सिर्फ लावणी नहीं, पोवाडा भी है महाराष्ट्र की शान; रोंगटे खड़े कर देते हैं मराठा साम्राज्य से जुड़े ये लोकगीत
महाराष्ट्र का लोकगायन पोवाडा में मराठा वीरों की कहानी सुनाई जाती है। ये लोकगीत महाराष्ट्र की संस्कृति का हिस्सा हैं।

महाराष्ट्र की लोक संस्कृति का हिस्सा है पोवाडा (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। महाराष्ट्र की लोक संस्कृति में सिर्फ लावणी गीत नहीं, बल्कि पोवाडा भी काफी खास जगह रखता है। ये लोकगीत सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं गाए जाते। इन गीतों में मराठा साम्राज्य के साहस, वीरता और बलिदान की कहानी सुनाई जाती है।
पोवाडा गाने वाले गायक हाथ में डफली लेकर मराठा वीरों की कहानी जब ऊंची आवाज में सुनाना शुरू करते हैं, तो सुनने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं और ऐसा लगता है जैसे वो भी उस कहानी के अंदर पहुंच गए हैं। वीरता की कहानी कहते इन लोकगीतों का इतिहास काफी दिलचस्प है। आइए जानें कैसे हुए पोवाडा गाने की शुरुआत।
क्या है पोवाडा का इतिहास?
पोवाडा लोकगीतों का इतिहास 17वीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि सबसे पहली बार पोवाडा गाने की शुरुआत छत्रपति शिवाजी महाराज के काल में हुई थी। छत्रपति शिवाजी महाराज के साहस को गीत के रूप में गाया गया था।
छत्रपति शिवाजी महाराज के अफजल खान को हराने और तानाजी मालुसरे की सिंहगढ़ किले पर शहादत की कहानियों पर कई पोवाड़े रचे गए हैं।
माना जाता है कि पेशवा काल के दौरान पोवाडा लोकगीत अपने चरम पर थे। इस दैरान पानीपत के युद्ध, सदाशिवराव भाऊ और विश्वासराव जैसे वीर योद्धाओं की वीरता पर पोवाड़े लिखे गए।
कैसे गाया जाता है पोवाडा?
पोवाडा गाने वाले गायक को शाहिर कहा जाता है। उसके साथ सह-गायक होते हैं, जिन्हें जिलकरी कहा जाता है, जो मुख्य गायक की पंक्तियों को कोरस में दोहराते हैं। पोवाडा गाने के लिए डफ, तुंतुना और मंजीरा जैसे वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है। इन वाद्य यंत्रों की धुन पर पोवाडा गाने वाले गायक ऐसा समा बांधते हैं कि लगता है आप सचमुच ही युद्ध के मैदान में पहुंच गए हैं। पोवाडा गायक पारंपरिक महाराष्ट्रीयन पोशाक पहनते हैं।
पोवाडा की खासियत क्या है?
पोवाडा वीर रस से भरे गीत होते हैं, जिन्हें सुनकर साहस और देश भक्ति की भावना जाग जाती है। इन गीतों को गाने का मकसद भी यहीं हुआ करता था कि आम जनता में देश प्रेम और साहस की भावना जागे। युद्ध के दौरान मनोबल बढ़ाने के लिए पोवाडा गाए जाते थे। पोवाडा गीतों में आज भी मराठा वीरों का साहस और बलिदान जिंदा है।
