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शाही दरबारों की शान था फ्रांस का ये खास डांस, दिलचस्प है यूरोप के रईसों की पहली पसंद बनने की कहानी

Published: Tue, 15 Sep 2026 08:35 AM (IST)

कद्रिल डांस, जिसकी शुरुआत 18वीं सदी के अंत में फ्रांस में हुई, यूरोप के उच्च वर्ग और शाही दरबारों की शान बन गया।

यूरोप के बॉल रूम्स की शान था कद्रिल डांस (AI Generated Image)

यूरोप के बॉल रूम्स की शान था कद्रिल डांस (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। यूरोप के इतिहास में डांस का काफी पुराना इतिहास रहा है और सांस्कृति महत्व भी। ऐसे कई नृत्य रहे हैं, जिन्होंने वहां के कोर्टली कल्चर और सामाजिक जीवन को एक नई पहचान दी। इन्हीं में कद्रिल डांस भी शामिल है, जो यूरोप में काफी मशहूर है और इसका इतिहास भी काफी पुराना है। 

18वीं सदी के अंत और 19वीं सदी की शुरुआत में कद्रिल डांस विकसित हुआ। मुख्य रूप से इसकी शुरुआत फ्रांस में हुई और धीरे-धीरे ये डांस यूरोप के उच्च वर्ग और शहरी समाज की पहली पसंद बन गया। आइए जानें कि कद्रिल डांस कैसे किया जाता था और यूरोप के इतिहास में इसका सफर कैसा रहा। 

चार के समूह का अनोखा तालमेल

हर डांस का अपना एक स्टाइल और पैटर्न होता है। कद्रिल डांस की सबसे बड़ी खासियत इसकी संरचना थी। इस डांस में आमतौर पर चार जोड़े हिस्सा लेते थे। सभी नर्तक और नर्तकियां एक स्क्वायर के आकार में खड़े होते थे और इसके बाद संगीत की अलग-अलग धुनों पर बेहद सटीक कदमों के साथ खास आकृतियां बनाई जाती थीं। 

क्या है कद्रिल का मतलब? 

इस डांस का नाम कद्रिल भी इसी विशेषता के कारण निकला है। दरअसल, फ्रेंच में क्वाद्रि का मतलब  चार का समूह होता है और कद्रिल इसी शब्द से निकला है। डांस के दौरान अलग-अलग स्टेप्स में जोड़े एक-दूसरे की तरफ आगे बढ़ते, घूमते और फिर बड़ी ही खूबसूरती के साथ अपनी पुरानी जगह पर लौट आते थे। 

शाही दरबारों से बॉलरूम तक का सफर

19वीं सदी की शुरुआत में फ्रांस के साथ-साथ इंग्लैंड, ऑस्ट्रिया और यूरोप के दूसरे देशों में भी कद्रिल डांस की दीवानगी बढ़ गई। शाही दरबारों, बड़े सामाजिक कार्यक्रमों और डांस पार्टियों में इसे मनोरंजन का सबसे बेहतरीन तरीका माना जाता था। 

उस समय में इस डांस के लिए ओपेरा और म्यूजिक की खास धुनों का इस्तेमाल किया जाता था। हालांकि, समय के साथ यूरोप के बॉलरूम डांस के इतिहास में वॉल्ट्ज और पोल्का जैसे डांस भी काफी मशहूर हुए, जिन्हें जोड़ों में किया जाता था, लेकिन कद्रिल की हमेशा एक खास जगह बनी रही। ये डांस 19वीं सदी में यूरोप के सामाजिक जीवन का अहम हिस्सा था।