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    अपने आकार से ज्यादा है दुनिया के सबसे दुर्लभ रत्न का वजन, खासियत जानकर आप भी कहेंगे 'वाह'

    Updated: Sun, 01 Dec 2024 01:15 PM (IST)

    क्यावथाइट (Kyawthuite) दुनिया के सबसे दुर्लभ रत्नों में से एक है और इसका नाम यंगून यूनिवर्सिटी के एक पूर्व वैज्ञानिक डॉ. क्यावथू के नाम पर रखा गया है। दरअसल उन्हें ही इस रत्न की खोज करने का श्रेय दिया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस अनोखे रत्न (Rarest Gem) का वजन इसके आकार से ज्यादा है और अब तक पृथ्वी पर इसका सिर्फ एक ही टुकड़ा मिला है।

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    World's Rarest Gem: क्या आपने देखा है दुनिया का सबसे दुर्लभ रत्न? (Image Source: Freepik)

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। World's Rarest Gem: धरती के अंदर छिपे अनमोल रत्नों की दुनिया बेहद रहस्यमयी है। इंटरनेशनल मिनरलॉजिकल एसोसिएशन के अनुसार, अब तक दुनिया भर में लगभग 6 हजार से ज्यादा मिनरल्स की खोज हो चुकी है। इनमें से कई रत्न अपनी खूबसूरती और दुर्लभता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसी भी कोई चीज है जो इन सभी से एकदम अलग है? जी हां, आज हम आपको एक ऐसे रत्न (Kyawthuite) के बारे में बताएंगे जिसका धरती पर सिर्फ एक ही टुकड़ा बचा है और सबसे हैरान कर देने वाली बात यह है कि इसका वजन इसके आकार से कहीं ज्यादा है। आइए जानें।

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    अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त दुनिया का सबसे दुर्लभ रत्न

    क्यावथाइट नामक यह दुर्लभ रत्न क्रिस्टल के रूप में पाया जाता है। इसकी दुर्लभता इस बात से समझी जा सकती है कि पूरी दुनिया में इसका सिर्फ एक टुकड़ा ही खोजा गया है। इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय खनिज संघ ने भी इसकी मौजूदगी को मान्यता दी है। हालांकि, वैज्ञानिकों ने इसी तरह के कई सिंथेटिक कंपाउंड बना लिए हैं, लेकिन असली क्यावथाइट की तरह कोई भी नहीं है।

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    क्या है इस रत्न की खासियत?

    क्यावथाइट, दुनिया का सबसे दुर्लभ रत्न है जिसका एकमात्र नमूना लॉस एंजिलिस के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में सुरक्षित रखा गया है। यह एक पारदर्शी नारंगी रंग का क्रिस्टल है जिसमें हल्की-सी लालिमा भी देखी जा सकती है। इसका वजन 1.61 कैरेट यानी लगभग 0.3 ग्राम है। क्यावथाइट का रासायनिक सूत्र Bi3+Sb5+O4 है, जिसमें Bi बिस्मथ और Sb एंटीमनी (सुरमा) के प्रतीक हैं। ये दोनों तत्व पृथ्वी पर दुर्लभ माने जाते हैं, लेकिन बिस्मथ सोने और एंटीमनी चांदी से ज्यादा प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।

    अगर ये तत्व इतनी बड़ी मात्रा में उपलब्ध हैं तो फिर क्यावथाइट इतना दुर्लभ क्यों है? इसका उत्तर इस क्रिस्टल के रासायनिक सूत्र में ही छिपा है। क्यावथाइट में मौजूद ऑक्सीजन इस क्रिस्टल को बेहद दुर्लभ बनाती है। बिस्मथ और एंटीमनी के साथ ऑक्सीजन का इस तरह से संयुक्त होना एक अत्यंत दुर्लभ घटना है, जो क्यावथाइट को पृथ्वी पर सबसे दुर्लभ रत्नों में से एक बनाती है।

    डॉ. क्यावथू की खोज

    क्यावथाइट नाम का यह अद्भुत रत्न यंगून विश्वविद्यालय के एक पूर्व वैज्ञानिक, डॉक्टर क्यावथू द्वारा खोजा गया था। इसीलिए इस रत्न का नाम उनके नाम पर रखा गया। साल 2015 में, अंतरराष्ट्रीय खनिज संघ ने इस रत्न को आधिकारिक मान्यता दी और साल 2017 में इसके बारे में विस्तृत वैज्ञानिक जानकारी सामने आई। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह रत्न करोड़ों साल पहले तब बना होगा जब भारत महाद्वीप एशिया से टकराया था। इस तरह के अद्वितीय और दुर्लभ रत्न ज्यादातर म्यांमार में ही पाए जाते हैं, जो इसे और भी खास बनाता है।

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