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'चांद को जैसे देखता चकोर...' सिर्फ गाना नहीं हकीकत है; पढ़ें चंदा के इस दीवाने के एकतरफा प्रेम की कहानी

Published: Mon, 29 Jun 2026 06:12 PM (GMT+05:30)Updated: Tue, 30 Jun 2026 10:14 AM (GMT+05:30)

फिल्मी गानों में आपने चांद और चकोर का खूब जिक्र सुनने को मिलता है। चांद के लिए चकोर की दीवानगी की कहानी भी काफी दिलचस्प है।

बहुत दिलचस्प है चांद और चकोर की कहानी (AI Generated Image)

बहुत दिलचस्प है चांद और चकोर की कहानी (AI Generated Image)

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संक्षेप में पढ़ें

लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हिंदी फिल्मी गानों में आपने चांद और चकोर का जिक्र सुना होगा। चकोर को हमेशा चांद के दीवाने के रूप में दिखाया जाता है, लेकिन ये प्यार एकतरफा है। इसलिए गानों में एकतरफा प्यार या प्रेमी का समर्पण दिखाने के लिए चकोर का जिक्र किया जाता है। 

अब सवाल आता है कि इतने गानों में जिस चकोर का नाम लिया जा रहा है वो है कौन? दरअसल, यहां किसी इंसान की बात नहीं हो रही है। चकोर एक पक्षी है, जिसे चांद का दीवाना माना जाता है। आइए जानें क्यों चकोर को चांद का प्रेमी कहा जाता है और इसकी कहानी क्या है। 

चकोर और चांद का नाता

आपको बता दें कि चकोर तीतर की प्रजाति का एक पहाड़ी पक्षी है, जो यूरोप और एशिया के पथरीले और पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। लोककथाओं में इस पक्षी से जुड़ी एक मान्यता सदियों से चली आ रही है। कहा जाता है कि चकोर पक्षी चांद से इतना प्रेम करता है कि वह पूरी रात बिना पलक झपकाए एकटक चांद को निहारता रहता है और इसकी रोशनी पीकर जिंदा रहता है। 

विरह में अंगारे खा लेता है चकोर

उसे चांद की रोशनी इतनी पसंद है कि वह रातभर चांद की चांदनी खोया रहता है। इसलिए जब अमावस्या को चांद नजर नहीं आता, तो चकोर विरह से बेचैन हो उठता है और तड़पता रहता है। ऐसा भी कहा जाता है कि चांद नजर न आने पर चकोर जमीन पर पड़े अंगारे चांद के टुकड़े समझकर खा लेता है।चांद के लिए चकोर की दीवानगी की इन्हीं मान्यताओं की वजह से चकोर को गानों और कविताओं में प्रेम की मिसाल के रूप में लिखा जाता है। 

क्या सचमुच चांद का दीवाना है चकोर? 

वैज्ञानिक रूप से चकोर का चांद से कोई नाता नहीं है। यह एक नॉक्टरनल स्वभाव का पक्षी है, जो रात को ज्यादा एक्टिव रहता है। साथ ही, ये चांद की रोशनी पीकर नहीं, बल्कि कीड़े-मकौड़े खाकर जिंदा रहता है। पूर्णिमा की रात या जब चांद पूरा चमक रहा होता है, तो चकोर अक्सर ऊंचाई पर बैठकर आवाजें निकालता है। इसके इसी स्वभाव को कवियों और गीतकारों ने चांद के लिए प्रेम के रूप में दिखाया है।  

हिंदी गानों में चकोर का जिक्र

बॉलीवुड की कई फिल्मों में चकोर का जिक्र सुनने में मिलता है। सलमान-ऐश्वर्या की फिल्म हम दिल दे चुके सनम में आंखों की गुस्ताखियां में लाइन है- चांद को जैसा देखता चकोर हैं, ऐसे ही रणबीर-आलिया की फिल्म ब्रह्मास्त्र में गाना है चंदा भी दीवाना है तेरा, जलती हैं तुझसे सारी चकोरियां, ऐसे ही कई गानों में चांद और चकोर का जिक्र है, जो प्रेम और समर्पण को दिखाता है।

सिर्फ फिल्मी गानों में ही नहीं, बल्कि भक्ति रस की कई कविताओं में भी भगवान के लिए भक्त के प्रेम को दिखाने के लिए चकोर का इस्तेमाल किया गया है। इन्हीं मान्यताओं की वजह से चकोर एक-तरफा प्यार या गहरी मोहब्बत का प्रतीक माना जाता है।