भोजपुरी का वो गीत, जिसमें छिपा है तवायफों का दर्द; रंगून गए प्रेमियों के विरह की कहता है कहानी
कचौड़ी गली एक भोजपुरी गाना है, जिसमें 200 साल पहले हुए इंडो-बर्मी युद्ध की कहानी छिपी है।

कचौड़ी गली गाने में बयां होता है विरह का दर्द (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कुछ समय पहले कोक स्टूडियो भारत का रिलीज हुआ गाना कचौड़ी गली काफी हिट हुआ था। रेखा भारद्वाज और उत्पल उदित की आवाज में गाया गया ये गाना असल में 200 साल पुरानी एक घटना से जुड़ा है।
दरअसल, इस लोकगीत में अंग्रेजो के अत्याचार और प्रेमिका के दर्द और गुस्से को बयां करता है। आइए जानें कचौड़ी गली गाने की ये कहानी।
क्या है इस गाने की कहानी?
इस गाने की कहानी पहले एंग्लो-बर्मी युद्ध से जुड़ी है। ब्रिटिश राज्य और बर्मा के शासक के बीच ये युद्ध 1824-26 के बीच हुआ था। इस युद्ध में अंग्रेजी सरकार को सिपाहियों की जरूरत थी। इसलिए उन्होंने जबरदस्ती बनारस, मिर्जापुर और बिहार के गांव-देहात से पुरुषों के सेना में भर्ती करके रंगून यानी आज के म्यांमार भेज दिया। इस युद्ध में भेजे गए कई भारतीय पुरुष कभी नहीं लौटे और उनकी पत्नियां इंतजार करती रह गईं।
महिलाओं के दर्द को बयां करता गाना
कचौड़ी गली गाना एक ऐसी ही महिला की कहानी कहता है, जिसका पति अचानक उससे छीनकर रंगून भेज दिया गया है। इस गीत में महिला के अकेलेपन, खाली घर और उसके अंदर उठते गुस्से को बहुत खूबसूरती से बयां किया गया है।
इस गाने की लाइनें सेजिया पर लोटे काला नाग, पत्नी के उसी दर्द को जाहिर करता है। उसके पति के जाने के बाद उसका घर कितना खाली हो गया है, लेकिन ये अकेलापन सिर्फ दर्द की तरह ही नहीं, गुस्से के रूप में भी बाहर आता है, जब महिला कहती है कि 'हथवा में होती जो हमरी कटरिया, बहा देत गोरवन के खून हो…'। इस पंक्ति में महिला के गुस्से का अंदाजा लगता है कि वो अंग्रेजों का खून करने को भी तैयार है, क्योंकि वो जबरदस्ती उसके पति को ले गए।
पत्नी ही नहीं, तवायफों का भी दर्द
ऐसा भी कहा जाता है कि इस गाने में तवायफों का दर्द भी छिपा है। जब भारत से जबरदस्ती पुरुषों को रंगून भेजा गया, तो कई तवायफों के प्रेमी भी चले गए। इसके खिलाफ अपना गुस्सा और दर्द बयां करने के लिए ये गाना बना।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में तवायफों ने भी बड़ी भूमिका निभाई थी। उन्होंने अपने पैसों को स्वतंत्रता सेनानियों के लिए लगाए, उन्हें अपने कोठों पर जगह दी। गीतों के जरिए भी उन्होंने और अंग्रेजी हुकूते के खिलाफ बगावत की आवाज उठाई।
