि जब तक वो दिल्ली पहुंचें, तब तक औलिया साहब दिल्ली छोड़कर कहीं और चले जाएं, वरना इसका नतीजा काफी बुरा होगा।
संत निजामुद्दीन औलिया ने भिजवाया जवाब
जब अमीर खुसरो को अपने सुल्तान की इस धमकी का पता चला, तो वे बेहद दुखी हुए। वो भागते हुए अपने गुरु हजरत निजामुद्दीन औलिया के पास पहुंचे और उन्हें सुल्तान के संदेश के बारे में बताया। औलिया साहब पर सुल्तान की धमकी का कोई असर नहीं हुआ। उन्होंने बहुत ही शांत तरीके से फारसी में एक वाक्य कहा, जो इतिहास के पन्नों में अमर हो गया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा हनोज दिल्ली दूसर अस्त यानी दिल्ली अभी बहुत दूर है।
दिल्ली पहुंचने से पहले सुल्तान की मौत
सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक जब दिल्ली में प्रवेश करने से पहले आराम करने के लिए लकड़ी के बने एक पंडाल में रुके। एक हादसे के कारण लकड़ी का ये पंडाल गिर गया और उसमें सुल्तान और उनके कई दरबारियों की दबकर मौत हो गई। सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक कभी दिल्ली पहुंच ही नहीं पाए।
माना जाता है कि तभी से ये कहावत प्रचलित हुई और आम बोलचाल का हिस्सा बनी। जब भी कोई काम पूरा होने से पहले अटक जाए या उसमें काफी समय लगने लगे, तो दिल्ली अभी दूर है कहावत का इस्तेमाल किया जाता है।
