विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

पत्थरों की कमी के चलते कम करनी पड़ी थी व्हाइट हाउस की एक मंजिल, ऐसे बना था अमेरिकी राष्ट्रपति का घर

Published: Fri, 16 Oct 2026 01:53 PM (IST)

अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास व्हाइट हाउस का निर्माण पत्थरों की कमी के कारण दो मंजिला ही हो पाया था।

व्हाइट हाउस बनने की कहानी है बेहद दिलचस्प (Image Source: AI Generated)

व्हाइट हाउस बनने की कहानी है बेहद दिलचस्प (Image Source: AI Generated)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। जियो पॉलिटिक्स का जब कभी भी जिक्र आता है, तो उसमें वॉशिंगटन और व्हाइट हाउस ये दोनों नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं। फिर हमने जीके में भी पढ़ा है कि अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन और व्हाइट हाउस यहां के राष्ट्रपति का घर है, पर क्या आप इसके बनने का इतिहास जानते हैं? 

क्या आपको पता है कि अमेरिका को उसकी राजधानी और व्हाइट हाउस कैसे मिला? चलिए इसके इतिहास पर विस्तार से बात करते हैं। 

अमेरिका को कैसे मिली उसकी राजधानी? 

अमेरिका को जब आजादी मिली तो उसके सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि राजधानी किसे बनाया जाए। शुरू-शुरू में संघीय सरकार ने न्यूयॉर्क और फिर फिलाडेल्फिया को राजधानी बनाया। इसके बावजूद एक बार फिर नई राजधानी पर विचार किया जाने लगा। इसके लिए 16 जुलाई 1790 में अमेरिका की कांग्रेस में एक रेजिडेंस एक्ट पास किया गया। इस एक्ट में तय हुआ कि अमेरिका में पोटोमैक नदी के किनारे कैपिटल बनाई जाएगी। 

इसके बाद अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने एक क्षेत्र को चुना, जहां कैपिटल बनाने और आवास की जगह के लिए भी मंजूरी मिली। दरअसल, राष्ट्रपति की यह खास इच्छा थी कि जिस जगह को राजधानी के रूप में चुना जाए, उसमें राष्ट्रपति का आवास स्थान भी शामिल हो। बता दें कि फ्रांसीसी इंजीनियर और शहर नियोजक पियरे चार्ल्स ल ‘एनफां’ ने शहर की योजना तैयार की थी। 

डिजाइन चुनने के लिए आयोजित की गई प्रतियोगिता 

राष्ट्रपति रेजिडेंस का डिजाइन कैसा हो, इसके लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें जीतने वाले के लिए 500 डॉलर का इनाम भी रखा गया। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें अमेरिका के विदेश मंत्री थॉमस जेफरसन ने भी अपनी पहचान छिपाकर हिस्सा लिया था क्योंकि उनकी वास्तुकला में बहुत गहरी रुचि थी। पर इसमें विदेश मंत्री की नहीं, बल्कि आयरलैंड के वास्तुकार जेम्स हॉबन की डिजाइन को चुना गया था। 

पत्थरों की कमी से बन पाई 2 ही मंजिलें 

साल 1792 में जेम्स हॉबन ने जो नक्शा पेश किया, उसमें 3 मंजिल बनाए जाने का जिक्र किया गया था, लेकिन अगले साल इस नक्शे में संशोधन करके केवल 2 ही मंजिले बनाए जाने का निश्चय किया गया। इसकी सबसे बड़ी वजह थी कैपिटल और आवास का काम एक ही समय पर चलना और इसके चलते निर्माण में उपयोग होने वाले पत्थरों की कमी। 

फिर जो समय सीमा दी गई थी, उसमें पत्थरों की आपूर्ति कर पाना बेहद मुश्किल भी था, ऐसे में नक्शे में बदलाव करने का विकल्प ही सबसे आसान था। 

क्यों रखा गया व्हाइट हाउस नाम? 

राष्ट्रपति आवास की बाहरी दीवारों को बलुआ पत्थरों से बनाया गया था, जिनमें पानी सोखने की अच्छी क्षमता थी। ऐसे में डर था कि कहीं सर्दियों में दीवारों में नमी न बढ़ने लगे। इससे बचने के लिए पत्थरों पर सफेद चूने की पुताई की गई और इस तरह यह इमारत व्हाइट हाउस कहलाई। 

यह भी पढ़ें- बंगाली दुर्गा पूजा पंडालों में इस्तेमाल होने वाला शोलापीठ क्या है? भगवान शंकर की जटा से जन्मे पौधे से है नाता

यह भी पढ़ें- ऑर्केस्ट्रा डांस नहीं, ये लोक नृत्य है बिहार की असली पहचान! सिर पर जलता हुआ मटका लेकर 'झिझिया' करती हैं महिलाएं