क्वाइट क्विटिंग हुआ पुराना, अब ट्रेंड में है 'Rage Applying'; आखिर ऑफिस से परेशान लोग क्यों उठा रहे हैं यह कदम?
कॉर्पोरेट जगत में अब 'रेज अप्लाइंग' नया ट्रेंड है, जिसमें कर्मचारी अपनी नौकरी, बॉस या माहौल से परेशान होकर एक ...और पढ़ें

क्या है रेज अप्लाइंग का नया ट्रेंड? (AI Generated Image)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कॉर्पोरेट वर्ल्ड से जुड़े शब्द क्वाइट क्विटिंग या क्वाइट फायरिंग जैसे शब्द आपने सुना होगा, लेकिन अब एक नया शब्द ट्रेंड में हैं, जिसे रेज अप्लाइंग कहा जाता है।
पहली बार में ये सुनने में किसी गुस्से भरे कदम जैसा लगता है, लेकिन असल में इसके पीछे कुछ और वजह है। आइए जानें रेज अप्लाइंग क्या होता है और क्यों लोग ये कदम उठाते हैं।
क्या होता है रेज अप्लाइंग?
साधारण शब्दों में कहें, तो रेज अप्लाइंग का मतलब है अपनी नौकरी, बॉस या ऑफिस के माहौल से परेशान आकर एक बार में कई जगह नई नौकरियों के लिए अप्लाई कर देना। जब किसी कर्मचारी को लगता है कि ऑफिस में उसकी बात सुनी नहीं जा रही है या उसके काम की कोई कद्र नहीं है, तो वह अपनी हताश होकर वहां से निकलने की कोशिश करने लगता है और एक साथ कई जगहों पर नौकरी के लिए आवेदन कर देता है।
लोग क्यों करते हैं रेज अप्लाइंग?
रेज अप्लाइंग के पीछे कर्मचारी का मानसिक तनाव और काम से जुड़ा असंतोष छिपा होता है। जब ऑफिस में बॉस का रवैया कॉर्पोरेटिव नहीं होता, बात-बात डांट मिले या माइक्रोमैनेजमेंट बढ़ जाए, तो कर्मचारी घुटन महसूस करने लगता है। ये तनाव और हताशा उसे नई नौकरी खोजने पर महसूस कर देते हैं।
इसके अलावा, अपनी क्षमता से ज्यादा काम करना और बदले में कोई सराहन न मिलना बर्नआउट का कारण बनता है। जब कर्मचारी मानसिक रूप से बिल्कुल थक जाता है और ऑफिस में सुधार की कोई उम्मीद नहीं नजर आती, तो गुस्से में वह हर जगह अपना रेज्यूमे बांटना शुरू कर देता है।
इसके अलावा, कम वेतन भी एक कारण है। कड़ी मेहनत के बाद भी सैलरी न मिलना या अप्रेज के समय उम्मीद के मुताबिक सैलरी या प्रमोशन न मिलना कर्मचारी को निराश करता है। ऐसे में रेज अप्लाइंग के जरिए वह अपनी काबिलियत की सही वैल्यू पाने की कोशिश करता है।
एक वजह करियर में ग्रोथ की कमी महसूस होना भी है। अगर किसी कंपनी में ऐसा लगे कि आगे बढ़ने के रास्ते बंद हो चुके हैं और प्रमोशन का मौका नहीं है, तो लोग गुस्से में आकर नई नौकरी तलाशने लगते हैं।
क्या रेज अप्लाइंग सही है?
इसके फायदे और नुकसान दोनों हो सकते हैं। कई बार गुस्से में लिया गया ये फैसला एक व्यक्ति को एक बेहतर पैकेज, कंपनी और वर्क-लाइफ बैलेंस वाली नौकरी दिला सकता है। साथ ही, कई जगह एप्लिकेशन भेजने से कर्मचारी को उम्मीद होती है कि वह जल्द ही वर्तमान की खराब स्थिति से बाहर निकल जाएगा।
वहीं, इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, जैसे- गुस्से में लोग कई बार बिना कंपनी की प्रोफाइल या रोल ठीक से पढ़े बिना अप्लाई कर देते हैं और एक बुरी नौकरी छोड़कर दूसरी खराब नौकरी में फंस जाते हैं। इसी तरह बिना तैयारी के कई जगह अप्लाई करना रिजेक्शन की संख्या भी बढ़ जाती है, जो आत्मविश्वास को कम कर सकता है।
